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बिदादी भूमि अधिग्रहण: कुमारस्वामी का कांग्रेस सरकार पर हमला, किसानों के लिए कानूनी लड़ाई का ऐलान

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बिदादी भूमि अधिग्रहण: कुमारस्वामी का कांग्रेस सरकार पर हमला, किसानों के लिए कानूनी लड़ाई का ऐलान

सारांश

470 दिनों के किसान विरोध को दरकिनार कर कर्नाटक कांग्रेस सरकार ने बिदादी टाउनशिप के लिए अंतिम भूमि अधिग्रहण अधिसूचना जारी की। केंद्रीय मंत्री कुमारस्वामी ने इसे 'अक्षम्य' बताते हुए कानूनी लड़ाई का ऐलान किया और मुख्यमंत्री शिवकुमार को प्रभावित गाँवों के दौरे की चुनौती दी।

मुख्य बातें

केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने बिदादी टाउनशिप परियोजना के लिए जारी भूमि अधिग्रहण अधिसूचना को 'अक्षम्य' करार दिया।
किसान 470 दिनों से इस परियोजना का विरोध कर रहे हैं; कुमारस्वामी के अनुसार 80–90% किसान परियोजना के विरोध में हैं।
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की कांग्रेस सरकार ने किसानों की आपत्तियों के बावजूद अंतिम अधिसूचना जारी की।
कुमारस्वामी ने प्रभावित किसानों की ओर से कानूनी लड़ाई लड़ने का ऐलान किया और शिवकुमार को गाँव दौरे की चुनौती दी।
आरोप: विरोधी किसानों पर एफआईआर दर्ज की जा रही हैं, जबकि गृह मंत्री इससे इनकार कर रहे हैं।

केंद्रीय मंत्री और जनता दल (सेक्युलर) के कर्नाटक अध्यक्ष एचडी कुमारस्वामी ने शुक्रवार, 13 जून 2025 को बिदादी टाउनशिप परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण की अंतिम अधिसूचना जारी करने पर कर्नाटक कांग्रेस सरकार की कड़ी निंदा की। किसानों के 470 दिनों से अधिक के लगातार विरोध के बावजूद यह अधिसूचना जारी की गई, जिसे कुमारस्वामी ने 'अक्षम्य' और 'निरंकुश अहंकार' करार दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे प्रभावित किसानों की ओर से कानूनी लड़ाई लड़ेंगे।

मुख्य घटनाक्रम

मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने शुक्रवार को बेंगलुरु के निकट स्थित बिदादी और आसपास के क्षेत्रों में प्रस्तावित टाउनशिप परियोजना के लिए कृषि भूमि अधिग्रहण की अंतिम अधिसूचना जारी कर दी। यह अधिसूचना तब आई जब किसान 470 दिनों से इस परियोजना का विरोध कर रहे हैं।

कुमारस्वामी के अनुसार, विवादित भूमि उपजाऊ कृषि भूमि है और 80 से 90 प्रतिशत किसान इस परियोजना के विरोध में हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस उपजाऊ जमीन को एक रियल एस्टेट परियोजना के लिए हथियाना चाहती है, जबकि अन्य स्थानों पर बंजर भूमि उपलब्ध है।

कुमारस्वामी की चुनौती और आरोप

केंद्रीय मंत्री ने मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को सीधी चुनौती दी कि वे उनके साथ प्रभावित गाँवों का दौरा करें और स्वयं तय करें कि अधिसूचित भूमि के मालिक वास्तव में किसान हैं या नहीं। कुमारस्वामी ने कहा, 'किसानों को किसान न कहना अहंकार की पराकाष्ठा है। यह उन लोगों का घोर अपमान है जो देश का पेट पालते हैं।'

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विरोध कर रहे किसानों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा रही हैं, जबकि राज्य के गृह मंत्री का दावा है कि ऐसी कोई एफआईआर दर्ज नहीं हुई। कुमारस्वामी ने इस विरोधाभास को 'समझ से परे' बताया।

किसानों पर कथित अत्याचार का आरोप

कुमारस्वामी ने आरोप लगाया कि अपनी जमीन छोड़ने से इनकार करने वाले किसानों पर कथित तौर पर पुलिस और 'भाड़े के गुंडों' द्वारा अत्याचार किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि ग्रामीणों द्वारा चुने गए जनप्रतिनिधि, जिन्हें उन्होंने सत्ता में लाया था, वे भी इस प्रक्रिया का हिस्सा बन गए हैं — जो उनके शब्दों में 'त्रासदी को और गहरा करता है।'

गौरतलब है कि भूमि अधिग्रहण कानून के अनुसार किसी भी सरकारी अधिग्रहण के लिए प्रभावित किसानों की सहमति अनिवार्य होती है। कुमारस्वामी ने तर्क दिया कि बहुमत की सहमति के बिना अंतिम अधिसूचना जारी करना कानूनी रूप से चुनौती योग्य है।

आगे क्या होगा

कुमारस्वामी ने स्पष्ट किया कि वे प्रभावित किसानों की ओर से कानूनी लड़ाई लड़ेंगे और स्वयं भी प्रभावित गाँवों का दौरा करेंगे। यह विवाद कर्नाटक में आगामी राजनीतिक गतिविधियों को प्रभावित कर सकता है, क्योंकि जेडी(एस) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) का गठबंधन केंद्र में है और राज्य में कांग्रेस सरकार के खिलाफ यह एक बड़ा मुद्दा बन सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो यह राज्य में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया और किसान सहमति के कानूनी मानकों की व्यापक परीक्षा बन सकती है।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिदादी भूमि अधिग्रहण विवाद क्या है?
यह कर्नाटक सरकार की बेंगलुरु के निकट बिदादी क्षेत्र में एक टाउनशिप परियोजना के लिए उपजाऊ कृषि भूमि अधिग्रहण की योजना से जुड़ा विवाद है। किसान 470 दिनों से अधिक समय से इस परियोजना का विरोध कर रहे हैं।
कुमारस्वामी ने कांग्रेस सरकार पर क्या आरोप लगाए?
कुमारस्वामी ने आरोप लगाया कि सरकार किसानों की सहमति के बिना उपजाऊ जमीन हथियाकर एक रियल एस्टेट परियोजना के लिए दे रही है। उन्होंने यह भी कहा कि विरोधी किसानों पर एफआईआर दर्ज की जा रही हैं और कथित तौर पर पुलिस व भाड़े के गुंडों द्वारा अत्याचार हो रहा है।
कुमारस्वामी ने मुख्यमंत्री शिवकुमार को क्या चुनौती दी?
कुमारस्वामी ने मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को प्रभावित गाँवों का संयुक्त दौरा करने की चुनौती दी, ताकि यह स्वयं तय हो सके कि अधिसूचित भूमि के मालिक वास्तव में किसान हैं या नहीं। उन्होंने कहा कि वे भी उन गाँवों में जाएँगे।
इस विवाद में कानूनी स्थिति क्या है?
कुमारस्वामी का तर्क है कि भूमि अधिग्रहण कानून के तहत किसानों की सहमति अनिवार्य है और बहुमत की आपत्ति के बावजूद अंतिम अधिसूचना जारी करना कानूनी रूप से चुनौती योग्य है। उन्होंने प्रभावित किसानों की ओर से कानूनी लड़ाई लड़ने का ऐलान किया है।
बिदादी परियोजना का कितने किसान विरोध कर रहे हैं?
कुमारस्वामी के अनुसार 80 से 90 प्रतिशत किसान इस परियोजना के विरोध में हैं और केवल कुछ स्वार्थी तत्व ही इस टाउनशिप परियोजना का समर्थन करते हैं। किसान 470 दिनों से अधिक समय से लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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