भारत-ऑस्ट्रेलिया सांस्कृतिक समझौता: ऑस्ट्रेलिया लौटाएगा ऐतिहासिक कलाकृतियाँ, भारत सौंपेगा 'फर्स्ट नेशंस' पूर्वज के अवशेष
सारांश
मुख्य बातें
भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को लेकर एक ऐतिहासिक पहल सामने आई है। ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने 9 जुलाई को दोनों देशों के बीच हुए एक महत्वपूर्ण समझौते की घोषणा की, जिसके तहत ऑस्ट्रेलिया अपने प्रमुख संग्रहालयों में संरक्षित भारतीय कलात्मक और ऐतिहासिक वस्तुएँ स्वेच्छा से भारत को लौटाएगा। इसके साथ ही, भारत सरकार ने चेन्नई स्थित गवर्नमेंट म्यूजियम में संरक्षित ऑस्ट्रेलिया के फर्स्ट नेशंस (आदिवासी) समुदाय के एक पूर्वज के अवशेष बिना किसी शर्त के उनके पारंपरिक संरक्षकों को वापस सौंपने पर सहमति जताई है।
समझौते का विवरण
ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) द्वारा जारी बयान में इस द्विपक्षीय सहयोग को एक समझौता ज्ञापन (MoU) के रूप में रेखांकित किया गया है। इस MoU के अंतर्गत नेशनल गैलरी ऑफ ऑस्ट्रेलिया और आर्ट गैलरी ऑफ न्यू साउथ वेल्स के संग्रह में मौजूद भारत की सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी कई महत्वपूर्ण कलात्मक और ऐतिहासिक वस्तुएँ स्वेच्छा से भारत को लौटाई जाएंगी। यह कदम नैतिक संग्रह प्रबंधन के अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप है।
फर्स्ट नेशंस अवशेषों की वापसी
ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने कहा कि फर्स्ट नेशंस समुदायों के पूर्वजों की उनके पारंपरिक समुदायों में वापसी 'अत्यंत सम्मानजनक और भावनात्मक महत्व' रखती है। सरकार के अनुसार, इसे ऐतिहासिक न्याय और मेल-मिलाप की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। भारत का यह निर्णय दोनों देशों के बीच गहरे सांस्कृतिक संबंधों और आपसी विश्वास का प्रतीक है।
ऑस्ट्रेलिया के कला मंत्री टोनी बर्क ने कहा कि पूर्वजों की वापसी और सांस्कृतिक महत्व की वस्तुओं का आदान-प्रदान 'भारत और ऑस्ट्रेलिया के साझा मूल्यों और आपसी सम्मान का प्रतीक है।' वहीं, स्वदेशी ऑस्ट्रेलियाई मामलों की मंत्री मलांडिरी मैक्कार्थी ने इस प्रक्रिया में भारत के सहयोग का स्वागत करते हुए इसे 'अतीत की गलतियों को सुधारने और ऐतिहासिक न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम' बताया।
प्रधानमंत्री मोदी की भूमिका
ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस निर्णय की विशेष सराहना की, जिसके तहत ऑस्ट्रेलियाई फर्स्ट नेशंस समुदाय के पूर्वजों के अवशेष उनके पारंपरिक संरक्षकों को लौटाए जाएंगे। अल्बनीज ने कहा, 'भारत और ऑस्ट्रेलिया का साझा इतिहास दोनों देशों के लोगों को जोड़ता है और सांस्कृतिक सहयोग इन संबंधों को और गहरा बना रहा है।'
व्यापक संदर्भ और आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर औपनिवेशिक काल की सांस्कृतिक वस्तुओं की वापसी को लेकर बहस तेज हो रही है। गौरतलब है कि भारत पिछले कुछ वर्षों में अमेरिका, ब्रिटेन और अन्य देशों से भी अपनी सांस्कृतिक धरोहर वापस मँगवाने में सफल रहा है। यह समझौता दोनों देशों के बीच व्यापक द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देने का काम करेगा और सांस्कृतिक कूटनीति के क्षेत्र में एक नई मिसाल स्थापित करेगा।