महाराष्ट्र में राजस्व-शहरी विकास विभागों में 54% कमीशन का आरोप, दानवे ने विधान परिषद में सरकार को घेरा
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना (यूबीटी) के विधायक अंबादास दानवे ने 9 जुलाई 2026 को महाराष्ट्र विधान परिषद में अंतिम सप्ताह के प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। दानवे ने दावा किया कि राजस्व और शहरी विकास विभागों में भ्रष्टाचार अपने चरम पर पहुँच चुका है और सरकार का 'जीरो टोलरेंस' का नारा केवल कागज़ों तक सीमित है।
भ्रष्टाचार के आरोप: 54% कमीशन का दावा
दानवे ने आरोप लगाया कि राज्य में भ्रष्टाचार अब संस्थागत रूप ले चुका है। उनके अनुसार, सरकारी ठेके हासिल करने के लिए ठेकेदारों को विभिन्न स्तरों पर 54 प्रतिशत तक कमीशन देने पर मजबूर किया जाता है। उन्होंने सिडको (CIDCO) और महाराष्ट्र आवास एवं क्षेत्र विकास प्राधिकरण (MHADA) सहित विभिन्न नगर निगमों में कथित अनियमितताओं की एक विस्तृत सूची सदन के सामने रखी। स्टांप शुल्क घोटाले और आदिवासी भूमि अतिक्रमण के मुद्दे भी उन्होंने उठाए।
महिला सुरक्षा पर चिंता: NCRB के आँकड़ों का हवाला
राष्ट्रीय अपराध अभिलेख ब्यूरो (NCRB) के आँकड़ों का हवाला देते हुए दानवे ने दावा किया कि पिछले एक वर्ष में महाराष्ट्र में 26,000 से अधिक महिलाएँ और लगभग 6,777 नाबालिग लड़कियाँ लापता हो गईं। उन्होंने जेलों में बच्चों के विरुद्ध अत्याचार, अपहरण, मानव तस्करी और अप्राकृतिक मौतों की बढ़ती घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य की कानून-व्यवस्था चरमरा गई है।
मीरा-भयंदर मामला और राजनीतिक संरक्षण का आरोप
दानवे ने यह भी आरोप लगाया कि मीरा-भयंदर में महायुति सरकार की महिला पदाधिकारियों ने पुलिस महानिदेशक सदानंद वसंत दते और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को सीधे पत्र लिखकर महिलाओं पर हो रहे अत्याचारों के विरुद्ध कार्रवाई की माँग की और अपराधियों को मिल रहे कथित राजनीतिक संरक्षण पर सवाल उठाया। इसके अलावा, उन्होंने सत्ताधारी दल के एक विधायक द्वारा कथित तौर पर 'शिवाजी कौन होता?' पुस्तक के प्रकाशक को धमकी देने का मुद्दा भी सदन में उठाया।
पुलिस की असंवेदनशीलता पर सवाल
दानवे ने केज पुलिस स्टेशन का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि यौन उत्पीड़न की शिकार एक नाबालिग को चिकित्सा जाँच के लिए नौ घंटे तक प्रतीक्षा करवाई गई। उनके अनुसार, यह घटना स्थानीय पुलिस की संवेदनहीनता और जवाबदेही की कमी को उजागर करती है।
अन्य मुद्दे: मराठा आरक्षण और किसान ऋण माफी
विधायक दानवे ने मराठा आरक्षण और किसानों की ऋण माफी जैसे ज्वलंत मुद्दों पर भी सरकार को घेरा। आलोचकों का कहना है कि ये मुद्दे वर्षों से लंबित हैं और राज्य सरकार की प्राथमिकता सूची में नहीं हैं। यह देखना होगा कि महायुति सरकार इन आरोपों का जवाब किस रूप में देती है और विधान परिषद में इन मुद्दों पर आगे क्या कार्रवाई होती है।