बिदादी टाउनशिप: किसानों पर FIR से भड़का विपक्ष, JD(S) ने 48 घंटे में रिहाई की माँग की
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक की बिदादी टाउनशिप परियोजना एक बड़े राजनीतिक विवाद का केंद्र बन गई है। 14 जुलाई 2026 को बेंगलुरु से सामने आई खबरों के अनुसार, मंडलाहल्ली गाँव के किसानों पर दर्ज एफआईआर को लेकर विपक्षी दल जनता दल (सेक्युलर) ने कर्नाटक की कांग्रेस सरकार को घेर लिया है। किसान कथित तौर पर पिछले 500 दिनों से इस परियोजना के विरुद्ध शांतिपूर्ण धरना दे रहे थे।
विवाद की जड़: जॉइंट मेजरमेंट सर्वे
विवाद तब भड़का जब सरकारी अधिकारियों ने कथित तौर पर किसानों को पूर्व सूचना दिए बिना उनकी भूमि पर जॉइंट मेजरमेंट सर्वे (JMC) करने का प्रयास किया। जब किसानों और महिलाओं ने इस कदम पर आपत्ति जताई, तो प्रशासन ने उनके विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर दी और कुछ लोगों को हिरासत में भी लिया। विपक्ष का आरोप है कि यह कार्रवाई किसानों को डराने-धमकाने की सुनियोजित कोशिश है।
निखिल कुमार का हमला
जनता दल (सेक्युलर) के राज्य युवा अध्यक्ष निखिल कुमार ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कांग्रेस सरकार की कड़ी आलोचना की। उन्होंने लिखा, 'बिदादी टाउनशिप मामले में बेगुनाह किसानों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने वाली कांग्रेस सरकार की मनमानी की मैं कड़ी निंदा करता हूँ।' निखिल कुमार ने यह भी माँग की कि किसानों के विरुद्ध दर्ज 'झूठी एफआईआर' रद्द की जाए और हिरासत में लिए गए निर्दोष लोगों को 48 घंटों के भीतर रिहा किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि अन्यथा इस 'जन-विरोधी सरकार' के खिलाफ संघर्ष तय है।
केंद्रीय मंत्री कुमारस्वामी की प्रतिक्रिया
जेडी(एस) के आधिकारिक एक्स हैंडल के माध्यम से यह भी बताया गया कि केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने राज्य सरकार के इस कदम की कड़ी निंदा की है। उनके अनुसार, सरकार की 'उकसावे वाली कार्रवाई' ही उस संघर्ष को बलपूर्वक दबाने की कोशिश है, जिसे किसान और महिलाएँ अपनी 'धरती माता' को बचाने के लिए लड़ रहे हैं। जेडी(एस) ने इसे देश के अन्नदाताओं की भूमि छीनने की 'दमनकारी कार्रवाई' करार दिया।
आगे क्या होगा
यह विवाद कर्नाटक में भूमि अधिग्रहण और टाउनशिप परियोजनाओं को लेकर उठते राजनीतिक तनाव का नया अध्याय है। 48 घंटे की समयसीमा के साथ विपक्ष ने सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है। यह देखना होगा कि कांग्रेस सरकार किसानों की रिहाई और एफआईआर वापसी की माँग पर क्या रुख अपनाती है, और क्या यह मामला विधानसभा में भी गूँजता है।