₹305.97 करोड़ बकाया फिर भी माइनिंग लीज रिन्यूअल: उमंग सिंघार ने CM मोहन यादव से माँगा जवाब
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस के विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने मंगलवार, 30 जून को भोपाल में आरोप लगाया कि मध्य प्रदेश सरकार ने खनन पट्टाधारकों (लीज-होल्डर्स) पर ₹305.97 करोड़ का जुर्माना बकाया रहने के बावजूद उनकी माइनिंग लीज रिन्यू कर दी। उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव से सार्वजनिक रूप से जवाब माँगा, जिनके पास खनिज संसाधन (मिनरल रिसोर्स) विभाग का प्रभार भी है।
मुख्य आरोप
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सिंघार ने कहा, 'मोहन यादव सरकार माइनिंग माफिया के प्रति बहुत ज़्यादा नरमी बरतती दिख रही है। राज्य के माइनिंग माफिया पर लगभग ₹305.97 करोड़ का जुर्माना बकाया है। फिर भी इन जुर्मानों को वसूलने या कोई कार्रवाई करने के बजाय, सरकार उनकी माइनिंग लीज रिन्यू कर रही है।' उन्होंने माँग की कि सरकार बकाया राशि वसूले और लीज रिन्यूअल की जानकारी सार्वजनिक करे।
हाईकोर्ट की कार्यवाही
सिंघार ने मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की ग्वालियर पीठ में चल रही कार्यवाही का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, न्यायालय ने इस मामले में राज्य सरकार से एक सप्ताह के भीतर जवाब माँगा है। यह तथ्य इस विवाद को महज़ राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से आगे ले जाता है।
एक्स पर सीधा सवाल
सिंघार ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर भी मुख्यमंत्री को सीधे संबोधित करते हुए लिखा, 'पहले उज्जैन में जमीन का मामला और अब बकाया ₹305 करोड़ वसूले बिना माइनिंग माफिया के लिए लीज को आगे बढ़ाना। सीएम मोहन यादव, आपके पास खुद मिनरल रिसोर्स मंत्री का विभाग है। आपको ही इसका जवाब देना होगा। मध्य प्रदेश की जनता जानना चाहती है कि सरकार माइनिंग माफिया के प्रति इतनी नरमी क्यों दिखा रही है।'
राजनीतिक पृष्ठभूमि
ये आरोप ऐसे समय में आए हैं जब मध्य प्रदेश में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) और विपक्षी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के बीच राजनीतिक तनाव पहले से तीखा है। हाल के दिनों में कांग्रेस ने मुख्यमंत्री मोहन यादव पर उनके परिवार के सदस्यों से जुड़े कथित भूमि विवाद को लेकर भी निशाना साधा था। BJP ने उन आरोपों को राजनीति से प्रेरित और बेबुनियाद बताते हुए खारिज किया था।
सरकार की प्रतिक्रिया
माइनिंग लीज रिन्यूअल और बकाया जुर्माने को लेकर सिंघार के आरोपों पर मध्य प्रदेश सरकार ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। गौरतलब है कि खनिज संसाधन विभाग सीधे मुख्यमंत्री के अधीन है, जिससे यह मामला और अधिक राजनीतिक संवेदनशीलता रखता है। आने वाले दिनों में उच्च न्यायालय की ग्वालियर पीठ में सरकार का जवाब इस विवाद की दिशा तय करेगा।