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आईसीएमआर का हाई-एल्टीट्यूड रिसर्च सेंटर: जेपी नड्डा 11 जुलाई को केलोंग में रखेंगे आधारशिला

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आईसीएमआर का हाई-एल्टीट्यूड रिसर्च सेंटर: जेपी नड्डा 11 जुलाई को केलोंग में रखेंगे आधारशिला

सारांश

हिमालय की ऊंचाइयों पर स्वास्थ्य अनुसंधान को नई दिशा देने की तैयारी है। आईसीएमआर का केलोंग सेंटर माउंटेन मेडिसिन से लेकर ड्रोन-आधारित स्वास्थ्य सेवाओं तक को एकीकृत करेगा — और रणनीतिक सीमावर्ती क्षेत्र में साल भर सक्रिय रहेगा।

मुख्य बातें

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा 11 जुलाई 2025 को केलोंग, लाहौल-स्पीति में आईसीएमआर के हाई-एल्टीट्यूड रिसर्च सेंटर की आधारशिला रखेंगे।
यह सेंटर केलोंग के मौजूदा आईसीएमआर फील्ड स्टेशन को मल्टी-डिसिप्लिनरी रिसर्च हब में अपग्रेड करेगा।
अनुसंधान के दायरे में माउंटेन मेडिसिन, जलवायु-संवेदनशील रोग, मातृ-शिशु स्वास्थ्य , मानसिक स्वास्थ्य और आपदा चिकित्सा शामिल हैं।
टेलीमेडिसिन , ड्रोन लॉजिस्टिक्स और रियल-टाइम सर्विलांस से दुर्गम क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचाई जाएंगी।
डीआरडीओ , एएफएमएस , हिमाचल प्रदेश सरकार और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के साथ सहयोग होगा।

केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा 11 जुलाई 2025 को हिमाचल प्रदेश के लाहौल और स्पीति जिले के केलोंग में भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के 'हाई-एल्टीट्यूड मेडिसिन एंड पब्लिक हेल्थ रिसर्च सेंटर' की आधारशिला रखेंगे। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी गई है। यह सेंटर हिमालयी क्षेत्रों की विशेष स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने के लिए समर्पित भारत का पहला बहु-विषयक अनुसंधान केंद्र होगा।

सेंटर की स्थापना और उद्देश्य

यह नया केंद्र स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के अंतर्गत आईसीएमआर द्वारा स्थापित किया जा रहा है। केलोंग में आईसीएमआर के मौजूदा फील्ड स्टेशन को एक पूर्ण, मल्टी-डिसिप्लिनरी हब में रूपांतरित किया जाएगा, जो अनुसंधान, नवाचार और क्षमता निर्माण पर केंद्रित होगा। मंत्रालय के अनुसार, हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र की अधिक ऊंचाई, अत्यधिक जलवायु परिस्थितियाँ और कठिन भूगोल विशेष स्वास्थ्य समस्याएँ उत्पन्न करते हैं, जिनके लिए स्थान-विशिष्ट वैज्ञानिक समाधान आवश्यक हैं।

अनुसंधान के प्रमुख क्षेत्र

यह सेंटर अधिक ऊंचाई पर शरीर की कार्यप्रणाली (फिजियोलॉजी) और अनुकूलन, माउंटेन मेडिसिन, जलवायु-संवेदनशील और उभरती बीमारियों, संक्रामक तथा गैर-संचारी रोगों पर शोध करेगा। इसके साथ ही मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, पोषण, मानसिक स्वास्थ्य, पर्यावरण एवं व्यावसायिक स्वास्थ्य और आपदा चिकित्सा भी इसके अनुसंधान के दायरे में होंगे। यह ऐसे समय में आया है जब जलवायु परिवर्तन के कारण हिमालयी क्षेत्रों में बीमारियों के पैटर्न तेज़ी से बदल रहे हैं।

डिजिटल स्वास्थ्य और तकनीकी एकीकरण

दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच सुनिश्चित करने के लिए यह सेंटर टेलीमेडिसिन, ड्रोन-सक्षम हेल्थकेयर लॉजिस्टिक्स, डिजिटल हेल्थ प्लेटफॉर्म और रियल-टाइम पब्लिक हेल्थ सर्विलांस प्रणालियों को एकीकृत करेगा। गौरतलब है कि लाहौल-स्पीति जैसे क्षेत्रों में वर्ष के कई महीने सड़क संपर्क टूट जाता है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं की डिजिटल डिलीवरी अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है।

संस्थागत सहयोग और रणनीतिक महत्व

यह सेंटर आर्म्ड फोर्सेस मेडिकल सर्विसेज (एएफएमएस), रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ), हिमाचल प्रदेश सरकार और देश-विदेश के अकादमिक संस्थानों के साथ मिलकर कार्य करेगा। रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण इस सीमावर्ती क्षेत्र में सेंटर की साल भर उपस्थिति सुनिश्चित की जाएगी, जिससे आदिवासी और उच्च-ऊंचाई पर रहने वाली आबादी के लिए दीर्घकालिक कोहोर्ट अध्ययन संभव होंगे। यह सेंटर हाई-एल्टीट्यूड मेडिसिन पर वैश्विक अनुसंधान में भी भारत का योगदान बढ़ाएगा।

आधारशिला रखे जाने के बाद सेंटर के पूर्ण परिचालन की समयसीमा और बजट का ब्यौरा आने वाले दिनों में स्पष्ट होने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी क्रियान्वयन की होगी। लाहौल-स्पीति जैसे क्षेत्रों में बुनियादी ढाँचे और मानव संसाधन की दीर्घकालिक कमी रही है, और 'साल भर पहुँच' का वादा तब तक अधूरा है जब तक कार्यबल की तैनाती और आपूर्ति श्रृंखला की ठोस योजना न हो। डीआरडीओ और एएफएमएस के साथ सहयोग सेंटर को रणनीतिक महत्व देता है, पर नागरिक-सैन्य स्वास्थ्य डेटा साझाकरण की पारदर्शिता एक अनुत्तरित प्रश्न है। यदि यह सेंटर वास्तव में नीति-समर्थन तक पहुँचना चाहता है, तो शोध परिणामों को सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा।
RashtraPress
9 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आईसीएमआर का हाई-एल्टीट्यूड मेडिसिन रिसर्च सेंटर क्या है?
यह हिमाचल प्रदेश के केलोंग में स्थापित होने वाला एक बहु-विषयक अनुसंधान केंद्र है, जो हिमालयी क्षेत्रों की विशेष स्वास्थ्य चुनौतियों — जैसे अधिक ऊंचाई की बीमारियाँ, जलवायु-संवेदनशील रोग और आपदा चिकित्सा — पर केंद्रित होगा। यह आईसीएमआर के मौजूदा केलोंग फील्ड स्टेशन का उन्नत रूप होगा।
इस सेंटर की आधारशिला कब और कौन रखेगा?
केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा 11 जुलाई 2025 को लाहौल और स्पीति जिले के केलोंग में इस सेंटर की आधारशिला रखेंगे। यह जानकारी स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के आधिकारिक बयान में दी गई है।
यह सेंटर हिमालयी क्षेत्रों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
हिमालयी क्षेत्रों में अधिक ऊंचाई, अत्यधिक जलवायु और कठिन भूगोल के कारण बीमारियों के पैटर्न और स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच मैदानी इलाकों से बिल्कुल भिन्न है। यह सेंटर इन्हीं स्थान-विशिष्ट चुनौतियों के लिए वैज्ञानिक प्रमाण और व्यावहारिक समाधान तैयार करेगा।
इस सेंटर में कौन-सी तकनीकें इस्तेमाल होंगी?
सेंटर टेलीमेडिसिन, ड्रोन-सक्षम हेल्थकेयर लॉजिस्टिक्स, डिजिटल हेल्थ प्लेटफॉर्म और रियल-टाइम पब्लिक हेल्थ सर्विलांस प्रणालियों को एकीकृत करेगा। इसका उद्देश्य उन दुर्गम क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचाना है जहाँ सड़क संपर्क अक्सर बाधित रहता है।
इस सेंटर के साथ कौन-से संस्थान सहयोग करेंगे?
आर्म्ड फोर्सेस मेडिकल सर्विसेज (एएफएमएस), रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ), हिमाचल प्रदेश सरकार और भारत व विदेशों के अकादमिक एवं अनुसंधान संस्थान इस सेंटर के साथ संस्थागत सहयोग स्थापित करेंगे। यह साझेदारी ट्रांसलेशनल रिसर्च और नीतिगत समर्थन के लिए एक समग्र इकोसिस्टम तैयार करेगी।
राष्ट्र प्रेस
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