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बिदादी भूमि अधिग्रहण: निखिल कुमारस्वामी का कर्नाटक कांग्रेस पर हमला, राहुल गांधी से किसानों के लिए हस्तक्षेप की अपील

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बिदादी भूमि अधिग्रहण: निखिल कुमारस्वामी का कर्नाटक कांग्रेस पर हमला, राहुल गांधी से किसानों के लिए हस्तक्षेप की अपील

सारांश

जेडी(एस) नेता निखिल कुमारस्वामी ने बिदादी में ₹33,000 करोड़ के रियल एस्टेट प्रोजेक्ट के लिए किसानों की उपजाऊ जमीन अधिग्रहण का आरोप लगाते हुए राहुल गांधी से हस्तक्षेप की माँग की। प्रभावितों में 80% से अधिक एससी, एसटी और ओबीसी किसान बताए जा रहे हैं।

मुख्य बातें

निखिल कुमारस्वामी ने 17 जून को एक्स पर पोस्ट कर बिदादी भूमि अधिग्रहण मामले में कर्नाटक कांग्रेस सरकार पर निशाना साधा।
कथित तौर पर ₹33,000 करोड़ के रियल एस्टेट प्रोजेक्ट के लिए बिदादी में उपजाऊ कृषि भूमि अधिग्रहित की जा रही है।
प्रभावित लोगों में 80% से अधिक छोटे किसान, एससी, एसटी और ओबीसी समुदाय के बताए जा रहे हैं।
सैकड़ों किसानों ने राहुल गांधी को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की माँग की है।
निखिल ने भूमि अधिग्रहण कानून, 2013 के प्रावधानों की अनदेखी का आरोप लगाया।
नवनियुक्त बेंगलुरु विकास मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा से कचरा प्रबंधन और ड्रेनेज को प्राथमिकता देने का आग्रह किया।

जनता दल (सेक्युलर) की युवा शाखा के प्रदेश अध्यक्ष निखिल कुमारस्वामी ने बेंगलुरु के निकट बिदादी क्षेत्र में प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण को लेकर कर्नाटक की कांग्रेस सरकार पर तीखा प्रहार किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि ₹33,000 करोड़ के एक बड़े रियल एस्टेट प्रोजेक्ट के लिए किसानों की उपजाऊ कृषि भूमि जबरन अधिग्रहित की जा रही है, और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से माँग की है कि वे इस मामले में हस्तक्षेप कर किसानों के हितों की रक्षा करें।

एक्स पर पोस्ट कर उठाया मुद्दा

निखिल कुमारस्वामी ने बुधवार, 17 जून को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में बताया कि उन्होंने कुछ दिन पहले राहुल गांधी को पत्र लिखकर बिदादी में प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण रोकने की माँग की थी। उन्होंने दावा किया कि अब तक सैकड़ों स्थानीय किसान भी सीधे राहुल गांधी को पत्र लिखकर अपनी पीड़ा और चिंता व्यक्त कर चुके हैं।

प्रभावित किसानों की स्थिति

जेडी(एस) नेता के अनुसार, भूमि अधिग्रहण से प्रभावित होने वाले लोगों में 80 प्रतिशत से अधिक छोटे किसान, अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) समुदाय के लोग शामिल हैं। उनका आरोप है कि इस प्रक्रिया में भूमि अधिग्रहण कानून, 2013 की भावना और प्रावधानों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है।

निखिल ने राहुल गांधी पर सीधा सवाल दागते हुए कहा कि यदि वे देशभर में किसानों के अधिकारों की आवाज उठाते हैं, तो कर्नाटक के किसानों के मुद्दे पर उन्हें चुप्पी नहीं साधनी चाहिए। उन्होंने माँग की कि कांग्रेस नेतृत्व अपनी ही सरकार के कथित अन्याय के खिलाफ खड़ा हो और जबरन अधिग्रहण की प्रक्रिया तुरंत रोकी जाए।

नए विकास मंत्री को बधाई, पर शर्त भी

एक अन्य पोस्ट में निखिल कुमारस्वामी ने कृष्णा बायरे गौड़ा को बेंगलुरु विकास मंत्री के रूप में नई जिम्मेदारी मिलने पर बधाई दी। हालाँकि, उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि मंत्री पद की घोषणा का 12 दिन का इंतजार सिल्क बोर्ड जंक्शन के मशहूर ट्रैफिक जाम जैसा महसूस हुआ।

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि विकास मंत्रालय की जिम्मेदारी तो नवनियुक्त मंत्री को दी गई है, लेकिन शहरी नियोजन से जुड़े महत्वपूर्ण विभागों और संस्थाओं का नियंत्रण मुख्यमंत्री के पास ही बना हुआ है। इसके बावजूद उन्होंने कृष्णा बायरे गौड़ा के प्रशासनिक अनुभव और राजस्व विभाग में किए गए पूर्व सुधारों की सराहना की।

बेंगलुरु के लिए प्राथमिकताएँ

निखिल कुमारस्वामी ने सुझाव दिया कि बेंगलुरु के विकास के लिए फिलहाल सर्वोच्च प्राथमिकता कचरा प्रबंधन, सीवेज व्यवस्था और जल निकासी तंत्र को सुदृढ़ करने पर होनी चाहिए। उनका कहना है कि मानसून के दौरान शहरवासियों को भव्य परियोजनाओं से अधिक साफ सड़कें, बेहतर ड्रेनेज और प्रभावी सीवेज सिस्टम की दरकार है।

यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब कर्नाटक में भूमि अधिग्रहण के मुद्दे पर राजनीतिक तापमान पहले से ऊँचा है। गौरतलब है कि बिदादी क्षेत्र में प्रस्तावित यह परियोजना आने वाले दिनों में सत्ताधारी कांग्रेस के लिए एक बड़ी राजनीतिक चुनौती बन सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 करोड़ की परियोजना में भूमि अधिग्रहण कानून, 2013 का वास्तव में उल्लंघन हो रहा है — जिसकी स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है। यह पहली बार नहीं है जब बेंगलुरु के विस्तार की महत्वाकांक्षाएँ आसपास के कृषि क्षेत्रों से टकराई हों; बिदादी इस बार केंद्र में है। जब तक कर्नाटक सरकार परियोजना की शर्तें और मुआवजे का ब्यौरा सार्वजनिक नहीं करती, तब तक दोनों पक्षों के दावों को सतर्कता से परखना जरूरी है।
RashtraPress
4 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिदादी भूमि अधिग्रहण विवाद क्या है?
बेंगलुरु के निकट बिदादी क्षेत्र में कर्नाटक सरकार कथित तौर पर ₹33,000 करोड़ के एक बड़े रियल एस्टेट प्रोजेक्ट के लिए किसानों की उपजाऊ कृषि भूमि अधिग्रहित करना चाहती है। जेडी(एस) नेता निखिल कुमारस्वामी का आरोप है कि इस प्रक्रिया में भूमि अधिग्रहण कानून, 2013 के प्रावधानों की अनदेखी की जा रही है।
निखिल कुमारस्वामी ने राहुल गांधी से हस्तक्षेप की माँग क्यों की?
निखिल कुमारस्वामी का तर्क है कि राहुल गांधी देशभर में किसानों के अधिकारों की आवाज उठाते हैं, इसलिए उन्हें अपनी ही पार्टी की कर्नाटक सरकार द्वारा किसानों की जमीन अधिग्रहण के मुद्दे पर भी स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए। उन्होंने पत्र के जरिए और एक्स पर पोस्ट कर यह माँग उठाई है।
बिदादी अधिग्रहण से कौन से समुदाय सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं?
निखिल कुमारस्वामी के अनुसार प्रभावित लोगों में 80% से अधिक छोटे किसान, अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) समुदाय के लोग हैं। सैकड़ों किसानों ने सीधे राहुल गांधी को पत्र लिखकर अपनी पीड़ा व्यक्त की है।
कृष्णा बायरे गौड़ा के बारे में निखिल कुमारस्वामी ने क्या कहा?
निखिल कुमारस्वामी ने कृष्णा बायरे गौड़ा को बेंगलुरु विकास मंत्री बनाए जाने पर बधाई दी, लेकिन व्यंग्यात्मक ढंग से कहा कि 12 दिन के इंतजार ने सिल्क बोर्ड जंक्शन के ट्रैफिक जाम की याद दिला दी। उन्होंने यह भी कहा कि शहरी नियोजन के प्रमुख विभाग मुख्यमंत्री के अधीन रहने से मंत्री की भूमिका सीमित रह सकती है।
निखिल कुमारस्वामी ने बेंगलुरु के लिए क्या प्राथमिकताएँ सुझाई हैं?
उन्होंने सुझाव दिया कि बेंगलुरु में फिलहाल कचरा प्रबंधन, सीवेज व्यवस्था और जल निकासी तंत्र को सुदृढ़ करने पर सर्वाधिक ध्यान दिया जाए। उनके अनुसार मानसून के दौरान नागरिकों को भव्य परियोजनाओं से अधिक बुनियादी सुविधाओं की जरूरत है।
राष्ट्र प्रेस
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