उज्जैन सिंहस्थ भूमि अधिग्रहण: BJP नेताओं को ₹3 करोड़/हेक्टेयर, किसानों को ₹60.48 लाख — कांग्रेस का गंभीर आरोप
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव कुणाल चौधरी ने 25 जुलाई 2025 को आरोप लगाया कि मध्य प्रदेश के उज्जैन में सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के तहत किए जा रहे भूमि अधिग्रहण में मुआवजा वितरण में भारी असमानता बरती जा रही है — भारतीय जनता पार्टी (BJP) से जुड़े नेताओं की जमीन के लिए ₹3 करोड़ प्रति हेक्टेयर और उसी इलाके के किसानों को मात्र ₹60.48 लाख प्रति हेक्टेयर का मुआवजा दिए जाने का दावा किया गया है। यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब उज्जैन में सिंहस्थ महाकुंभ की तैयारियाँ जोरों पर हैं और बड़े पैमाने पर विकास कार्य जारी हैं।
आरोपों का विवरण
चौधरी ने सोशल मीडिया पर जारी बयान में कहा कि एक ही परियोजना में BJP नेताओं की जमीन का मुआवजा ₹3 करोड़ प्रति हेक्टेयर आँका गया, जबकि उसी क्षेत्र के साधारण किसानों को ₹60.48 लाख प्रति हेक्टेयर दिया जा रहा है। उन्होंने कहा, 'अगर दो खेतों के बीच सिर्फ एक मेड़ का फर्क है, तो मुआवजे में करोड़ों का अंतर किस भ्रष्टाचार की कहानी बयाँ करता है?'
उनके अनुसार यह केवल भेदभाव नहीं, बल्कि किसानों के संवैधानिक अधिकारों की 'खुली लूट' है। उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव से सीधे सवाल किया कि क्या मध्य प्रदेश में अब न्याय भी राजनीतिक सदस्यता देखकर मिलेगा।
सिंहस्थ 2028 और भूमि अधिग्रहण की पृष्ठभूमि
उज्जैन में 2028 में आयोजित होने वाले सिंहस्थ महाकुंभ के लिए राज्य सरकार बड़े पैमाने पर बुनियादी ढाँचे का निर्माण कर रही है। इसके लिए शहर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में जमीन का अधिग्रहण किया जा रहा है। गौरतलब है कि सिंहस्थ एक विशाल धार्मिक आयोजन है जिसमें करोड़ों श्रद्धालु शामिल होते हैं, और इसकी तैयारियाँ वर्षों पहले से शुरू होती हैं। इस पृष्ठभूमि में मुआवजे की असमानता के आरोप किसानों और विपक्ष दोनों के लिए एक संवेदनशील मुद्दा बन गए हैं।
कांग्रेस की माँगें
कुणाल चौधरी ने तीन प्रमुख माँगें रखी हैं: पहली, पूरे प्रकरण की उच्च न्यायालय की निगरानी में जाँच; दूसरी, दोषियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज की जाए; और तीसरी, सभी किसानों को समान दर पर मुआवजा सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने इस मामले को 'सत्ता के दुरुपयोग, भाई-भतीजावाद और किसानों के साथ विश्वासघात' की संज्ञा दी।
सरकार की प्रतिक्रिया
अभी तक मध्य प्रदेश सरकार या BJP की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मुआवजे की दरों में अंतर के पीछे भूमि की श्रेणी, उपयोग या अन्य तकनीकी कारण हो सकते हैं — यह तथ्य स्वतंत्र जाँच के बिना स्थापित नहीं किया जा सकता। राष्ट्र प्रेस ने सरकार का पक्ष जानने का प्रयास किया, किंतु अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है।
आगे क्या होगा
यह मामला अब राजनीतिक रूप से गरमाने की संभावना है क्योंकि सिंहस्थ 2028 के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया अभी जारी है और आने वाले महीनों में और अधिग्रहण अपेक्षित है। यदि उच्च न्यायालय में याचिका दायर होती है, तो मुआवजे की दरों की न्यायिक समीक्षा हो सकती है। किसान संगठनों की प्रतिक्रिया और सरकार का जवाब इस विवाद की दिशा तय करेगा।