9 जुलाई 2026
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भारत-ऑस्ट्रेलिया रक्षा उद्योग एकीकरण पर सहमति, हिंद-प्रशांत के लिए 2026 की संयुक्त घोषणा जारी

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भारत-ऑस्ट्रेलिया रक्षा उद्योग एकीकरण पर सहमति, हिंद-प्रशांत के लिए 2026 की संयुक्त घोषणा जारी

सारांश

भारत और ऑस्ट्रेलिया ने मेलबर्न में रक्षा उद्योगों के एकीकरण और समुद्री सुरक्षा रोडमैप पर सहमति जताई। यह 2020 की व्यापक रणनीतिक साझेदारी का विस्तार है — और हिंद-प्रशांत में बढ़ती भू-रणनीतिक अनिश्चितताओं के बीच दोनों देशों के बीच गहराते रक्षा संबंधों का स्पष्ट संकेत।

मुख्य बातें

भारत और ऑस्ट्रेलिया ने 9 जुलाई 2026 को मेलबर्न में रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग पर संयुक्त घोषणा जारी की।
रक्षा उद्योगों के एकीकरण और रक्षा आपूर्ति श्रृंखला को अधिक मजबूत बनाने पर सहमति बनी।
भारत-ऑस्ट्रेलिया समुद्री सुरक्षा सहयोग रोडमैप तैयार करने का निर्णय लिया गया।
UNCLOS 1982 के तहत समुद्री मार्गों और हवाई उड़ानों की स्वतंत्रता के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई गई।
साइबर सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी और उभरती प्रौद्योगिकियों में ऑस्ट्रेलिया-भारत पैक्ट्स के तहत सहयोग बढ़ाने पर सहमति।
क्वाड के तहत मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (HADR) अभियानों को मजबूत करने और संयुक्त अभ्यास आयोजित करने का संकल्प।

भारत और ऑस्ट्रेलिया ने 9 जुलाई 2026 को मेलबर्न में अपनी व्यापक रणनीतिक साझेदारी को नई धार देते हुए रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग पर एक महत्वपूर्ण संयुक्त घोषणा जारी की। दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों ने रक्षा उद्योगों के एकीकरण, समुद्री सुरक्षा, साइबर सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी सहयोग और आपदा राहत के क्षेत्रों में सहयोग को तेज करने का संकल्प लेते हुए एक खुले, शांतिपूर्ण, स्थिर और समृद्ध हिंद-प्रशांत क्षेत्र के साझा लक्ष्य की पुनः पुष्टि की। यह घोषणा 2020 में स्थापित व्यापक रणनीतिक साझेदारी की अगली कड़ी है।

साझेदारी की पृष्ठभूमि और नई प्रतिबद्धताएँ

संयुक्त घोषणा में रेखांकित किया गया कि 2020 में स्थापित व्यापक रणनीतिक साझेदारी के बाद से दोनों देशों के रणनीतिक, आर्थिक और जन-से-जन संबंध निरंतर सुदृढ़ हुए हैं। भारत और ऑस्ट्रेलिया ने क्वाड सहित विभिन्न क्षेत्रीय और बहुपक्षीय मंचों पर अपने सहयोग को क्षेत्रीय सुरक्षा और समृद्धि के लिए अनिवार्य बताया। दोनों देशों ने क्षेत्र में बढ़ती भू-रणनीतिक अनिश्चितताओं पर चिंता व्यक्त करते हुए सभी देशों से अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप बिना बल प्रयोग या दबाव के विवादों के शांतिपूर्ण समाधान का आह्वान किया।

रक्षा सहयोग और सैन्य अंतर-संचालनीयता

रक्षा सहयोग को और गहरा करने के लिए दोनों देशों ने हिंद-प्रशांत से जुड़े रक्षा मामलों पर नियमित परामर्श, संयुक्त सैन्य अभ्यासों की जटिलता बढ़ाने तथा सशस्त्र बलों के बीच इंटरऑपरेबिलिटी और सूचना साझाकरण को मजबूत करने पर सहमति जताई। इसके अतिरिक्त एक-दूसरे के क्षेत्रों से सैन्य विमानों की तैनाती बढ़ाने, रक्षा कर्मियों के आदान-प्रदान और प्रशिक्षण को प्राथमिकता देने का भी निर्णय लिया गया। घोषणा में रक्षा उद्योगों के एकीकरण, रक्षा आपूर्ति श्रृंखला को अधिक मजबूत और लचीला बनाने तथा रक्षा नवाचार, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में उन्नत सहयोग को बढ़ावा देने का संकल्प भी शामिल है।

समुद्री सुरक्षा और नियम-आधारित व्यवस्था

समुद्री सुरक्षा को दोनों देशों के रक्षा, आर्थिक और रणनीतिक हितों का केंद्र बताते हुए भारत-ऑस्ट्रेलिया समुद्री सुरक्षा सहयोग रोडमैप तैयार करने का निर्णय लिया गया। इसके तहत समुद्री सुरक्षा सहयोग की गहराई, नियमितता और तकनीकी क्षमता बढ़ाई जाएगी। घोषणा में 1982 के संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून सम्मेलन (UNCLOS) के अनुरूप समुद्री मार्गों और हवाई उड़ानों की स्वतंत्रता के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई गई। साथ ही हिंद महासागर रिम एसोसिएशन (IORA), आसियान और प्रशांत द्वीप मंच (PIF) की क्षेत्रीय भूमिका का समर्थन किया गया।

साइबर सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी और उभरती प्रौद्योगिकियाँ

दोनों देशों ने साइबर सुरक्षा, महत्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकियों तथा आपूर्ति श्रृंखलाओं में सहयोग को ऑस्ट्रेलिया-भारत पैक्ट्स के तहत और मजबूत करने पर सहमति जताई। आतंकवादी खतरों से जुड़ी सूचनाओं के आदान-प्रदान को बढ़ाने, आतंकवाद के वित्तपोषण, महत्वपूर्ण बुनियादी ढाँचे की सुरक्षा, समुद्री क्षेत्र और ऑनलाइन कट्टरपंथ से निपटने में भी सहयोग बढ़ाने का फैसला किया गया। अनियमित प्रवासन, मानव तस्करी और अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध के खिलाफ सहयोग जारी रखने की प्रतिबद्धता भी दोहराई गई।

क्वाड और आगे की राह

संयुक्त घोषणा में भारत और ऑस्ट्रेलिया ने अमेरिका और जापान सहित अन्य इंडो-पैसिफिक साझेदारों के साथ सहयोग बढ़ाने, क्वाड के तहत मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (HADR) अभियानों को मजबूत करने तथा प्राकृतिक आपदाओं और संकट की स्थिति में समन्वित प्रतिक्रिया के लिए साझा योजना विकसित करने पर सहमति व्यक्त की। दोनों देशों ने परमाणु हथियारों से मुक्त विश्व और सत्यापन योग्य वैश्विक परमाणु निरस्त्रीकरण के प्रति भी अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। इस महत्वाकांक्षी एजेंडे का उद्देश्य एक शांतिपूर्ण, सुरक्षित और समृद्ध इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के निर्माण में ठोस योगदान देना है — और आने वाले महीनों में इसके क्रियान्वयन की दिशा में ठोस कदम उठाए जाने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी असली अहमियत 'रक्षा उद्योगों के एकीकरण' के उस वाक्यांश में है जो आपूर्ति श्रृंखला की निर्भरता को चीन से दूर करने की रणनीति का हिस्सा है। समुद्री सुरक्षा रोडमैप और UNCLOS पर जोर — बिना किसी देश का नाम लिए — दक्षिण चीन सागर और हिंद महासागर में बढ़ते तनाव की प्रतिक्रिया है। यह ऐसे समय में आया है जब क्वाड की प्रासंगिकता पर सवाल उठाए जा रहे हैं — यह घोषणा उन सवालों का जवाब है, पर क्रियान्वयन की कसौटी अभी बाकी है।
RashtraPress
9 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत-ऑस्ट्रेलिया की 2026 की संयुक्त रक्षा घोषणा क्या है?
यह 9 जुलाई 2026 को मेलबर्न में जारी एक द्विपक्षीय दस्तावेज़ है जिसमें दोनों देशों ने रक्षा उद्योग एकीकरण, समुद्री सुरक्षा रोडमैप, साइबर सुरक्षा और आतंकवाद-रोधी सहयोग को गहरा करने का संकल्प लिया है। यह 2020 में स्थापित व्यापक रणनीतिक साझेदारी की अगली कड़ी है।
भारत-ऑस्ट्रेलिया समुद्री सुरक्षा सहयोग रोडमैप में क्या शामिल होगा?
रोडमैप के तहत समुद्री सुरक्षा सहयोग की गहराई, नियमितता और तकनीकी क्षमता बढ़ाई जाएगी। UNCLOS 1982 के अनुरूप समुद्री मार्गों और हवाई उड़ानों की स्वतंत्रता सुनिश्चित करना इसका प्रमुख उद्देश्य है।
रक्षा उद्योगों के एकीकरण से क्या आशय है?
इसका अर्थ है दोनों देशों की रक्षा आपूर्ति श्रृंखलाओं को परस्पर जोड़ना और उन्हें अधिक मजबूत व लचीला बनाना। इसमें रक्षा नवाचार, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में उन्नत सहयोग भी शामिल है।
क्वाड में भारत-ऑस्ट्रेलिया की भूमिका इस घोषणा के बाद कैसे बदलेगी?
घोषणा में क्वाड के तहत मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (HADR) अभियानों को मजबूत करने और संयुक्त अभ्यास आयोजित करने पर सहमति बनी है। अमेरिका और जापान के साथ समन्वित प्रतिक्रिया और तीसरे देशों में निकासी अभियानों के लिए साझा योजना भी विकसित की जाएगी।
इस घोषणा में साइबर सुरक्षा पर क्या कहा गया है?
दोनों देशों ने साइबर सुरक्षा, महत्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकियों तथा आपूर्ति श्रृंखलाओं में सहयोग को ऑस्ट्रेलिया-भारत पैक्ट्स के तहत और मजबूत करने पर सहमति जताई है। ऑनलाइन कट्टरपंथ और आतंकवाद के वित्तपोषण से निपटने में भी सहयोग बढ़ाने का निर्णय लिया गया।
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