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जीसीसी का अगला दौर एआई और मजबूत इकोसिस्टम पर टिका: गिफ्ट सिटी सीईओ संजय कौल

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जीसीसी का अगला दौर एआई और मजबूत इकोसिस्टम पर टिका: गिफ्ट सिटी सीईओ संजय कौल

सारांश

गिफ्ट सिटी सीईओ संजय कौल ने साफ कहा — जीसीसी का अगला दौर टैक्स छूट नहीं, इकोसिस्टम तय करेगा। एआई के हर उद्योग में प्रवेश के साथ भारत अब 'कंट्रोल आर्बिट्राज' के नए युग में है, जहाँ वैश्विक कंपनियाँ भारतीय जीसीसी को रणनीतिक फैसलों की कमान भी सौंप रही हैं।

मुख्य बातें

गिफ्ट सिटी के सीईओ संजय कौल ने 9 जुलाई 2026 को सीआईआई जीसीसी बिजनेस समिट , नई दिल्ली में कहा कि जीसीसी का अगला चरण मजबूत इकोसिस्टम और एआई पर आधारित होगा।
वैश्विक कंपनियाँ अब केवल कर प्रोत्साहनों या लोकेशन नहीं, बल्कि डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, कनेक्टिविटी और नवाचार-अनुकूल नियामकीय ढाँचे को प्राथमिकता दे रही हैं।
भारत 'कॉस्ट आर्बिट्राज' से आगे बढ़कर 'कंट्रोल आर्बिट्राज' के दौर में — वैश्विक कंपनियाँ भारतीय जीसीसी को रणनीतिक और एंटरप्राइज ट्रांसफॉर्मेशन की जिम्मेदारी सौंप रही हैं।
जीसीसी अब इनोवेशन और एआई ट्रांसफॉर्मेशन हब के रूप में उभर रहे हैं, न कि केवल परिचालन केंद्र।
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत दुनिया का सबसे बड़ा जीसीसी केंद्र बनने की दिशा में अग्रसर है।

गिफ्ट सिटी के ग्रुप सीईओ एवं प्रबंध निदेशक संजय कौल ने 9 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में स्पष्ट किया कि भारत में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी) का अगला चरण केवल भौगोलिक स्थिति या कर प्रोत्साहनों पर नहीं, बल्कि एक समग्र और सशक्त इकोसिस्टम पर निर्भर करेगा। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के व्यापक प्रसार के साथ डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, कनेक्टिविटी और नवाचार-अनुकूल नियामकीय ढाँचे की भूमिका पहले से कहीं अधिक निर्णायक हो गई है।

मुख्य घटनाक्रम

भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) द्वारा आयोजित दूसरे राष्ट्रीय जीसीसी बिजनेस समिट में 'द इवॉल्विंग जीसीसी इकोसिस्टम: की इनसाइट्स' विषयक सत्र में कौल ने कहा, 'एआई अब लगभग हर उद्योग का हिस्सा बन चुका है। ऐसे में मजबूत कनेक्टिविटी और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर वाला इकोसिस्टम जरूरी है। साथ ही ऐसा नियामकीय ढाँचा भी होना चाहिए, जहाँ नवाचार को बढ़ावा मिले। गिफ्ट सिटी में ऐसी सुविधाएँ उपलब्ध हैं।'

उन्होंने यह भी जोड़ा कि यदि देश के अन्य हिस्सों में भी इसी तरह का इकोसिस्टम विकसित किया जाए, तो जीसीसी क्षेत्र और तेज़ गति से आगे बढ़ सकता है।

इकोसिस्टम बनाम इंसेंटिव: बदलती प्राथमिकताएँ

कौल के अनुसार, अगली पीढ़ी की वैश्विक कंपनियाँ अब केवल कर रियायतों या लोकेशन को देखकर फैसला नहीं करेंगी। उन्होंने कहा, 'अगली पीढ़ी के जीसीसी ऐसे मजबूत इकोसिस्टम की तलाश करेंगे, जहाँ हर व्यवस्था एक-दूसरे का सहयोग करे और पूरा सिस्टम एक सतत शृंखला की तरह काम करे।'

उन्होंने रेखांकित किया कि कंपनियाँ अब उच्च गुणवत्ता वाले इंफ्रास्ट्रक्चर, बेहतर डिजिटल कनेक्टिविटी, स्थिर एवं पारदर्शी नियामकीय व्यवस्था, अच्छी जीवनशैली और नवाचार के अवसरों को प्राथमिकता दे रही हैं।

भारत: 'कंट्रोल आर्बिट्राज' के नए दौर में

समिट में विशेषज्ञों ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि भारत अब दुनिया का सबसे बड़ा जीसीसी केंद्र बनकर उभर रहा है। उनका मत था कि भारत केवल लागत-लाभ (कॉस्ट आर्बिट्राज) का गंतव्य नहीं रहा, बल्कि क्षमता-आधारित प्रतिस्पर्धा (कैपेबिलिटी आर्बिट्राज) से आगे बढ़कर 'कंट्रोल आर्बिट्राज' के दौर में प्रवेश कर चुका है। इसका अर्थ है कि वैश्विक कंपनियाँ अब भारतीय जीसीसी को परिचालन कार्यों के साथ-साथ रणनीतिक निर्णयों और समग्र एंटरप्राइज ट्रांसफॉर्मेशन की जिम्मेदारी भी सौंप रही हैं।

एआई और नवाचार हब के रूप में जीसीसी का उभार

विशेषज्ञों के अनुसार, जीसीसी अब महज़ कार्य-निष्पादन केंद्र नहीं रहे — वे तेज़ी से इनोवेशन और एआई ट्रांसफॉर्मेशन हब में बदल रहे हैं। जैसे-जैसे कंपनियाँ एआई-आधारित मॉडल अपनाएँगी, जीसीसी संगठनों की प्रक्रियाओं में बदलाव लाने, एआई समाधान विकसित करने, कर्मचारियों को नए कौशल से लैस करने और वैश्विक स्तर पर नवाचार को गति देने में अग्रणी भूमिका निभाएँगे।

आगे की राह

गौरतलब है कि शुरुआत में वैश्विक कंपनियाँ भारत में प्रतिभाशाली पेशेवरों की बड़ी उपलब्धता के कारण आई थीं, लेकिन अब भारत की बढ़ती क्षमताओं और नवाचार-सहायक व्यापक इकोसिस्टम ने इसे वैश्विक कंपनियों के लिए और अधिक पसंदीदा गंतव्य बना दिया है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर जीसीसी की भूमिका तेज़ी से पुनर्परिभाषित हो रही है और भारत इस बदलाव का नेतृत्व करने की स्थिति में है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि गिफ्ट सिटी से बाहर यह मॉडल कितनी तेज़ी से दोहराया जा सकेगा। भारत के अधिकांश टियर-2 शहर अभी भी बुनियादी डिजिटल कनेक्टिविटी और स्थिर नियामकीय वातावरण के लिए संघर्ष कर रहे हैं। 'कंट्रोल आर्बिट्राज' की अवधारणा उत्साहजनक है, परंतु यह तब तक सीमित वर्गों तक रहेगी जब तक नीति-निर्माता जीसीसी-अनुकूल इकोसिस्टम को राष्ट्रीय स्तर पर विस्तारित करने के लिए ठोस और मापनीय रोडमैप नहीं बनाते।
RashtraPress
9 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जीसीसी का अगला चरण भारत में कैसा होगा?
गिफ्ट सिटी सीईओ संजय कौल के अनुसार, जीसीसी का अगला चरण केवल कर प्रोत्साहनों या लोकेशन पर नहीं, बल्कि मजबूत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, बेहतर कनेक्टिविटी और नवाचार-अनुकूल नियामकीय ढाँचे पर आधारित होगा। एआई के व्यापक प्रसार ने इस बदलाव को और तेज़ कर दिया है।
'कंट्रोल आर्बिट्राज' का क्या अर्थ है?
'कंट्रोल आर्बिट्राज' का अर्थ है कि वैश्विक कंपनियाँ अब भारतीय जीसीसी को केवल परिचालन कार्य नहीं, बल्कि रणनीतिक निर्णयों और समग्र एंटरप्राइज ट्रांसफॉर्मेशन की जिम्मेदारी भी सौंप रही हैं। यह 'कॉस्ट आर्बिट्राज' और 'कैपेबिलिटी आर्बिट्राज' से आगे का चरण है।
एआई का जीसीसी पर क्या असर पड़ रहा है?
एआई के लगभग हर उद्योग में प्रवेश के साथ जीसीसी अब इनोवेशन और एआई ट्रांसफॉर्मेशन हब बन रहे हैं। ये केंद्र अब एआई-आधारित समाधान विकसित करने, कर्मचारियों को नए कौशल से लैस करने और वैश्विक स्तर पर नवाचार लाने में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं।
गिफ्ट सिटी जीसीसी के लिए क्यों उपयुक्त है?
संजय कौल के अनुसार, गिफ्ट सिटी में मजबूत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, बेहतर कनेक्टिविटी और नवाचार को बढ़ावा देने वाला नियामकीय ढाँचा उपलब्ध है। यही विशेषताएँ इसे अगली पीढ़ी के जीसीसी के लिए आदर्श गंतव्य बनाती हैं।
भारत में जीसीसी क्षेत्र की वृद्धि के लिए क्या जरूरी है?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि देश के अन्य हिस्सों में भी गिफ्ट सिटी जैसा इकोसिस्टम विकसित किया जाए — जिसमें उच्च गुणवत्ता का इंफ्रास्ट्रक्चर, स्थिर नियामकीय व्यवस्था और नवाचार के अवसर हों — तो भारत का जीसीसी क्षेत्र और तेज़ गति से आगे बढ़ सकता है।
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