30 जून 2026
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₹305.97 करोड़ बकाया फिर भी माइनिंग लीज रिन्यूअल: उमंग सिंघार ने CM मोहन यादव से माँगा जवाब

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₹305.97 करोड़ बकाया फिर भी माइनिंग लीज रिन्यूअल: उमंग सिंघार ने CM मोहन यादव से माँगा जवाब

सारांश

मध्य प्रदेश में कांग्रेस के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने CM मोहन यादव पर सीधा हमला बोला — ₹305.97 करोड़ जुर्माना वसूले बिना माइनिंग लीज रिन्यू करने का आरोप लगाया। मामला अब MP हाईकोर्ट की ग्वालियर पीठ तक पहुँच चुका है, जिसने सरकार से एक हफ्ते में जवाब माँगा है।

मुख्य बातें

कांग्रेस नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने 30 जून 2026 को आरोप लगाया कि MP सरकार ने ₹305.97 करोड़ जुर्माना बकाया रहते माइनिंग लीज रिन्यू कीं।
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की ग्वालियर पीठ ने राज्य सरकार से एक सप्ताह के भीतर जवाब माँगा है।
खनिज संसाधन विभाग सीधे मुख्यमंत्री मोहन यादव के अधीन है, जिससे जवाबदेही का सवाल सीधे उन पर है।
सिंघार ने एक्स पर पोस्ट कर CM को सार्वजनिक रूप से जवाब देने की चुनौती दी।
राज्य सरकार ने अभी तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।

कांग्रेस के विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने मंगलवार, 30 जून को भोपाल में आरोप लगाया कि मध्य प्रदेश सरकार ने खनन पट्टाधारकों (लीज-होल्डर्स) पर ₹305.97 करोड़ का जुर्माना बकाया रहने के बावजूद उनकी माइनिंग लीज रिन्यू कर दी। उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव से सार्वजनिक रूप से जवाब माँगा, जिनके पास खनिज संसाधन (मिनरल रिसोर्स) विभाग का प्रभार भी है।

मुख्य आरोप

एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सिंघार ने कहा, 'मोहन यादव सरकार माइनिंग माफिया के प्रति बहुत ज़्यादा नरमी बरतती दिख रही है। राज्य के माइनिंग माफिया पर लगभग ₹305.97 करोड़ का जुर्माना बकाया है। फिर भी इन जुर्मानों को वसूलने या कोई कार्रवाई करने के बजाय, सरकार उनकी माइनिंग लीज रिन्यू कर रही है।' उन्होंने माँग की कि सरकार बकाया राशि वसूले और लीज रिन्यूअल की जानकारी सार्वजनिक करे।

हाईकोर्ट की कार्यवाही

सिंघार ने मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की ग्वालियर पीठ में चल रही कार्यवाही का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, न्यायालय ने इस मामले में राज्य सरकार से एक सप्ताह के भीतर जवाब माँगा है। यह तथ्य इस विवाद को महज़ राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से आगे ले जाता है।

एक्स पर सीधा सवाल

सिंघार ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर भी मुख्यमंत्री को सीधे संबोधित करते हुए लिखा, 'पहले उज्जैन में जमीन का मामला और अब बकाया ₹305 करोड़ वसूले बिना माइनिंग माफिया के लिए लीज को आगे बढ़ाना। सीएम मोहन यादव, आपके पास खुद मिनरल रिसोर्स मंत्री का विभाग है। आपको ही इसका जवाब देना होगा। मध्य प्रदेश की जनता जानना चाहती है कि सरकार माइनिंग माफिया के प्रति इतनी नरमी क्यों दिखा रही है।'

राजनीतिक पृष्ठभूमि

ये आरोप ऐसे समय में आए हैं जब मध्य प्रदेश में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) और विपक्षी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के बीच राजनीतिक तनाव पहले से तीखा है। हाल के दिनों में कांग्रेस ने मुख्यमंत्री मोहन यादव पर उनके परिवार के सदस्यों से जुड़े कथित भूमि विवाद को लेकर भी निशाना साधा था। BJP ने उन आरोपों को राजनीति से प्रेरित और बेबुनियाद बताते हुए खारिज किया था।

सरकार की प्रतिक्रिया

माइनिंग लीज रिन्यूअल और बकाया जुर्माने को लेकर सिंघार के आरोपों पर मध्य प्रदेश सरकार ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। गौरतलब है कि खनिज संसाधन विभाग सीधे मुख्यमंत्री के अधीन है, जिससे यह मामला और अधिक राजनीतिक संवेदनशीलता रखता है। आने वाले दिनों में उच्च न्यायालय की ग्वालियर पीठ में सरकार का जवाब इस विवाद की दिशा तय करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो ₹305.97 करोड़ की वसूली में विफलता प्रशासनिक लापरवाही है या कुछ और — यह स्पष्ट करना सरकार की ज़िम्मेदारी है। उज्जैन भूमि विवाद के बाद यह दूसरा बड़ा आरोप है, जो BJP के लिए राजनीतिक दबाव बढ़ाता है। बिना पारदर्शी लीज रिन्यूअल नीति और स्वतंत्र जाँच के, खनन क्षेत्र में जवाबदेही के दावे खोखले रहेंगे।
RashtraPress
30 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उमंग सिंघार ने मध्य प्रदेश सरकार पर क्या आरोप लगाए हैं?
कांग्रेस नेता उमंग सिंघार ने आरोप लगाया है कि MP सरकार ने खनन पट्टाधारकों पर ₹305.97 करोड़ का जुर्माना बकाया रहने के बावजूद उनकी माइनिंग लीज रिन्यू कर दी। उनका कहना है कि यह माइनिंग माफिया को अनुचित लाभ पहुँचाने जैसा है।
माइनिंग लीज विवाद में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की क्या भूमिका है?
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की ग्वालियर पीठ में इस मामले पर कार्यवाही चल रही है और न्यायालय ने राज्य सरकार से एक सप्ताह के भीतर जवाब माँगा है। यह न्यायिक हस्तक्षेप मामले को विशेष गंभीरता देता है।
CM मोहन यादव पर सीधा सवाल क्यों उठाया जा रहा है?
मुख्यमंत्री मोहन यादव के पास खनिज संसाधन (मिनरल रिसोर्स) विभाग का प्रभार भी है। इसलिए सिंघार का तर्क है कि लीज रिन्यूअल और जुर्माना वसूली की ज़िम्मेदारी सीधे मुख्यमंत्री पर आती है।
भाजपा ने कांग्रेस के आरोपों पर क्या कहा है?
भाजपा ने कांग्रेस के पिछले आरोपों — जैसे उज्जैन भूमि विवाद — को राजनीतिक मकसद से प्रेरित और बेबुनियाद बताते हुए खारिज किया है। माइनिंग लीज के ताज़ा आरोपों पर सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
यह विवाद मध्य प्रदेश की राजनीति में किस संदर्भ में आया है?
यह आरोप BJP और कांग्रेस के बीच बढ़ते राजनीतिक टकराव के बीच आए हैं। हाल के हफ्तों में कांग्रेस ने CM मोहन यादव पर उज्जैन भूमि मामले सहित कई मुद्दों पर हमला किया है, और माइनिंग लीज विवाद इस राजनीतिक संघर्ष का नया मोर्चा बन गया है।
राष्ट्र प्रेस
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