लाडकी बहिन योजना पर वारिस पठान का हमला: '80 लाख महिलाएं डेढ़ साल में अपात्र कैसे हुईं?'
सारांश
मुख्य बातें
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के राष्ट्रीय प्रवक्ता वारिस पठान ने 1 जून 2026 को महाराष्ट्र सरकार की 'लाडकी बहिन योजना' पर कड़े सवाल उठाए। पठान का आरोप है कि सरकार ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों से पहले वोट हासिल करने के मकसद से महिलाओं के खातों में पैसे ट्रांसफर किए, और चुनाव बीतते ही करीब 80 लाख महिलाओं को अचानक अपात्र घोषित कर दिया गया।
मुख्य आरोप: चुनावी फायदे के लिए जनता का पैसा?
पठान ने सीधे शब्दों में कहा, 'पहला सवाल यह है कि 80 लाख महिलाएं, जो अब तक पात्र थीं, अचानक डेढ़ साल के अंदर अपात्र कैसे हो गईं? चुनावों से पहले, हर कोई पात्र था। महाराष्ट्र चुनावों के दौरान, सरकार ने 'लाडकी बहिन योजना' के तहत जनता का पैसा बांटा और महिलाओं के खातों में पैसे ट्रांसफर किए। यहां तक कि यह भी कहा गया था कि राज्य के खजाने में पैसे खत्म हो गए थे। सरकार ने चुनावों के दौरान सब कुछ बहुत खुले तौर पर दिखाया और इसका इस्तेमाल वोट पाने के लिए किया।'
उनके अनुसार, जनता का पैसा टैक्सपेयर्स का पैसा होता है और उसका उपयोग चुनावी हितों के लिए नहीं होना चाहिए। उन्होंने मांग की कि पात्रता की पूरी सूची और चयन प्रक्रिया सार्वजनिक की जाए ताकि पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।
पात्रता में बदलाव पर सवाल
पठान ने यह जानना चाहा कि आखिर डेढ़ साल के भीतर ऐसा क्या बदला कि इतनी बड़ी संख्या में महिलाओं की पात्रता समाप्त कर दी गई। उनका कहना है कि यह प्रक्रिया न केवल अपारदर्शी है, बल्कि इसमें राजनीतिक फायदा उठाने की मंशा भी स्पष्ट दिखती है।
उन्होंने मांग की कि जिन अधिकारियों या तंत्र ने पहले पात्रता तय की और बाद में उसे बदला, उनके खिलाफ निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। उनके शब्दों में, यह मामला केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि नैतिक सवाल भी खड़ा करता है।
महिलाओं के साथ 'विश्वासघात' का आरोप
पठान ने इस पूरे घटनाक्रम को महिलाओं के साथ विश्वासघात करार दिया। उनका कहना है कि पहले योजना का लाभ देकर समर्थन लिया गया और चुनाव बाद उन्हें बाहर कर दिया गया। उन्होंने सरकार से स्पष्ट करने की मांग की कि किस कानूनी आधार पर पात्रता पहले तय की गई थी और किस नियम के तहत बाद में उसे बदला गया।
अभिषेक बनर्जी पर हमले की निंदा
इसी संदर्भ में पठान ने पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद अभिषेक बनर्जी पर हुए कथित हमले की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि चाहे राजनीतिक मतभेद हों या वैचारिक अंतर, किसी भी जनप्रतिनिधि पर हमला पूरी तरह अस्वीकार्य है। लोकतंत्र में विरोध और बहस की जगह है, लेकिन हिंसा की कोई जगह नहीं।
पठान ने चेताया कि यदि इस तरह की घटनाएं बढ़ती रहीं तो यह देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बन सकती हैं। उन्होंने जोर दिया कि कानून सबके लिए समान होना चाहिए और किसी भी सत्तारूढ़ दल को हिंसा को संरक्षण देने का अधिकार नहीं है। उन्होंने इस घटना की भी निष्पक्ष जांच की मांग की।