17 जुलाई 2026
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लाडकी बहिन योजना पर वारिस पठान का हमला: '80 लाख महिलाएं डेढ़ साल में अपात्र कैसे हुईं?'

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लाडकी बहिन योजना पर वारिस पठान का हमला: '80 लाख महिलाएं डेढ़ साल में अपात्र कैसे हुईं?'

सारांश

AIMIM प्रवक्ता वारिस पठान ने महाराष्ट्र की लाडकी बहिन योजना पर तीखा हमला बोला — आरोप है कि चुनाव से पहले 80 लाख महिलाओं को पात्र बताया गया, चुनाव बाद अचानक अपात्र कर दिया गया। उनके अनुसार यह जनता के पैसे का चुनावी दुरुपयोग है और पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

मुख्य बातें

AIMIM प्रवक्ता वारिस पठान ने 1 जून 2026 को महाराष्ट्र सरकार की लाडकी बहिन योजना पर सवाल उठाए।
आरोप है कि चुनाव के बाद करीब 80 लाख महिलाओं को डेढ़ साल के भीतर अचानक अपात्र घोषित कर दिया गया।
पठान ने कहा कि सरकार ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों के दौरान वोट पाने के लिए जनता का पैसा बांटा।
उन्होंने पात्रता सूची और चयन प्रक्रिया को सार्वजनिक करने और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ निष्पक्ष जांच की मांग की।
पठान ने पश्चिम बंगाल में TMC सांसद अभिषेक बनर्जी पर कथित हमले की भी निंदा की और इसे लोकतंत्र के लिए खतरा बताया।

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के राष्ट्रीय प्रवक्ता वारिस पठान ने 1 जून 2026 को महाराष्ट्र सरकार की 'लाडकी बहिन योजना' पर कड़े सवाल उठाए। पठान का आरोप है कि सरकार ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों से पहले वोट हासिल करने के मकसद से महिलाओं के खातों में पैसे ट्रांसफर किए, और चुनाव बीतते ही करीब 80 लाख महिलाओं को अचानक अपात्र घोषित कर दिया गया।

मुख्य आरोप: चुनावी फायदे के लिए जनता का पैसा?

पठान ने सीधे शब्दों में कहा, 'पहला सवाल यह है कि 80 लाख महिलाएं, जो अब तक पात्र थीं, अचानक डेढ़ साल के अंदर अपात्र कैसे हो गईं? चुनावों से पहले, हर कोई पात्र था। महाराष्ट्र चुनावों के दौरान, सरकार ने 'लाडकी बहिन योजना' के तहत जनता का पैसा बांटा और महिलाओं के खातों में पैसे ट्रांसफर किए। यहां तक कि यह भी कहा गया था कि राज्य के खजाने में पैसे खत्म हो गए थे। सरकार ने चुनावों के दौरान सब कुछ बहुत खुले तौर पर दिखाया और इसका इस्तेमाल वोट पाने के लिए किया।'

उनके अनुसार, जनता का पैसा टैक्सपेयर्स का पैसा होता है और उसका उपयोग चुनावी हितों के लिए नहीं होना चाहिए। उन्होंने मांग की कि पात्रता की पूरी सूची और चयन प्रक्रिया सार्वजनिक की जाए ताकि पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।

पात्रता में बदलाव पर सवाल

पठान ने यह जानना चाहा कि आखिर डेढ़ साल के भीतर ऐसा क्या बदला कि इतनी बड़ी संख्या में महिलाओं की पात्रता समाप्त कर दी गई। उनका कहना है कि यह प्रक्रिया न केवल अपारदर्शी है, बल्कि इसमें राजनीतिक फायदा उठाने की मंशा भी स्पष्ट दिखती है।

उन्होंने मांग की कि जिन अधिकारियों या तंत्र ने पहले पात्रता तय की और बाद में उसे बदला, उनके खिलाफ निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। उनके शब्दों में, यह मामला केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि नैतिक सवाल भी खड़ा करता है।

महिलाओं के साथ 'विश्वासघात' का आरोप

पठान ने इस पूरे घटनाक्रम को महिलाओं के साथ विश्वासघात करार दिया। उनका कहना है कि पहले योजना का लाभ देकर समर्थन लिया गया और चुनाव बाद उन्हें बाहर कर दिया गया। उन्होंने सरकार से स्पष्ट करने की मांग की कि किस कानूनी आधार पर पात्रता पहले तय की गई थी और किस नियम के तहत बाद में उसे बदला गया।

अभिषेक बनर्जी पर हमले की निंदा

इसी संदर्भ में पठान ने पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद अभिषेक बनर्जी पर हुए कथित हमले की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि चाहे राजनीतिक मतभेद हों या वैचारिक अंतर, किसी भी जनप्रतिनिधि पर हमला पूरी तरह अस्वीकार्य है। लोकतंत्र में विरोध और बहस की जगह है, लेकिन हिंसा की कोई जगह नहीं।

पठान ने चेताया कि यदि इस तरह की घटनाएं बढ़ती रहीं तो यह देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बन सकती हैं। उन्होंने जोर दिया कि कानून सबके लिए समान होना चाहिए और किसी भी सत्तारूढ़ दल को हिंसा को संरक्षण देने का अधिकार नहीं है। उन्होंने इस घटना की भी निष्पक्ष जांच की मांग की।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो यह सामाजिक कल्याण प्रशासन में पारदर्शिता की गंभीर कमी को उजागर करता है। असली जवाबदेही तब होगी जब सरकार पात्रता के मानदंड, उनमें बदलाव की तारीख और कारण सार्वजनिक करे — अन्यथा यह विवाद आगामी चुनावी चक्र तक बना रहेगा।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लाडकी बहिन योजना क्या है और इस पर विवाद क्यों है?
लाडकी बहिन योजना महाराष्ट्र सरकार की एक कल्याणकारी योजना है जिसके तहत पात्र महिलाओं के बैंक खातों में सीधे राशि ट्रांसफर की जाती है। विवाद इसलिए है क्योंकि AIMIM प्रवक्ता वारिस पठान का आरोप है कि चुनाव के बाद करीब 80 लाख महिलाओं को अचानक अपात्र घोषित कर दिया गया, जो चुनाव से पहले पात्र थीं।
वारिस पठान ने 80 लाख महिलाओं के अपात्र होने पर क्या कहा?
पठान ने सवाल उठाया कि डेढ़ साल के भीतर ऐसा क्या बदला कि इतनी बड़ी संख्या में महिलाओं की पात्रता समाप्त कर दी गई। उनका आरोप है कि चुनाव से पहले सभी को पात्र दिखाया गया और वोट मिलने के बाद उन्हें बाहर कर दिया गया।
पठान ने इस मामले में क्या मांगें रखी हैं?
उन्होंने मांग की है कि पात्रता की पूरी सूची और चयन प्रक्रिया सार्वजनिक की जाए। साथ ही जिन अधिकारियों ने पात्रता तय की या बाद में उसे बदला, उनके खिलाफ निष्पक्ष जांच हो और जिम्मेदारी तय की जाए।
वारिस पठान ने अभिषेक बनर्जी पर हमले के बारे में क्या कहा?
पठान ने पश्चिम बंगाल में TMC सांसद अभिषेक बनर्जी पर हुए कथित हमले की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेद चाहे जो भी हों, किसी भी जनप्रतिनिधि पर हमला लोकतंत्र के लिए खतरनाक है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
क्या महाराष्ट्र सरकार ने इन आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया दी है?
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, महाराष्ट्र सरकार की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। पात्रता में बदलाव के कारणों और मानदंडों को लेकर सरकार का पक्ष अभी स्पष्ट नहीं है।
राष्ट्र प्रेस
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