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जीसीसी बने इनोवेशन हब, 'विकसित भारत' में निभाएंगे निर्णायक भूमिका: अजय शर्मा

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जीसीसी बने इनोवेशन हब, 'विकसित भारत' में निभाएंगे निर्णायक भूमिका: अजय शर्मा

सारांश

जीसीसी सेक्टर बैक-ऑफिस की पहचान छोड़ रिसर्च और डिजाइन का केंद्र बन चुका है। श्रम मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी अजय शर्मा ने नई दिल्ली में स्पष्ट किया कि 'विकसित भारत' का लक्ष्य सरकार, उद्योग और सभी हितधारकों के समन्वित प्रयास से ही हासिल होगा — और जीसीसी इस यात्रा का अहम इंजन है।

मुख्य बातें

अजय शर्मा (अतिरिक्त सचिव, श्रम एवं रोजगार मंत्रालय) ने 9 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में जीसीसी की बदलती भूमिका पर बयान दिया।
जीसीसी अब केवल बैक-ऑफिस इकाइयाँ नहीं — रिसर्च, डिजाइन और इनोवेशन के प्रमुख केंद्र बन चुके हैं।
जीसीसी सेक्टर को 'विकसित भारत' के विजन में एक महत्वपूर्ण आर्थिक स्तंभ बताया गया।
शर्मा ने 'होल-ऑफ-गवर्नमेंट' दृष्टिकोण पर जोर दिया — सभी मंत्रालय समन्वित रूप से कार्यरत।
उद्योग जगत और सभी हितधारकों की सक्रिय भागीदारी को दीर्घकालिक विकास के लिए अनिवार्य बताया।

श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव एवं रोजगार महानिदेशक अजय शर्मा ने 9 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी) अब महज बैक-ऑफिस सपोर्ट इकाइयाँ नहीं रहे — वे रिसर्च, डिजाइन और नवाचार के प्रमुख केंद्रों में रूपांतरित हो चुके हैं। उनके अनुसार, जीसीसी सेक्टर भारत की अर्थव्यवस्था का एक मज़बूत स्तंभ बनकर उभरा है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'विकसित भारत' के विजन को साकार करने में इसकी भूमिका निर्णायक होगी।

बैक-ऑफिस से इनोवेशन तक का सफर

शर्मा ने रेखांकित किया कि पिछले कुछ वर्षों में जीसीसी सेक्टर ने असाधारण गति से विकास किया है। उन्होंने कहा, 'पहले जीसीसी को केवल कम लागत में बैक-ऑफिस का काम करने वाली इकाइयों के रूप में देखा जाता था, लेकिन अब स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। आज ये रिसर्च और डिजाइन जैसे उच्च स्तर के कार्य कर रहे हैं, जो वैल्यू चेन में कहीं अधिक महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं।' यह बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उच्च-मूल्य कार्यों की ओर यह संक्रमण भारतीय कार्यबल की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को सीधे मज़बूत करता है।

विकसित भारत में जीसीसी की भूमिका

अजय शर्मा ने कहा कि 'विकसित भारत' का लक्ष्य केवल सरकारी प्रयासों से नहीं, बल्कि उद्योग जगत और सभी हितधारकों की सक्रिय साझेदारी से ही हासिल किया जा सकता है। उन्होंने कहा, 'अगर मैं जीसीसी सेक्टर की बात करूं, तो प्रधानमंत्री मोदी का 'विकसित भारत' का विजन ऐसा लक्ष्य है, जिस पर केवल सरकार ही नहीं, बल्कि उद्योग और सभी संबंधित पक्ष भी पूरी गंभीरता से काम कर रहे हैं।' गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब भारत तेज आर्थिक बदलाव के दौर से गुजर रहा है और वैश्विक कंपनियाँ अपने उच्च-कौशल कार्यों के लिए भारत को प्राथमिकता दे रही हैं।

होल-ऑफ-गवर्नमेंट दृष्टिकोण

शर्मा ने 'होल-ऑफ-गवर्नमेंट' यानी पूरी सरकार के समन्वित प्रयास की अवधारणा पर जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि श्रम एवं रोजगार मंत्रालय सहित सभी मंत्रालय आपसी तालमेल के साथ इस एजेंडे पर काम कर रहे हैं। उनके शब्दों में, 'हर किसी को अपनी भूमिका निभानी होगी। विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए हर मंत्रालय मिलकर काम कर रहा है। हम जिस भी परियोजना पर काम करते हैं, उसमें पूरी सरकार के समन्वित प्रयास की सोच अपनाई जाती है।'

उद्योग और सरकार की साझा जिम्मेदारी

शर्मा ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत के दीर्घकालिक विकास एजेंडे को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी केवल सरकार की नहीं है। उद्योग जगत और सभी हितधारकों की समान रूप से सक्रिय भागीदारी अनिवार्य है। यह दृष्टिकोण इसलिए भी प्रासंगिक है क्योंकि जीसीसी सेक्टर में निजी निवेश और सरकारी नीति-समर्थन का संयोजन ही इसकी वृद्धि का मुख्य चालक रहा है।

आगे की राह

जीसीसी सेक्टर के इनोवेशन हब के रूप में उभरने की यह प्रवृत्ति आने वाले वर्षों में और तेज होने की संभावना है, क्योंकि वैश्विक कंपनियाँ भारत में अपनी उपस्थिति और क्षमता दोनों बढ़ा रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नीतिगत समर्थन और कौशल विकास की गति बनी रही, तो जीसीसी सेक्टर 'विकसित भारत' के आर्थिक लक्ष्यों में एक प्रमुख योगदानकर्ता के रूप में स्थापित हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन की चुनौती अभी भी अनुत्तरित है। 'होल-ऑफ-गवर्नमेंट' जैसे शब्द नीतिगत समन्वय की ज़रूरत को स्वीकार करते हैं, पर क्रियान्वयन की जवाबदेही का कोई ठोस ढाँचा अभी सामने नहीं आया है। विकसित भारत के लक्ष्य में जीसीसी की भूमिका तभी निर्णायक होगी जब इनोवेशन का लाभ व्यापक कार्यबल तक पहुँचे, न कि केवल कॉर्पोरेट बैलेंस शीट तक।
RashtraPress
10 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) क्या होते हैं?
जीसीसी वे केंद्र हैं जिन्हें बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ भारत में स्थापित करती हैं और जो उनके वैश्विक परिचालन के लिए सेवाएँ प्रदान करते हैं। पहले ये मुख्यतः बैक-ऑफिस और लागत-बचत कार्यों तक सीमित थे, लेकिन अब ये रिसर्च, डिजाइन और उच्च-मूल्य इनोवेशन का केंद्र बन चुके हैं।
जीसीसी 'विकसित भारत' के लक्ष्य में कैसे योगदान देंगे?
श्रम मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव अजय शर्मा के अनुसार, जीसीसी भारत की अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण स्तंभ हैं और उच्च-मूल्य कार्यों में उनकी बढ़ती भूमिका 'विकसित भारत' के आर्थिक एजेंडे को मज़बूती देती है। सरकार, उद्योग और सभी हितधारकों के समन्वित प्रयास से यह लक्ष्य हासिल करने की योजना है।
जीसीसी सेक्टर में हाल के वर्षों में क्या बदलाव आया है?
पिछले कुछ वर्षों में जीसीसी सेक्टर ने तेज़ी से विकास किया है और ये केंद्र वैल्यू चेन में काफी ऊपर पहुँच चुके हैं। अब ये केवल कम लागत वाले बैक-ऑफिस कार्यों तक सीमित नहीं, बल्कि रिसर्च और डिजाइन जैसे उच्च-स्तरीय कार्यों में भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
'होल-ऑफ-गवर्नमेंट' दृष्टिकोण से क्या अभिप्राय है?
'होल-ऑफ-गवर्नमेंट' यानी पूरी सरकार के समन्वित प्रयास की अवधारणा, जिसके तहत सभी मंत्रालय आपसी तालमेल के साथ एक साझे लक्ष्य की ओर काम करते हैं। अजय शर्मा ने कहा कि 'विकसित भारत' की हर परियोजना में यही सोच अपनाई जाती है।
जीसीसी सेक्टर में उद्योग जगत की क्या भूमिका है?
अजय शर्मा ने स्पष्ट किया कि 'विकसित भारत' के लक्ष्य को हासिल करना केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है — उद्योग जगत और सभी हितधारकों की सक्रिय भागीदारी भी उतनी ही अनिवार्य है। जीसीसी सेक्टर में निजी निवेश और नीतिगत समर्थन का यह संयोजन ही इसकी वृद्धि का मुख्य आधार है।
राष्ट्र प्रेस
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