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छत्तीसगढ़ विधानसभा में अपराध आँकड़ों पर तीखी बहस: गृह मंत्री का कमी का दावा, कांग्रेस ने जिलेवार डेटा से किया खंडन

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छत्तीसगढ़ विधानसभा में अपराध आँकड़ों पर तीखी बहस: गृह मंत्री का कमी का दावा, कांग्रेस ने जिलेवार डेटा से किया खंडन

सारांश

छत्तीसगढ़ विधानसभा में गृह मंत्री का दावा — अपराध घटे; कांग्रेस विधायक का जवाब — बच्चों का अपहरण 2023 से हर साल बढ़ रहा है, 2026 में 3,500 पार होने की आशंका। आँकड़ों की यह लड़ाई बताती है कि राज्य में कानून-व्यवस्था की असली तस्वीर अभी भी विवादित है।

मुख्य बातें

गृह मंत्री विजय शर्मा ने दावा किया कि पिछली सरकार के ढाई साल में 18,323 मामलों की तुलना में मौजूदा सरकार में लगभग 16,000 मामले दर्ज हुए।
कांग्रेस विधायक संगीता सिन्हा ने जिलेवार आँकड़े पेश कर दावे को चुनौती दी; छेड़छाड़ के मामले 2024 में 3,096 और 2025 में 3,070 रहे।
बाल अपहरण के मामले लगातार बढ़े — 2023 में 2,300 , 2024 में 2,961 , 2025 में 3,040 , और 2026 के पहले पाँच महीनों में 1,746 ।
राज्य में 13 विशेष महिला पुलिस स्टेशन , 124 बाल-अनुकूल थाने और हर जिले में जुवेनाइल पुलिस यूनिट कार्यरत हैं।
2021 से जून 2026 के बीच जेलों में 375 मौतें ; 62 मजिस्ट्रेट जाँच रिपोर्टें अभी लंबित।
रायपुर में अपहरण के मामले 524 से बढ़कर 634 हुए — जुलाई 2025 से जून 2026 के बीच।

छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के तीसरे दिन, 15 जुलाई 2026 को रायपुर में प्रश्नकाल के दौरान महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध के मुद्दे पर तीखी नोकझोंक देखी गई। कांग्रेस विधायक संगीता सिन्हा ने राज्य में बढ़ते अपराधों को लेकर सरकार को घेरा, जबकि गृह मंत्री विजय शर्मा ने दावा किया कि पिछली सरकार के मुकाबले मामलों में कमी आई है।

सदन में क्या हुआ

कांग्रेस विधायक संगीता सिन्हा ने सरकार से जनवरी 2023 से जून 2026 के बीच पुलिस थानों में दर्ज बलात्कार, छेड़छाड़, मारपीट और हत्या के मामलों का ब्यौरा माँगा। जवाब में गृह मंत्री विजय शर्मा ने कहा कि पिछली सरकार के ढाई वर्ष के कार्यकाल में 18,323 मामले दर्ज हुए थे, जबकि मौजूदा सरकार ने उसी अवधि में लगभग 16,000 मामले दर्ज किए हैं — यानी कमी का रुझान।

हालाँकि, विधायक सिन्हा ने मंत्री के दावे को जिलेवार और साल-दर-साल के आँकड़ों से चुनौती दी। उन्होंने बताया कि छेड़छाड़ के मामले 2024 में 3,096, 2025 में 3,070 और 2026 के शुरुआती पाँच महीनों में 1,550 रहे।

बच्चों के अपहरण के आँकड़े चिंताजनक

सिन्हा ने बच्चों के अपहरण को सबसे गंभीर मुद्दा बताते हुए कहा कि 2023 में 2,300 मामले, 2024 में 2,961, 2025 में 3,040 और 2026 के पहले पाँच महीनों में ही 1,746 मामले सामने आए हैं। उन्होंने आगाह किया कि इस रफ्तार से साल के अंत तक यह आँकड़ा 3,500 को पार कर सकता है। गौरतलब है कि यह लगातार तीसरा साल है जब बाल अपहरण के मामले पिछले साल से अधिक रहे हैं।

सरकार के सुरक्षा उपाय

गृह मंत्री विजय शर्मा ने सदन को बताया कि महिलाओं की सुरक्षा के लिए राज्यभर में 13 विशेष महिला पुलिस स्टेशन संचालित हैं। हर जिले में स्पेशल जुवेनाइल पुलिस यूनिट गठित की गई है और 124 पुलिस स्टेशनों को बाल-अनुकूल बनाया गया है। स्कूलों व कॉलेजों में गुड टच-बैड टच जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। इसके अलावा, सरकार 'अभिव्यक्ति' ऐप, डायल-112 सेवा और गश्त बढ़ाने पर भरोसा कर रही है।

हालाँकि, मंत्री ने स्वयं स्वीकार किया कि इन तमाम उपायों के बावजूद यौन अपराधों में कोई उल्लेखनीय कमी नहीं आई है — जो विपक्ष के तर्क को आंशिक बल देता है।

कस्टडी में मौतें और अपहरण के अन्य आँकड़े

सत्र में जेल मौतों के आँकड़े भी सामने आए। गृह मंत्री ने बताया कि 2021 से 25 जून 2026 के बीच जेलों में 375 मौतें दर्ज हुईं। 373 मामलों में मजिस्ट्रेट जाँच के आदेश दिए गए, जिनमें से 311 रिपोर्टें प्राप्त हो चुकी हैं, जबकि 62 मामले अभी लंबित हैं।

जुलाई 2025 से जून 2026 के बीच अपहरण के मामलों में भी वृद्धि देखी गई। रायपुर में सबसे अधिक बढ़ोतरी हुई, जहाँ संख्या 524 से बढ़कर 634 हो गई। प्रमुख जिलों में हत्या और डकैती के मामलों में मिले-जुले रुझान रहे।

आगे क्या

यह बहस केवल आँकड़ों की लड़ाई नहीं है — यह इस बात का संकेत है कि छत्तीसगढ़ में कानून-व्यवस्था आगामी विधानसभा चर्चाओं में केंद्रीय मुद्दा बनेगी। विपक्ष की माँग है कि सरकार जिलेवार, श्रेणीवार और वार्षिक डेटा सार्वजनिक करे, ताकि दावों की स्वतंत्र जाँच हो सके। सरकार के लिए असली परीक्षा यह होगी कि घोषित उपाय ज़मीन पर कितने प्रभावी साबित होते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

और यही इस बहस की असली समस्या है। समग्र संख्याओं की तुलना तब भ्रामक होती है जब श्रेणी-दर-श्रेणी डेटा अलग कहानी कहता हो। बाल अपहरण में लगातार तीन साल की बढ़ोतरी और गृह मंत्री का स्वयं यह मानना कि यौन अपराधों में 'खास कमी नहीं आई' — यह सरकार के अपने बयान का अंतर्विरोध है। असली जवाबदेही के लिए जरूरी है कि सरकार जिलेवार, अपराध-श्रेणीवार और वार्षिक डेटा सार्वजनिक मंच पर रखे — विधानसभा की बहस में नहीं, बल्कि सत्यापन-योग्य प्रारूप में।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

छत्तीसगढ़ में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध के आँकड़ों पर विवाद क्यों है?
गृह मंत्री विजय शर्मा ने पिछली सरकार के मुकाबले मामलों में कमी का दावा किया, जबकि कांग्रेस विधायक संगीता सिन्हा ने जिलेवार और साल-दर-साल के आँकड़े पेश कर बताया कि बाल अपहरण समेत कई श्रेणियों में मामले बढ़े हैं। दोनों पक्षों के आँकड़ों की तुलना-पद्धति अलग होने से यह विवाद पैदा हुआ।
छत्तीसगढ़ में बच्चों के अपहरण के मामले कितने हैं?
कांग्रेस विधायक संगीता सिन्हा द्वारा सदन में पेश आँकड़ों के अनुसार, 2023 में 2,300, 2024 में 2,961, 2025 में 3,040 और 2026 के पहले पाँच महीनों में 1,746 बाल अपहरण के मामले दर्ज हुए। उन्होंने चेतावनी दी कि 2026 में यह आँकड़ा 3,500 को पार कर सकता है।
छत्तीसगढ़ सरकार ने महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाए हैं?
सरकार ने राज्यभर में 13 विशेष महिला पुलिस स्टेशन, हर जिले में स्पेशल जुवेनाइल पुलिस यूनिट और 124 बाल-अनुकूल पुलिस स्टेशन स्थापित किए हैं। इसके साथ 'अभिव्यक्ति' ऐप, डायल-112 सेवा और स्कूल-कॉलेजों में जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं।
छत्तीसगढ़ की जेलों में कस्टडी मौतों की स्थिति क्या है?
गृह मंत्री विजय शर्मा ने विधानसभा को बताया कि 2021 से 25 जून 2026 के बीच राज्य की जेलों में 375 मौतें हुईं। 373 मामलों में मजिस्ट्रेट जाँच के आदेश दिए गए, जिनमें से 311 रिपोर्टें मिल चुकी हैं और 62 अभी लंबित हैं।
रायपुर में अपहरण के मामलों में कितनी बढ़ोतरी हुई?
जुलाई 2025 से जून 2026 के बीच रायपुर में अपहरण के मामले 524 से बढ़कर 634 हो गए, जो प्रमुख जिलों में सबसे अधिक वृद्धि है। अन्य जिलों में हत्या और डकैती के मामलों में मिले-जुले रुझान देखे गए।
राष्ट्र प्रेस
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