जापान बना भारत के जीसीसी इकोसिस्टम का एपीएसी में सबसे बड़ा भागीदार, 100 से अधिक सेंटर स्थापित
सारांश
मुख्य बातें
जापान एशिया-प्रशांत (एपीएसी) क्षेत्र में भारत के ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) इकोसिस्टम का सबसे बड़ा भागीदार बनकर उभरा है। 3 जुलाई 2026 को जारी डेलॉइट इंडिया की रिपोर्ट 'इंडियाज स्ट्रेटेजिक जीसीसी प्ले फॉर जापानीज़ एंटरप्राइज़ेज़' के अनुसार, जापानी कंपनियाँ भारत में 100 से अधिक जीसीसी स्थापित कर चुकी हैं। ये सेंटर अब इंजीनियरिंग, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और प्रोडक्ट इनोवेशन के प्रमुख केंद्र बनते जा रहे हैं।
जीसीसी विस्तार की प्रमुख वजहें
रिपोर्ट के अनुसार, जापानी कंपनियाँ इनोवेशन-आधारित और क्षमता-केंद्रित विकास को गति देने के लिए भारत में अपने जीसीसी नेटवर्क का तेज़ी से विस्तार कर रही हैं। डेलॉइट इंडिया के पार्टनर और जीसीसी इंडस्ट्री लीडर रोहन लोबो ने कहा कि भारत में बड़े पैमाने पर उपलब्ध इंजीनियरिंग प्रतिभा, डिजिटल विशेषज्ञता और प्रतिस्पर्धी लागत ने इसे जापानी कंपनियों के लिए सबसे आकर्षक गंतव्य बना दिया है।
ये सेंटर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), एम्बेडेड सिस्टम, क्लाउड टेक्नोलॉजी, एडवांस्ड एनालिटिक्स और डिजिटल मैन्युफैक्चरिंग जैसे उच्च-मूल्य वाले क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
आर्थिक प्रभाव और रोज़गार क्षमता
रोहन लोबो ने बताया कि डिजिटल और इंजीनियरिंग-आधारित कार्यों के विस्तार के साथ भारत का जीसीसी क्षेत्र वित्त वर्ष 2030 तक 470 से 600 अरब डॉलर का आर्थिक प्रभाव उत्पन्न कर सकता है। साथ ही यह देश की जीडीपी में 2.8 प्रतिशत तक योगदान देने और लाखों उच्च-कौशल रोज़गार सृजित करने की क्षमता रखता है।
क्षेत्रवार हिस्सेदारी
डेलॉइट इंडिया के पार्टनर कीर्ति कुमार के अनुसार, भारत में जापानी जीसीसी मुख्य रूप से इंजीनियरिंग-आधारित उद्योगों पर केंद्रित हैं। इनमें टेक्नोलॉजी क्षेत्र की हिस्सेदारी 20 प्रतिशत, औद्योगिक क्षेत्र की 15 प्रतिशत और ऑटोमोबाइल तथा हेल्थकेयर की 11-11 प्रतिशत है।
उभरते शहर बन रहे नए केंद्र
रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया गया है कि जीसीसी का अगला चरण अब केवल महानगरों तक सीमित नहीं रहेगा। अहमदाबाद, जयपुर, कोयंबटूर, कोच्चि और इंदौर जैसे उभरते शहर तेज़ी से जीसीसी निवेश के नए केंद्र बन रहे हैं। इन शहरों में कम परिचालन लागत, विशेष कौशल वाले प्रतिभा समूह और राज्य सरकारों की उद्योग-समर्थक नीतियाँ इस विस्तार को गति दे रही हैं।
भारत-जापान रणनीतिक साझेदारी की भूमिका
रिपोर्ट के अनुसार, भारत और जापान के बीच बढ़ते रणनीतिक संबंध भी जीसीसी विस्तार को नई ऊर्जा दे रहे हैं। दोनों देशों के बीच 10 ट्रिलियन येन (करीब 68 अरब डॉलर) के निवेश की प्रतिबद्धता, डिजिटल साझेदारी कार्यक्रम और औद्योगिक सहयोग के विभिन्न ढाँचे इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। गौरतलब है कि यह विस्तार ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में चीन के विकल्प के रूप में तेज़ी से उभर रहा है।
डेलॉइट के अनुसार, आने वाले वर्षों में जीसीसी क्षेत्र की वृद्धि भविष्य-केंद्रित प्रतिभा रणनीतियों, अनुसंधान एवं विकास (आर एंड डी) में बढ़ते निवेश, मज़बूत नवाचार क्षमताओं और भारत को दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदार के रूप में स्थापित करने पर टिकी होगी।