किसानों को चार गुना मुआवजा: MP सरकार के बड़े फैसले पर कांग्रेस-भाजपा में जंग
सारांश
Key Takeaways
- मोहन यादव सरकार ने ग्रामीण कृषि भूमि अधिग्रहण पर मुआवजा बाजार दर का चार गुना करने का फैसला किया।
- गुणन कारक (मल्टीप्लिकेशन फैक्टर) को 1.0 से बढ़ाकर 2.0 किया गया, जिससे मुआवजा दोगुने से चार गुना हो गया।
- कांग्रेस के कुणाल चौधरी ने कहा कि 2014 का कानून MP में 12 साल देरी से लागू हुआ, यह किसानों के साथ धोखा है।
- रतलाम सिक्स लेन और इंदौर-देवास रोड परियोजनाओं में कम मुआवजा पाए किसानों के लिए न्याय की मांग उठाई गई।
- भाजपा प्रवक्ता डॉ. हितेश वाजपेई ने इसे ऐतिहासिक और अभूतपूर्व निर्णय बताया।
- यह नियम संपूर्ण मध्य प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में तत्काल प्रभाव से लागू होगा।
भोपाल, 23 अप्रैल। मध्य प्रदेश में किसानों को भूमि अधिग्रहण पर चार गुना मुआवजा देने का ऐतिहासिक फैसला मुख्यमंत्री मोहन यादव की सरकार ने लिया है। राज्य सरकार ने कृषि भूमि के भूअर्जन पर गुणन कारक (मल्टीप्लिकेशन फैक्टर) को 1.0 से बढ़ाकर 2.0 कर दिया है, जिससे किसानों को बाजार दर का चार गुना मुआवजा मिलेगा। इस निर्णय के बाद कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने आ गई हैं।
सरकार का बड़ा फैसला: क्या बदला?
अब तक ग्रामीण क्षेत्र में सरकारी परियोजनाओं के लिए कृषि भूमि अधिग्रहण पर किसानों को बाजार दर का दोगुना मुआवजा मिलता था। मोहन यादव सरकार के नए आदेश के बाद यह राशि सीधे चार गुना हो जाएगी। यह फैसला संपूर्ण मध्य प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में लागू होगा और इससे लाखों किसान परिवार लाभान्वित होंगे।
राज्य सरकार के अनुसार यह निर्णय किसानों की आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करने और भूमि अधिग्रहण को अधिक न्यायसंगत बनाने के उद्देश्य से लिया गया है। कलेक्टर रेट के आधार पर अब चार गुना राशि किसानों के खाते में जाएगी।
कांग्रेस का हमला: 12 साल की देरी पर सवाल
कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव एवं पूर्व विधायक कुणाल चौधरी ने सरकार के इस फैसले पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि मनमोहन सिंह और राहुल गांधी की पहल पर बना भू अधिग्रहण कानून पूरे देश में 1 जनवरी 2014 को लागू हुआ था, लेकिन मध्य प्रदेश में इसे 12 साल तक लागू नहीं किया गया।
चौधरी ने आरोप लगाया कि इन 12 वर्षों में रतलाम सिक्स लेन और इंदौर-देवास रोड जैसी बड़ी परियोजनाओं के लिए हजारों किसानों की जमीन औने-पौने दामों पर अधिग्रहित की गई। उन्होंने मांग की कि उन किसानों को हुए नुकसान की भरपाई की जाए और भाजपा सरकार इस धोखे के लिए माफी मांगे।
भाजपा का पलटवार: ऐतिहासिक कदम बताया
भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता डॉ. हितेश वाजपेई ने सरकार के फैसले को किसानों के हित में उठाया गया अभूतपूर्व कदम करार दिया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री मोहन यादव ने जो निर्णय लिया है, वैसा साहसिक फैसला पहले कभी नहीं हुआ। किसानों का हित सर्वोपरि रखना इस सरकार की प्राथमिकता है।
वाजपेई ने पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का नाम लिए बिना परोक्ष निशाना साधते हुए कहा कि जब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मुख्यमंत्री थे, तब भी ऐसा कोई साहसिक निर्णय नहीं लिया गया था। मोहन यादव का यह फैसला किसानों के लिए एक मिसाल बनेगा।
किसानों पर प्रभाव और आगे की राह
इस नीतिगत बदलाव से मध्य प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में पारदर्शिता और किसानों को उचित मूल्य मिलने की उम्मीद बढ़ी है। विशेषज्ञों का मानना है कि चार गुना मुआवजे से किसान परिवारों की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा और भूमि विवादों में कमी आएगी।
अब देखना यह होगा कि कांग्रेस की मांग पर सरकार पुराने अधिग्रहण मामलों की समीक्षा करती है या नहीं। आगामी दिनों में यह मुद्दा विधानसभा और जनमानस दोनों स्तरों पर गरमाता रहेगा।