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भारत में दुनिया के आधे जीसीसी, एंटरप्राइज़ AI टैलेंट में दूसरा सबसे बड़ा हब: सीईए नागेश्वरन

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भारत में दुनिया के आधे जीसीसी, एंटरप्राइज़ AI टैलेंट में दूसरा सबसे बड़ा हब: सीईए नागेश्वरन

सारांश

भारत अब दुनिया के आधे जीसीसी का केंद्र है और एंटरप्राइज़ AI टैलेंट में वैश्विक स्तर पर दूसरे स्थान पर है। 23 लाख रोज़गार और 60 अरब डॉलर से अधिक सालाना आय के साथ, यह सेक्टर बैक-ऑफिस से निकलकर भारत की असली इनोवेशन ताकत बन गया है।

मुख्य बातें

भारत में दुनिया के लगभग आधे जीसीसी कार्यरत हैं — वैश्विक स्तर पर कोई दूसरा देश इस पैमाने के करीब नहीं।
देश एंटरप्राइज़ एआई टैलेंट के मामले में विश्व का दूसरा सबसे बड़ा हब बन चुका है।
जीसीसी सेक्टर में रोज़गार 23 लाख के करीब पहुँच रहा है; 2,000 से अधिक सेंटर सक्रिय हैं।
सालाना आय 60 अरब डॉलर को पार कर चुकी है और 100 अरब डॉलर की ओर अग्रसर है।
जीसीसी का भारत की जीडीपी में लगभग 2 प्रतिशत योगदान; बड़े शहरों की नई ऑफिस स्पेस में भी बड़ी हिस्सेदारी।
अनंत नागेश्वरन ने 9 जुलाई 2026 को सीआईआई जीसीसी बिजनेस समिट , नई दिल्ली में यह जानकारी दी।

मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) वी. अनंत नागेश्वरन ने 9 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में सीआईआई जीसीसी बिजनेस समिट में घोषणा की कि भारत अब दुनिया के लगभग आधे ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी) का ठिकाना है और एंटरप्राइज़ एआई टैलेंट के मामले में वैश्विक स्तर पर दूसरे सबसे बड़े हब के रूप में उभर रहा है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि इनोवेशन, टेक्नोलॉजी और हाई-वैल्यू ग्लोबल ऑपरेशन में भारत की तेज़ी से बढ़ती भागीदारी को रेखांकित करती है।

जीसीसी इकोसिस्टम का दो दशकों में बड़ा बदलाव

नागेश्वरन ने बताया कि भारत का जीसीसी इकोसिस्टम पिछले दो दशकों में एक ऐतिहासिक परिवर्तन से गुज़रा है। देश में अब 2,000 से अधिक जीसीसी सेंटर कार्यरत हैं, जो 20 लाख से अधिक पेशेवरों को रोज़गार दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र अब 23 लाख रोज़गार के आँकड़े के करीब पहुँच रहा है और इसकी सालाना आय 60 अरब डॉलर को पार कर चुकी है, जो 100 अरब डॉलर के लक्ष्य की ओर तेज़ी से बढ़ रही है।

टैलेंट ही असली ताकत: नागेश्वरन

सीईए ने स्पष्ट किया कि यह वैश्विक नेतृत्व अचानक नहीं आया। उन्होंने कहा, "दुनिया के लगभग आधे जीसीसी अब भारत में हैं। यह हमारे लोगों की वजह से हुआ, क्योंकि टैलेंट ही सबसे अहम चीज़ है।" उन्होंने यह भी जोड़ा कि ये सेंटर शुरुआत में लागत कम करने के उद्देश्य से भारत आए थे, लेकिन यहाँ की काबिलियत के कारण यहीं टिके रहे और विस्तार करते गए।

जीडीपी में योगदान और शहरी विकास

नागेश्वरन ने बताया कि जीसीसी अब भारत की जीडीपी में लगभग 2 प्रतिशत का योगदान देते हैं। साथ ही, देश के बड़े शहरों में बनने वाली नई ऑफिस स्पेस में इनकी हिस्सेदारी उल्लेखनीय रूप से बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर भारत के पैमाने के करीब भी कोई दूसरा देश नहीं है।

बैक-ऑफिस से ग्लोबल इनोवेशन हब तक

सीईए ने रेखांकित किया कि भारतीय जीसीसी अब अपनी पारंपरिक बैक-ऑफिस भूमिका से बहुत आगे निकल चुके हैं। आज ये सेंटर टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग, रिसर्च, प्रोडक्ट डेवलपमेंट, एनालिटिक्स और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन जैसे उच्च-मूल्य वाले क्षेत्रों में काम कर रहे हैं।

उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि वैश्विक बैंक मुंबई और बेंगलुरु से रिस्क सिस्टम और ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म संचालित करते हैं, ऑटोमोबाइल कंपनियाँ चेन्नई और पुणे से वाहन एवं एम्बेडेड सिस्टम डिज़ाइन करती हैं, सेमीकंडक्टर कंपनियाँ भारत में चिप डिज़ाइन करती हैं, फार्मास्युटिकल कंपनियाँ क्लिनिकल एनालिटिक्स करती हैं और कंज्यूमर कंपनियाँ अपने भारतीय सेंटर्स से डिजिटल प्रोडक्ट विकसित करती हैं।

बौद्धिक संपदा और वैश्विक भूमिकाएँ

नागेश्वरन ने कहा, "इन सेंटर्स में बनाई गई बौद्धिक संपदा असली है। पेटेंट यहीं फाइल किए जाते हैं, प्रोडक्ट यहीं से भेजे जाते हैं और ग्लोबल भूमिकाएँ भी तेज़ी से यहीं बैठे लोग निभा रहे हैं।" उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय जीसीसी कई बहुराष्ट्रीय कंपनियों (एमएनसी) के कामकाज का मुख्य केंद्र बन गए हैं। यह बदलाव भारत को वैश्विक नवाचार मानचित्र पर एक अपरिहार्य स्थान दिला रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या यह टैलेंट-केंद्रित विकास भारत की व्यापक कार्यबल के लिए समावेशी है। 23 लाख उच्च-कौशल नौकरियाँ एक बड़ी उपलब्धि हैं, पर यह देश के कुल कार्यबल का एक छोटा हिस्सा ही है। दूसरी चुनौती यह है कि जीसीसी का मुनाफ़ा और बौद्धिक संपदा अंततः विदेशी मूल कंपनियों के पास जाती है — भारत 'दिमाग' देता है, लेकिन 'मालिकाना हक' का बड़ा हिस्सा बाहर रहता है। जब तक नीति इस असंतुलन को संबोधित नहीं करती, जीसीसी की सफलता भारत की इनोवेशन अर्थव्यवस्था की नींव कम और किराये की ताकत ज़्यादा बनी रहेगी।
RashtraPress
9 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) क्या होते हैं और भारत में इनकी स्थिति क्या है?
जीसीसी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के वे केंद्र होते हैं जो टेक्नोलॉजी, रिसर्च, एनालिटिक्स और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन जैसे उच्च-मूल्य कार्य करते हैं। भारत में अभी 2,000 से अधिक जीसीसी हैं, जो दुनिया के कुल जीसीसी का लगभग आधा है।
भारत का जीसीसी सेक्टर कितने लोगों को रोज़गार देता है?
सीईए वी. अनंत नागेश्वरन के अनुसार, यह सेक्टर अब 23 लाख पेशेवरों को रोज़गार देने के करीब पहुँच रहा है। पहले यह आँकड़ा 20 लाख से अधिक था, जो इस क्षेत्र की तेज़ वृद्धि को दर्शाता है।
भारत के जीसीसी की सालाना आय कितनी है?
भारत के जीसीसी की सालाना आय 60 अरब डॉलर को पार कर चुकी है और 100 अरब डॉलर के लक्ष्य की ओर बढ़ रही है। यह सेक्टर देश की जीडीपी में लगभग 2 प्रतिशत का योगदान देता है।
भारत एंटरप्राइज़ एआई टैलेंट में दूसरा सबसे बड़ा हब कैसे बना?
सीईए नागेश्वरन के अनुसार, भारत में उपलब्ध उच्च-कौशल तकनीकी प्रतिभा ने वैश्विक कंपनियों को यहाँ टिकने पर मजबूर किया। शुरुआत में लागत-बचत के लिए आई कंपनियाँ भारतीय टैलेंट की क्षमता देखकर यहाँ AI, रिसर्च और प्रोडक्ट डेवलपमेंट जैसे उन्नत कार्य करने लगीं।
जीसीसी सेक्टर में भारत के किन शहरों की भूमिका प्रमुख है?
मुंबई और बेंगलुरु वैश्विक बैंकों के रिस्क और ट्रेडिंग सिस्टम संचालित करते हैं, जबकि चेन्नई और पुणे ऑटोमोबाइल डिज़ाइन के केंद्र हैं। इसके अलावा सेमीकंडक्टर चिप डिज़ाइन और फार्मास्युटिकल एनालिटिक्स भी देश के प्रमुख शहरों से संचालित होते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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