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शिवसेना (UBT) का बड़ा आरोप: ‘लाडकी बहिन’ से वोट खरीदकर सत्ता में आई महायुति, महाराष्ट्र में नए चुनाव की मांग

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शिवसेना (UBT) का बड़ा आरोप: ‘लाडकी बहिन’ से वोट खरीदकर सत्ता में आई महायुति, महाराष्ट्र में नए चुनाव की मांग

सारांश

शिवसेना (UBT) ने ‘सामना’ संपादकीय में आरोप लगाया कि महायुति ने लाडकी बहिन योजना के जरिए ₹1,500 मासिक भत्ते का लालच देकर महिलाओं के वोट खरीदे। 80 लाख लाभार्थियों की अपात्रता और ₹17,000 करोड़ के वितरण को आधार बनाकर पार्टी ने हाईकोर्ट जांच, मुख्यमंत्री-उपमुख्यमंत्रियों की संपत्ति जब्ती और महाराष्ट्र में नए चुनाव की मांग की है।

मुख्य बातें

शिवसेना (UBT) ने महायुति पर ‘लाडकी बहिन योजना’ के जरिए वोट खरीदने का आरोप लगाया।
ई-केवाईसी के बाद करीब 80 लाख महिलाओं को योजना से अपात्र घोषित किया गया।
पार्टी ने बॉम्बे हाईकोर्ट के मौजूदा न्यायाधीश से जांच कराने की मांग की।
योजना के तहत दिसंबर 2024 तक ₹17,000 करोड़ से अधिक की राशि बाँटी गई।
पार्टी ने फडणवीस , शिंदे और अजित पवार की संपत्ति जब्त करने तथा महाराष्ट्र में नए चुनाव कराने की मांग की।

शिवसेना (UBT) ने महाराष्ट्र की महायुति सरकार पर ‘मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिन योजना’ के जरिए महिलाओं के वोट ‘खरीदकर’ सत्ता हासिल करने का गंभीर आरोप लगाते हुए राज्य में नए सिरे से विधानसभा चुनाव कराने की मांग की है। पार्टी ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ के संपादकीय में दावा किया कि ई-केवाईसी प्रक्रिया के बाद योजना के तहत लगभग 80 लाख महिलाओं को अपात्र पाया जाना ‘बड़े घोटाले’ की पुष्टि करता है।

मुख्य आरोप क्या हैं

संपादकीय के अनुसार, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री अजित पवार की ‘तिकड़ी’ ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से ठीक पहले लाडकी बहिन योजना शुरू की और 2.38 करोड़ महिलाओं को ₹1,500 मासिक भत्ता देने की घोषणा की। पार्टी का दावा है कि इन महिलाओं की रैलियाँ आयोजित करने को लेकर तीनों नेताओं के बीच ‘जबरदस्त होड़’ मची हुई थी।

शिवसेना (UBT) ने आरोप लगाया कि सरकारी धन का इस्तेमाल कर लाखों ‘अयोग्य’ महिलाओं के खातों में पैसा डाला गया, जिससे सत्ताधारी गठबंधन के पक्ष में लगभग एक करोड़ अतिरिक्त वोट जुड़े। संपादकीय में लिखा गया कि ‘‘इस पूरे खेल में चुनाव आयोग ने बहरे, गूंगे और अंधे की भूमिका निभाई।’’

80 लाख महिलाओं की अपात्रता पर सवाल

पार्टी ने मांग की है कि केवाईसी पूरा न होने का हवाला देते हुए जिन करीब 80 लाख महिलाओं को योजना से बाहर किया गया है, उस पूरे मामले की जाँच बॉम्बे हाईकोर्ट के मौजूदा न्यायाधीश से कराई जाए। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली पार्टी ने आरोप लगाया कि यह कथित अनियमितता दिखाती है कि सरकार ने ‘बिना सोचे-समझे’ सरकारी फंड बाँटा।

संपादकीय में दावा किया गया कि दिसंबर 2024 तक इस योजना के तहत ₹17,000 करोड़ से अधिक की राशि वितरित की जा चुकी थी। पार्टी का तर्क है कि यदि यह वितरण ‘गैरकानूनी’ है, तो सरकार को यह पैसा वापस लेना ही होगा।

संपत्ति जब्त करने और बर्खास्तगी की मांग

शिवसेना (UBT) ने कहा कि वसूली अयोग्य घोषित महिलाओं की जेब से नहीं, बल्कि उन लोगों से की जानी चाहिए जिन्होंने ‘फिजूलखर्ची और हेराफेरी’ की। पार्टी ने माँग की कि एक मुख्यमंत्री और दो उपमुख्यमंत्रियों की ‘चल और अचल संपत्तियाँ’ जब्त की जाएँ तथा संबंधित विभाग के तत्कालीन सचिव सहित जिम्मेदार अधिकारियों को बर्खास्त किया जाए।

संपादकीय में यह भी कहा गया कि उस ‘सरकारी मशीनरी’ के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले दर्ज होने चाहिए जिसने बिना किसी जाँच-पड़ताल के हजारों करोड़ रुपये बाँट दिए।

नए चुनाव की मांग और चुनाव आयोग पर निशाना

पार्टी ने मांग की कि चुनाव आयोग को उन महिलाओं द्वारा डाले गए वोटों को ‘अमान्य’ घोषित करना चाहिए जिन्हें अब अयोग्य पाया गया है, और महाराष्ट्र में नए सिरे से चुनाव कराए जाने चाहिए। संपादकीय के अनुसार, सत्ताधारी ‘तिकड़ी’ ने स्वयं स्वीकार किया था कि महिलाओं ने भारी संख्या में वोट इसलिए दिए क्योंकि उन्हें लाडकी बहिन योजना का लाभ मिला था।

व्यापक राजनीतिक संदर्भ

गौरतलब है कि यह आरोप ऐसे समय में आए हैं जब नवंबर 2024 के विधानसभा चुनावों में महायुति गठबंधन की प्रचंड जीत के बाद से विपक्षी महा विकास आघाड़ी (MVA) लगातार ‘चुनावी हेरफेर’ के दावे करती रही है। लाडकी बहिन योजना को महायुति की चुनावी कामयाबी का एक प्रमुख कारक माना गया था, और अब अपात्र लाभार्थियों के आँकड़े सामने आने के बाद विपक्ष ने इसे राजनीतिक हथियार बना लिया है। सरकार की ओर से इन आरोपों पर औपचारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसमें एक वैध नीतिगत सवाल छिपा है — चुनाव से ठीक पहले शुरू हुई नकद-हस्तांतरण योजनाओं की पात्रता-जाँच इतनी कमज़ोर क्यों रही कि बाद में 80 लाख लाभार्थी अपात्र निकले। यह पैटर्न अकेले महाराष्ट्र का नहीं है; मध्य प्रदेश की ‘लाडली बहना’ से लेकर कर्नाटक की ‘गृह लक्ष्मी’ तक, चुनावी कैलेंडर से जुड़ी कल्याणकारी घोषणाएँ अब आम चलन बन चुकी हैं। असली जवाबदेही तब बनेगी जब वोटों को अमान्य करने जैसी अधिकतम मांगों से आगे बढ़कर, योजना की डिज़ाइन, सत्यापन तंत्र और वितरण की स्वतंत्र ऑडिट हो। फिलहाल यह बहस आरोप-प्रत्यारोप के दायरे में ही फँसी दिखती है।
RashtraPress
20 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शिवसेना (UBT) ने महायुति सरकार पर क्या आरोप लगाए हैं?
शिवसेना (UBT) ने आरोप लगाया है कि महायुति सरकार ने ‘मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिन योजना’ के जरिए सरकारी धन का उपयोग कर महिलाओं के वोट ‘खरीदे’ और सत्ता हासिल की। पार्टी ने ‘सामना’ संपादकीय में इसे ‘बड़ा घोटाला’ बताते हुए हाईकोर्ट के मौजूदा न्यायाधीश से जांच की मांग की है।
लाडकी बहिन योजना में 80 लाख महिलाएँ अपात्र क्यों हुईं?
शिवसेना (UBT) के अनुसार, ई-केवाईसी प्रक्रिया पूरी न होने का हवाला देते हुए लगभग 80 लाख महिलाओं को योजना से अपात्र घोषित कर दिया गया। पार्टी का दावा है कि यह संकेत देता है कि पैसा बिना उचित सत्यापन के अयोग्य लाभार्थियों के खातों में डाला गया था।
योजना के तहत अब तक कितनी राशि वितरित हुई है?
‘सामना’ के संपादकीय में दावा किया गया है कि दिसंबर 2024 तक ‘मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिन योजना’ के तहत ₹17,000 करोड़ से अधिक की राशि वितरित की जा चुकी थी। राज्य सरकार ने 2.38 करोड़ महिलाओं को ₹1,500 मासिक भत्ता देने की घोषणा की थी।
शिवसेना (UBT) ने नए चुनाव की मांग क्यों की है?
पार्टी का तर्क है कि अपात्र पाई गई महिलाओं ने योजना के लाभ के बदले महायुति को वोट दिया, इसलिए चुनाव आयोग को उनके वोट अमान्य घोषित कर महाराष्ट्र में नए चुनाव कराने चाहिए। पार्टी ने इसे ‘भ्रष्ट और गैर-कानूनी’ तरीके से प्राप्त जनादेश बताया है।
शिवसेना (UBT) ने जिम्मेदार लोगों पर क्या कार्रवाई की मांग की है?
पार्टी ने मांग की है कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्रियों एकनाथ शिंदे व अजित पवार की चल-अचल संपत्तियाँ जब्त की जाएँ। साथ ही संबंधित विभाग के तत्कालीन सचिव सहित जिम्मेदार अधिकारियों की बर्खास्तगी और सरकारी मशीनरी के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले दर्ज करने की मांग की गई है।
राष्ट्र प्रेस
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