जीसीसी बने इनोवेशन हब, 'विकसित भारत' में निभाएंगे निर्णायक भूमिका: अजय शर्मा
सारांश
मुख्य बातें
श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव एवं रोजगार महानिदेशक अजय शर्मा ने 9 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी) अब महज बैक-ऑफिस सपोर्ट इकाइयाँ नहीं रहे — वे रिसर्च, डिजाइन और नवाचार के प्रमुख केंद्रों में रूपांतरित हो चुके हैं। उनके अनुसार, जीसीसी सेक्टर भारत की अर्थव्यवस्था का एक मज़बूत स्तंभ बनकर उभरा है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'विकसित भारत' के विजन को साकार करने में इसकी भूमिका निर्णायक होगी।
बैक-ऑफिस से इनोवेशन तक का सफर
शर्मा ने रेखांकित किया कि पिछले कुछ वर्षों में जीसीसी सेक्टर ने असाधारण गति से विकास किया है। उन्होंने कहा, 'पहले जीसीसी को केवल कम लागत में बैक-ऑफिस का काम करने वाली इकाइयों के रूप में देखा जाता था, लेकिन अब स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। आज ये रिसर्च और डिजाइन जैसे उच्च स्तर के कार्य कर रहे हैं, जो वैल्यू चेन में कहीं अधिक महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं।' यह बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उच्च-मूल्य कार्यों की ओर यह संक्रमण भारतीय कार्यबल की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को सीधे मज़बूत करता है।
विकसित भारत में जीसीसी की भूमिका
अजय शर्मा ने कहा कि 'विकसित भारत' का लक्ष्य केवल सरकारी प्रयासों से नहीं, बल्कि उद्योग जगत और सभी हितधारकों की सक्रिय साझेदारी से ही हासिल किया जा सकता है। उन्होंने कहा, 'अगर मैं जीसीसी सेक्टर की बात करूं, तो प्रधानमंत्री मोदी का 'विकसित भारत' का विजन ऐसा लक्ष्य है, जिस पर केवल सरकार ही नहीं, बल्कि उद्योग और सभी संबंधित पक्ष भी पूरी गंभीरता से काम कर रहे हैं।' गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब भारत तेज आर्थिक बदलाव के दौर से गुजर रहा है और वैश्विक कंपनियाँ अपने उच्च-कौशल कार्यों के लिए भारत को प्राथमिकता दे रही हैं।
होल-ऑफ-गवर्नमेंट दृष्टिकोण
शर्मा ने 'होल-ऑफ-गवर्नमेंट' यानी पूरी सरकार के समन्वित प्रयास की अवधारणा पर जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि श्रम एवं रोजगार मंत्रालय सहित सभी मंत्रालय आपसी तालमेल के साथ इस एजेंडे पर काम कर रहे हैं। उनके शब्दों में, 'हर किसी को अपनी भूमिका निभानी होगी। विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए हर मंत्रालय मिलकर काम कर रहा है। हम जिस भी परियोजना पर काम करते हैं, उसमें पूरी सरकार के समन्वित प्रयास की सोच अपनाई जाती है।'
उद्योग और सरकार की साझा जिम्मेदारी
शर्मा ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत के दीर्घकालिक विकास एजेंडे को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी केवल सरकार की नहीं है। उद्योग जगत और सभी हितधारकों की समान रूप से सक्रिय भागीदारी अनिवार्य है। यह दृष्टिकोण इसलिए भी प्रासंगिक है क्योंकि जीसीसी सेक्टर में निजी निवेश और सरकारी नीति-समर्थन का संयोजन ही इसकी वृद्धि का मुख्य चालक रहा है।
आगे की राह
जीसीसी सेक्टर के इनोवेशन हब के रूप में उभरने की यह प्रवृत्ति आने वाले वर्षों में और तेज होने की संभावना है, क्योंकि वैश्विक कंपनियाँ भारत में अपनी उपस्थिति और क्षमता दोनों बढ़ा रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नीतिगत समर्थन और कौशल विकास की गति बनी रही, तो जीसीसी सेक्टर 'विकसित भारत' के आर्थिक लक्ष्यों में एक प्रमुख योगदानकर्ता के रूप में स्थापित हो सकता है।