भारत-ऑस्ट्रेलिया TKDL समझौता: पारंपरिक ज्ञान की सुरक्षा को मिली वैश्विक मजबूती
सारांश
मुख्य बातें
वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) ने 10 जुलाई 2026 को ऑस्ट्रेलिया के बौद्धिक संपदा कार्यालय IP ऑस्ट्रेलिया के साथ ट्रेडिशनल नॉलेज डिजिटल लाइब्रेरी (TKDL) तक पहुँच प्रदान करने का एक महत्वपूर्ण समझौता किया। मेलबर्न में आयोजित भारत-ऑस्ट्रेलिया तीसरे वार्षिक शिखर सम्मेलन के दौरान संपन्न यह करार भारत की पारंपरिक विरासत पर अनुचित पेटेंट रोकने की दिशा में एक ठोस कदम है।
समझौते की मुख्य विशेषताएँ
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के बयान के अनुसार, यह TKDL एक्सेस एग्रीमेंट शिखर सम्मेलन के 18 प्रमुख परिणामों में शामिल है। इस करार के तहत IP ऑस्ट्रेलिया, पेटेंट आवेदनों की जाँच के दौरान ऑस्ट्रेलियाई पेटेंट कानूनों के अनुरूप प्रायर आर्ट (पूर्व-उपलब्ध ज्ञान) की पहचान के लिए इस डेटाबेस का उपयोग कर सकेगा। यह समझौता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज की उपस्थिति में संपन्न हुआ।
TKDL क्या है और यह क्यों अनूठा है
TKDL दुनिया का पहला ऐसा प्रायर आर्ट डेटाबेस है जिसे भारत ने अपने समृद्ध पारंपरिक ज्ञान को बायोपाइरेसी और गलत पेटेंट से सुरक्षित करने के लिए विकसित किया था। वर्तमान में इसमें आयुर्वेद, यूनानी, सिद्ध, सोवा रिग्पा और योग से जुड़ी 5.2 लाख से अधिक औषधीय विधियों और पारंपरिक प्रथाओं का विस्तृत विवरण दर्ज है। यह सामग्री अंग्रेज़ी, जर्मन, फ्रेंच, जापानी और स्पेनिश — पाँच अंतरराष्ट्रीय भाषाओं में उपलब्ध है, ताकि विश्वभर के पेटेंट परीक्षक इसका उपयोग कर सकें।
वैश्विक सुरक्षा का विस्तार
इस समझौते के साथ अब दुनिया के 18 पेटेंट कार्यालयों को गोपनीयता समझौते (नॉन-डिस्क्लोजर एग्रीमेंट) के तहत TKDL तक पहुँच मिल चुकी है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत और ऑस्ट्रेलिया दोनों देशों की सदियों पुरानी स्वदेशी ज्ञान परंपराओं के दुरुपयोग की आशंका अंतरराष्ट्रीय मंचों पर चिंता का विषय बनी हुई है।
दोनों देशों की साझा प्रतिबद्धता
मंत्रालय के बयान में कहा गया कि भारत और ऑस्ट्रेलिया दोनों के पास समृद्ध स्वदेशी ज्ञान परंपराएँ, पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियाँ और सांस्कृतिक विरासत है। यह समझौता उनकी उस साझा प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है जिसके तहत दस्तावेजीकृत प्रायर आर्ट के प्रभावी उपयोग से बौद्धिक संपदा व्यवस्था को और सुदृढ़ किया जाएगा।
आगे की राह
गौरतलब है कि CSIR-TKDL की स्थापना मूलतः इसी उद्देश्य से की गई थी कि भारतीय पारंपरिक ज्ञान के आधार पर विदेशी पेटेंट कार्यालयों में गलत पेटेंट जारी न हो सकें। ऑस्ट्रेलिया के इस डेटाबेस से जुड़ने के बाद वैश्विक पेटेंट जाँच प्रक्रिया अधिक सटीक और न्यायसंगत होने की उम्मीद है, और भारत की पारंपरिक विरासत की रक्षा का दायरा और व्यापक होगा।