सुप्रीम कोर्ट की MCD पर कड़ी फटकार: लाजपत नगर-सरोजनी नगर में अवैध निर्माण पर IIT दिल्ली टीम गठित
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय ने 9 जुलाई 2026 को देशभर में अवैध निर्माण और नगर निकायों की कथित मिलीभगत पर कड़ी नाराज़गी जताते हुए दिल्ली नगर निगम (MCD) को कठघरे में खड़ा किया। न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति शील नागू की पीठ ने स्पष्ट कहा कि नगर निगमों द्वारा अदालती आदेशों की अनदेखी की जा रही है और अनेक स्थानों पर अवैध निर्माण बेरोकटोक जारी है।
MCD की लापरवाही पर सर्वोच्च न्यायालय का सख्त रुख
पीठ ने विशेष रूप से दिल्ली के लाजपत नगर और सरोजनी नगर क्षेत्रों में अवैध निर्माण को लेकर MCD के ढुलमुल रवैये पर नाराज़गी व्यक्त की। न्यायालय ने कहा कि 20 मई के आदेश में इन इलाकों में अवैध निर्माण के विरुद्ध ठोस कार्रवाई का निर्देश दिया गया था, किंतु केवल नोटिस भेजकर औपचारिकता पूरी कर ली गई — वास्तविक कार्रवाई शून्य रही।
न्यायमूर्ति अमानुल्लाह ने कहा, 'हम दिल्ली नगर निगम के रवैये को लेकर खासतौर पर चिंतित हैं। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि अवैध निर्माण ध्वस्त किए जाएँ। एमिकस ने बताया कि नोटिस तो भेजे गए, लेकिन उन पर आगे कोई कदम नहीं उठाया गया। हाईकोर्ट के निर्माण-रोक आदेश के बावजूद MCD की कथित मिलीभगत से निर्माण कार्य धड़ल्ले से चलता रहा।'
मालवीय नगर अग्निकांड और भवन हादसों का संदर्भ
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने मालवीय नगर की आग की घटना का भी उल्लेख किया। पीठ ने कहा कि नगर निकायों की लापरवाही के चलते कभी इमारतें गिरती हैं तो कभी आग जैसी त्रासदियाँ सामने आती हैं। न्यायालय ने यह भी जोड़ा कि यदि अदालती आदेशों के बाद भी अधिकारी कार्रवाई नहीं करते, तो आम नागरिक कितने असहाय हो जाते हैं — यह सोचनीय है।
IIT दिल्ली की विशेषज्ञ टीम गठित, तीन इलाकों का होगा निरीक्षण
अवैध निर्माणों की वास्तविक स्थिति का स्वतंत्र मूल्यांकन कराने के लिए सर्वोच्च न्यायालय ने IIT दिल्ली के दो वरिष्ठ सिविल इंजीनियरिंग प्रोफेसरों और दो ड्राफ्ट्समैन की संयुक्त टीम गठित करने का निर्देश दिया। यह टीम MCD अधिकारियों और एमिकस क्यूरी के साथ मिलकर साकेत, लाजपत नगर और सरोजनी नगर का स्थलीय निरीक्षण करेगी और अपनी रिपोर्ट सीधे न्यायालय को सौंपेगी। यह पहली बार है जब सर्वोच्च न्यायालय ने अवैध निर्माण के मामले में किसी प्रीमियर तकनीकी संस्थान को जाँच की ज़िम्मेदारी सौंपी है।
गुरुग्राम, लखनऊ और तमिलनाडु पर भी कड़े निर्देश
न्यायालय ने गुरुग्राम में अग्नि सुरक्षा को लेकर आई रिपोर्ट का संज्ञान लिया, जिसके अनुसार 93 प्रतिशत प्रतिष्ठान फायर सेफ्टी ऑडिट में विफल पाए गए हैं। संबंधित नगर निकाय के उपाध्यक्ष को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर 20 मई के आदेश के अनुपालन में उठाए गए वास्तविक कदमों का ब्यौरा देने का आदेश दिया गया।
इसके अतिरिक्त, लखनऊ नगर निगम के आयुक्त को भी व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में उपस्थित होकर कार्रवाई का विवरण प्रस्तुत करने का निर्देश मिला है। तमिलनाडु सरकार को भी ऐसे सभी मामलों में की गई कार्रवाई का विस्तृत ब्यौरा दाखिल करने को कहा गया है।
अनुपालन न करने वाले नगर निकायों पर कार्रवाई की चेतावनी
पीठ ने स्पष्ट चेतावनी दी कि जिन नगर निकायों ने अब तक अदालती निर्देशों के अनुपालन की रिपोर्ट दाखिल नहीं की है, उनके विरुद्ध आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। गौरतलब है कि यह मामला देशभर में नगर निकायों की जवाबदेही और न्यायिक आदेशों के प्रभावी क्रियान्वयन के व्यापक प्रश्न को सामने लाता है। IIT दिल्ली टीम की रिपोर्ट आने के बाद सर्वोच्च न्यायालय अगली सुनवाई में और कड़े कदम उठा सकता है।