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मध्य प्रदेश में 2,426 स्कूल बंद: कांग्रेस प्रमुख जीतू पटवारी ने मोहन यादव सरकार से माँगा जवाब

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मध्य प्रदेश में 2,426 स्कूल बंद: कांग्रेस प्रमुख जीतू पटवारी ने मोहन यादव सरकार से माँगा जवाब

सारांश

देशभर में बंद हुए स्कूलों में से आधे से ज़्यादा — 4,791 में से 2,426 — अकेले मध्य प्रदेश में हैं। कांग्रेस प्रमुख जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर जिलेवार ब्यौरा, ड्रॉप-आउट के कारण और बंद स्कूलों की संपत्तियों का हिसाब माँगा है।

मुख्य बातें

2025-26 में मध्य प्रदेश में 2,426 स्कूल बंद या विलय किए गए — देश में सर्वाधिक।
देशभर में बंद 4,791 स्कूलों में से आधे से अधिक अकेले मध्य प्रदेश में थे।
राज्य में स्कूलों की संख्या 1,22,120 से घटकर 1,19,694 हुई; शिक्षकों की संख्या 6,82,492 से बढ़कर 6,92,820 हुई।
कक्षा 9-10 में 13% ड्रॉप-आउट दर पर जीतू पटवारी ने सरकार से स्पष्टीकरण माँगा।
पटवारी ने बंद स्कूलों की ज़मीन, इमारत और संपत्तियों के उपयोग का भी हिसाब माँगा।

मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने 5 सितंबर 2025 को मुख्यमंत्री मोहन यादव को एक कड़ा पत्र लिखकर राज्य में 2025-26 के दौरान 2,426 स्कूलों को बंद किए जाने और उनके विलय पर सरकार से स्पष्टीकरण माँगा। पटवारी ने सवाल उठाया कि क्या सिकुड़ते स्कूल नेटवर्क के कारण ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्गों के बच्चों के लिए शिक्षा तक पहुँच और भी मुश्किल हो रही है।

यूडीआईएसई+ डेटा क्या कहता है

ताज़ा यूडीआईएसई+ (UDISE+) आँकड़ों के अनुसार, 2025-26 में देशभर में बंद या विलय किए गए 4,791 स्कूलों में से 2,426 अकेले मध्य प्रदेश में थे — जो सभी राज्यों में सर्वाधिक संख्या है। इसी अवधि में राज्य में स्कूलों की कुल संख्या 2024-25 के 1,22,120 से घटकर 2025-26 में 1,19,694 रह गई।

गौरतलब है कि इसी दौरान शिक्षकों की संख्या 6,82,492 से बढ़कर 6,92,820 हो गई — यानी स्कूल कम हुए, लेकिन शिक्षक अधिक। पटवारी ने सरकार से यह भी बताने को कहा कि स्कूलों की संख्या घटने के बावजूद अतिरिक्त शिक्षकों को कहाँ तैनात किया गया।

पटवारी की माँगें: जिलेवार, ब्लॉकवार ब्यौरा दे सरकार

कांग्रेस नेता ने मुख्यमंत्री से उन 2,426 स्कूलों की जिलेवार, ब्लॉक-वार और स्कूल-वार पूरी सूची माँगी। उन्होंने यह भी जानना चाहा कि कितने स्कूल प्रशासनिक आदेशों से बंद किए गए, कितने का विलय हुआ और कितने पूरी तरह समाप्त कर दिए गए।

पटवारी ने यह भी पूछा कि स्कूल बंद होने के बाद प्रभावित बच्चों को नज़दीकी विद्यालय तक पहुँचने के लिए कितनी अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है, और क्या सरकार ने उनके लिए साइकिल, बस या किसी अन्य सुरक्षित परिवहन की व्यवस्था की है।

ड्रॉप-आउट दर और नामांकन विसंगतियाँ

पटवारी ने यूडीआईएसई+ डेटा का हवाला देते हुए कक्षा 9-10 में 13 प्रतिशत ड्रॉप-आउट दर के कारणों पर भी सरकार से जवाब माँगा। उन्होंने कक्षा 8 से 9 और 10 से 11 के बीच पढ़ाई छोड़ने वाले बच्चों के अलग-अलग आँकड़े भी माँगे।

इसके अलावा, राज्य शिक्षा पोर्टल और यूडीआईएसई+ के नामांकन आँकड़ों के बीच जो अंतर है, उसके लिए जवाबदेही तय करने की भी माँग की गई। पटवारी के अनुसार यह विसंगति संदिग्ध है और इसकी जाँच होनी चाहिए।

बंद स्कूलों की संपत्तियों का क्या हुआ

कांग्रेस नेता ने यह भी जानना चाहा कि बंद या विलय किए गए स्कूलों की ज़मीन, इमारतें, फर्नीचर, प्रयोगशालाएँ और अन्य सरकारी संपत्तियों का उपयोग अब किस प्रयोजन के लिए किया जा रहा है। उन्होंने आशंका जताई कि इन संपत्तियों के दुरुपयोग या बिक्री की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

सरकारी दावों और ज़मीनी हक़ीक़त में विरोधाभास

पटवारी ने यह भी रेखांकित किया कि मोहन यादव सरकार एक ओर उच्च शिक्षा पर बढ़े खर्च, बेहतर परिणामों और नई योजनाओं को अपनी उपलब्धि बता रही है, वहीं दूसरी ओर 2,426 स्कूल बंद किए जा रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि यह विरोधाभास ग्रामीण शिक्षा के प्रति सरकार की प्राथमिकताओं पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में शिक्षा अधिकार और स्कूल समेकन की बहस तेज़ है। मध्य प्रदेश का यह आँकड़ा राष्ट्रीय स्तर पर बंद हुए स्कूलों का आधे से अधिक हिस्सा है, जो राज्य की शिक्षा नीति को केंद्रीय जाँच के दायरे में लाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन जब 13% ड्रॉप-आउट दर पहले से मौजूद हो, तो स्कूल दूर करना उसे और बढ़ा सकता है। शिक्षकों की संख्या बढ़ने और स्कूलों की संख्या घटने का विरोधाभास बताता है कि नीति-निर्माण में ज़मीनी वास्तविकता की जगह कागज़ी दक्षता को तरजीह दी जा रही है। जब तक सरकार जिलेवार ब्यौरा सार्वजनिक नहीं करती, यह सवाल बना रहेगा कि किन इलाकों के बच्चे सबसे ज़्यादा प्रभावित हुए।
RashtraPress
5 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मध्य प्रदेश में 2025-26 में कितने स्कूल बंद या विलय किए गए?
यूडीआईएसई+ डेटा के अनुसार, 2025-26 में मध्य प्रदेश में 2,426 स्कूल बंद किए गए या उनका विलय हुआ — जो देश के सभी राज्यों में सर्वाधिक है। इस दौरान राज्य में कुल स्कूलों की संख्या 1,22,120 से घटकर 1,19,694 रह गई।
जीतू पटवारी ने मोहन यादव सरकार से क्या माँगा है?
कांग्रेस प्रमुख जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर बंद या विलय किए गए 2,426 स्कूलों की जिलेवार, ब्लॉक-वार और स्कूल-वार सूची माँगी है। साथ ही उन्होंने बच्चों के लिए परिवहन व्यवस्था, ड्रॉप-आउट आँकड़े और बंद स्कूलों की संपत्तियों के उपयोग का ब्यौरा भी माँगा है।
स्कूल बंद होने से ग्रामीण बच्चों पर क्या असर पड़ेगा?
पटवारी के अनुसार, स्कूलों के विलय के बाद बच्चों को अधिक दूरी तय करनी पड़ सकती है, जिससे ड्रॉप-आउट दर बढ़ने का खतरा है। उन्होंने सरकार से पूछा है कि क्या प्रभावित बच्चों के लिए साइकिल, बस या अन्य सुरक्षित परिवहन की व्यवस्था की गई है।
मध्य प्रदेश में कक्षा 9-10 की ड्रॉप-आउट दर कितनी है?
यूडीआईएसई+ डेटा के अनुसार, मध्य प्रदेश में कक्षा 9-10 के लिए ड्रॉप-आउट दर 13 प्रतिशत है। पटवारी ने सरकार से इसके कारण स्पष्ट करने और कक्षा 8 से 9 तथा 10 से 11 के बीच पढ़ाई छोड़ने वाले बच्चों के अलग-अलग आँकड़े माँगे हैं।
स्कूल घटे लेकिन शिक्षक बढ़े — इस विरोधाभास पर क्या सवाल उठे हैं?
पटवारी ने रेखांकित किया कि 2025-26 में स्कूलों की संख्या घटी, जबकि शिक्षकों की संख्या 6,82,492 से बढ़कर 6,92,820 हो गई। उन्होंने सरकार से पूछा है कि अतिरिक्त शिक्षकों को कहाँ तैनात किया गया और क्या यह संसाधनों का सही उपयोग है।
राष्ट्र प्रेस
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