लाडकी बहीण योजना: मंत्री अदिति तटकरे का स्पष्टीकरण — कोई आवेदन खारिज नहीं, 80 लाख बहिष्कार के दावे गलत
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र की महिला एवं बाल विकास मंत्री अदिति तटकरे ने सोमवार, 1 जून 2026 को मुंबई में स्पष्ट किया कि राज्य सरकार की प्रमुख 'मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहीण योजना' के तहत किसी भी पात्र लाभार्थी का आवेदन खारिज नहीं किया गया है। उनका यह बयान उन मीडिया रिपोर्टों के जवाब में आया जिनमें दावा किया गया था कि लगभग 80 लाख महिलाओं को इस योजना से बाहर कर दिया गया है।
मंत्री का स्पष्टीकरण
तटकरे ने बताया कि आयु और आय मानदंडों को पूरा न करने वाले आवेदकों की जानकारी संबंधित विभागों से प्राप्त कर ली गई है। आरटीओ से वाहन पंजीकरण कराने वाले आवेदकों और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ उठा रहे लोगों का विवरण भी दर्ज किया गया है। उन्होंने कहा कि निर्धारित अवधि में ई-केवाईसी पूरा न करने के कारण कुछ आवेदकों के लाभ निलंबित किए गए हैं, न कि स्थायी रूप से रद्द।
मंत्री ने आश्वासन दिया कि जिन आवेदकों ने ई-केवाईसी पूरा कर लिया है, जिनके पास वाहन पंजीकरण नहीं है, और जिनके लाभ निलंबित हैं — उन सभी का पुनः सत्यापन किया जाएगा। उन्होंने कहा, 'मैं आपको विश्वास दिलाती हूँ कि विभाग द्वारा इन सभी मामलों का पुनः सत्यापन किया जाएगा।'
योजना की पृष्ठभूमि और संख्याएँ
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार गुट) की कार्यकारी अध्यक्ष और सांसद सुप्रिया सुले ने बताया कि योजना की शुरुआत में 2.38 करोड़ महिलाओं को लाभ मिला था और दिसंबर 2024 तक ₹17,505 करोड़ वितरित किए जा चुके थे। बाद में लाभार्थियों की संख्या बढ़कर 2.46 से 2.48 करोड़ हो गई। ई-केवाईसी अनिवार्य किए जाने के बाद यह संख्या घटकर लगभग 1.66 करोड़ रह गई।
सुले ने पोर्टल के आँकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि केवल 1.12 करोड़ आवेदन प्राप्त हुए और 1.06 करोड़ को मंजूरी मिली, जिसका अर्थ है कि 1.25 करोड़ से अधिक महिलाएँ अयोग्य घोषित कर दी गईं। यह ऐसे समय में आया है जब योजना की पारदर्शिता को लेकर विपक्ष पहले से सवाल उठाता रहा है।
विपक्ष की माँग
सुप्रिया सुले ने सरकार से माँग की कि कोई भी पात्र महिला तकनीकी कारणों से योजना के लाभ से वंचित न रहे। उन्होंने कहा, 'महाराष्ट्र की हर बहन को लाडकी बहीण योजना का लाभ नियमित रूप से मिलना चाहिए — यह हमारा स्पष्ट रुख है।' उन्होंने योजना की उच्च स्तरीय जाँच और स्वतंत्र ऑडिट की माँग भी की।
सुले ने यह भी कहा कि महाराष्ट्र के ईमानदार करदाताओं का पैसा किसके पास और किस तरह गलत तरीके से पहुँचा, इसकी जवाबदेही पारदर्शी रूप से सामने आनी चाहिए।
सरकार का रुख
तटकरे ने इस बात पर जोर दिया कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और सुनेत्रा पवार ने स्पष्ट किया है कि महाराष्ट्र में किसी भी पात्र महिला के साथ अन्याय नहीं होगा। गौरतलब है कि यह योजना महायुति सरकार की चुनावी प्रतिबद्धताओं में से एक प्रमुख वादा रही है।
आगे क्या
निलंबित लाभार्थियों के पुनः सत्यापन की प्रक्रिया विभाग द्वारा शुरू किए जाने की बात कही गई है। विपक्ष के स्वतंत्र ऑडिट की माँग पर सरकार का अभी कोई आधिकारिक जवाब नहीं आया है। योजना की विश्वसनीयता और क्रियान्वयन की पारदर्शिता अगले कुछ हफ्तों में राजनीतिक बहस का केंद्र बनी रहेगी।