22 जुलाई 2026
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मध्य प्रदेश में 2021–2025 के बीच 61,112 लड़कियां लापता: विधानसभा में सीएम मोहन यादव का खुलासा

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मध्य प्रदेश में 2021–2025 के बीच 61,112 लड़कियां लापता: विधानसभा में सीएम मोहन यादव का खुलासा

सारांश

मध्य प्रदेश विधानसभा में सरकारी आंकड़ों ने चौंकाया — 2021 से 2025 के बीच 61,112 लड़कियां लापता हुईं और 3,241 अभी भी नहीं मिलीं। 2025 में सर्वाधिक 13,146 मामले दर्ज हुए। सरकार का दावा है कि ऑपरेशन मुस्कान और 52 एंटी-ट्रैफिकिंग यूनिट से स्थिति संभाली जा रही है।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 22 जुलाई 2026 को विधानसभा में बताया कि 2021–2025 के बीच 61,112 लड़कियां लापता हुईं।
3,241 लड़कियां अभी भी लापता हैं; 61,498 लड़कियों को सफलतापूर्वक बरामद किया गया।
मामलों में लगातार वृद्धि: 2021 में 9,407 से बढ़कर 2025 में 13,146 तक पहुंचे।
2026 के पहले पांच महीनों में ही 6,309 नए मामले दर्ज।
सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर नाबालिग लड़कियों के सभी मामले 'अपहरण' के रूप में दर्ज किए जाते हैं।
राज्य के सभी 52 महिला पुलिस स्टेशनों में 'एंटी-ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट' और राज्य स्तर पर 'एंटी-ह्यूमन ट्रैफिकिंग ब्यूरो' स्थापित।

मध्य प्रदेश विधानसभा में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 22 जुलाई 2026 को एक लिखित प्रश्न के जवाब में स्वीकार किया कि 2021 से 2025 के बीच राज्य में 61,112 लड़कियां लापता हुईं, जिनमें से 3,241 लड़कियां अभी भी नहीं मिली हैं। सरकारी आंकड़ों पर आधारित यह जानकारी राज्य में बाल सुरक्षा की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

साल-दर-साल बढ़ते मामले

विधानसभा में पेश किए गए वार्षिक आंकड़े एक चिंताजनक ऊर्ध्वगामी प्रवृत्ति दर्शाते हैं। 2021 में 9,407 मामले, 2022 में 9,093, 2023 में 11,250, 2024 में 11,907 और 2025 में सर्वाधिक 13,146 मामले दर्ज किए गए। यह ऐसे समय में आया है जब 2026 के पहले पांच महीनों में ही 6,309 नए मामले सामने आ चुके हैं, जो इस संकट की निरंतरता को रेखांकित करता है।

बरामदगी और लंबित मामले

मुख्यमंत्री ने सदन को बताया कि इसी अवधि में 61,498 लड़कियों को सफलतापूर्वक खोजकर सुरक्षित वापस लाया गया — यह संख्या लापता लड़कियों से अधिक है क्योंकि इसमें 2021 से पहले के कई लंबित मामले भी शामिल हैं। गौरतलब है कि 2021 की शुरुआत में ही 3,627 मामले बकाया थे, जो उस पुराने बोझ को दर्शाता है जिसे पुलिस को नई रिपोर्टों के साथ-साथ निपटाना पड़ा।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश और कानूनी ढांचा

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने स्पष्ट किया कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में लापता नाबालिग लड़कियों से जुड़े सभी मामलों को 'अपहरण' के रूप में दर्ज किया जाता है। इस प्रावधान का उद्देश्य बिना किसी ढिलाई के त्वरित और गहन पुलिस जांच सुनिश्चित करना है।

सरकार की कार्रवाई: ऑपरेशन मुस्कान और अन्य पहल

मध्य प्रदेश सरकार ने बताया कि राज्य में लड़कियों के अपहरण और मानव तस्करी पर अंकुश लगाने के लिए 'ऑपरेशन मुस्कान' चलाया जा रहा है। इसके अंतर्गत 'ऑपरेशन सृजन' विशेष रूप से लड़कियों से जुड़े मामलों पर केंद्रित है, जबकि 'ऑपरेशन अभिमन्यु' लड़कों के मामलों की देखरेख करता है। इसके अतिरिक्त, राज्य स्तर पर एक 'एंटी-ह्यूमन ट्रैफिकिंग ब्यूरो' गठित किया गया है और मध्य प्रदेश के सभी 52 महिला पुलिस स्टेशनों में विशेष 'एंटी-ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट' स्थापित की गई हैं।

आगे की राह

लापता बच्चों की बरामदगी में तेजी लाने और प्रगति की निगरानी के लिए हर महीने समीक्षा बैठकें आयोजित की जा रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि 2026 में दर्ज नए 6,309 मामलों की जांच और तलाशी अभियान युद्धस्तर पर जारी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि संस्थागत ढांचे की मजबूती के बावजूद जमीनी क्रियान्वयन और जागरूकता अभियानों को और तेज करने की आवश्यकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन साथ ही यह सवाल भी उठाते हैं कि 'ऑपरेशन मुस्कान' और 52 एंटी-ट्रैफिकिंग यूनिट जैसे संस्थागत उपायों के बावजूद मामले 2021 के 9,407 से 2025 में 13,146 तक क्यों पहुंचे। बरामदगी की संख्या का लापता संख्या से अधिक होना प्रशासनिक सक्रियता का संकेत है, परंतु 3,241 लड़कियों का अभी भी न मिलना और 2026 में पांच महीनों में ही 6,309 नए मामले यह बताते हैं कि समस्या की जड़ें गहरी हैं। मुख्यधारा की कवरेज जो अक्सर चूकती है वह यह है कि इन आंकड़ों में वर्गीकरण — अपहरण, पलायन, या तस्करी — की स्पष्टता न होने से नीतिगत प्रतिक्रिया कमजोर पड़ती है।
RashtraPress
22 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मध्य प्रदेश में 2021 से 2025 के बीच कितनी लड़कियां लापता हुईं?
सरकारी आंकड़ों के अनुसार इस अवधि में 61,112 लड़कियां लापता हुईं, जिनमें से 3,241 अभी भी नहीं मिली हैं। यह जानकारी मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 22 जुलाई 2026 को विधानसभा में लिखित जवाब में दी।
मध्य प्रदेश में लापता लड़कियों के मामले किस साल सबसे ज्यादा रहे?
2025 में सर्वाधिक 13,146 मामले दर्ज हुए, जो 2021 के 9,407 मामलों की तुलना में करीब 40% अधिक हैं। 2026 के पहले पांच महीनों में ही 6,309 नए मामले सामने आ चुके हैं।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का लापता लड़कियों के मामलों पर क्या असर है?
सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में मध्य प्रदेश में नाबालिग लड़कियों के सभी लापता मामलों को 'अपहरण' के रूप में दर्ज किया जाता है। इससे पुलिस जांच में तेजी और गंभीरता सुनिश्चित होती है।
ऑपरेशन मुस्कान क्या है और यह कैसे काम करता है?
'ऑपरेशन मुस्कान' मध्य प्रदेश सरकार का अभियान है जो लड़कियों के अपहरण और मानव तस्करी को रोकने के लिए चलाया जा रहा है। इसके अंतर्गत 'ऑपरेशन सृजन' लड़कियों पर और 'ऑपरेशन अभिमन्यु' लड़कों पर केंद्रित है।
मध्य प्रदेश सरकार ने मानव तस्करी रोकने के लिए क्या संस्थागत उपाय किए हैं?
राज्य सरकार ने राज्य स्तर पर एक 'एंटी-ह्यूमन ट्रैफिकिंग ब्यूरो' गठित किया है और प्रदेश के सभी 52 महिला पुलिस स्टेशनों में विशेष 'एंटी-ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट' स्थापित की हैं। इसके अलावा मासिक समीक्षा बैठकें भी आयोजित की जाती हैं।
राष्ट्र प्रेस
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