लाडकी बहिन योजना पर रोहित पवार का हमला, ‘चुनाव बाद लाखों महिलाएँ अपात्र घोषित’
सारांश
मुख्य बातें
एनसीपी (शरद पवार गुट) के नेता रोहित पवार ने 3 जून को मुंबई में महाराष्ट्र की महायुति सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि ‘लाडकी बहिन योजना’ के तहत चुनाव से पहले लाभान्वित की गईं करीब ढाई करोड़ महिलाओं में से लाखों को अब अपात्र ठहराया जा रहा है। उन्होंने इसे ‘चुनावी रणनीति’ करार देते हुए कहा कि चुनाव के बाद सरकार का रवैया पूरी तरह बदल गया है।
मुख्य आरोप
रोहित पवार के अनुसार, विधानसभा चुनाव से ठीक पहले इस योजना की घोषणा कर करोड़ों महिलाओं को लाभ दिया गया और कुछ महीनों का एडवांस भुगतान भी कर दिया गया। उन्होंने कहा, ‘चुनाव खत्म होते ही लाखों लाभार्थियों के नाम सूची से हटने लगे — यह सवाल खड़ा करता है कि यह योजना वास्तव में महिला सशक्तिकरण के लिए थी या केवल वोट बटोरने का ज़रिया।’
सरकार के बदले रवैये पर सवाल
पवार ने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान जनता से अपनापन दिखाने वाली सरकार बाद में आम लोगों की समस्याओं से दूरी बना लेती है। उन्होंने चेताया कि आने वाले चुनावों में ‘महिलाएँ इसका जवाब ज़रूर देंगी।’ गौरतलब है कि नवंबर 2024 के विधानसभा चुनाव में महायुति की भारी जीत में इस योजना को एक निर्णायक कारक माना गया था, और अब पात्रता समीक्षा को लेकर विपक्ष लगातार मुखर है।
महंगाई और ईंधन की कीमतें
एनसीपी (SP) नेता ने पेट्रोल-डीज़ल की बढ़ती कीमतों पर भी चिंता जताई। उन्होंने बताया कि कई इलाकों में पेट्रोल ₹110 से ₹112 प्रति लीटर के आसपास पहुँच चुका है, जबकि डीज़ल भी ₹100 के क़रीब है। घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से आम परिवारों का बजट बिगड़ने का दावा भी उन्होंने किया।
छोटे कारोबारियों पर मार
कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों पर बोलते हुए पवार ने कहा कि वड़ा-पाव स्टॉल, पोहा विक्रेता, चाय की दुकानें और छोटे रेस्टोरेंट सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। ‘जब उनकी लागत बढ़ती है, तो इसका सीधा असर खाने-पीने की चीज़ों की कीमतों पर पड़ता है,’ उन्होंने कहा। उनके मुताबिक़, सैलरीड कर्मचारी, पुलिस कांस्टेबल और आईटी पेशेवर — सभी पर महँगाई का बोझ बढ़ रहा है, जबकि आय उसी अनुपात में नहीं बढ़ रही।
आगे क्या
रोहित पवार ने आरोप लगाया कि सरकार आम जनता की समस्याओं के बजाय राजनीतिक गतिविधियों में अधिक व्यस्त है। योजना की पात्रता समीक्षा और हटाए जा रहे नामों को लेकर महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से विस्तृत स्पष्टीकरण की माँग विपक्ष लगातार उठा रहा है।