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किसानों के लिए खजाना खाली, दल-बदल पर ₹500 करोड़ खर्च — शिवसेना (यूबीटी) का महायुति पर तीखा प्रहार

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किसानों के लिए खजाना खाली, दल-बदल पर ₹500 करोड़ खर्च — शिवसेना (यूबीटी) का महायुति पर तीखा प्रहार

सारांश

शिवसेना (यूबीटी) ने 'सामना' में तीखा सवाल दागा — किसानों के लिए खजाना खाली, लेकिन छह सांसदों को तोड़ने पर कथित ₹500 करोड़ खर्च। फडणवीस के 'धोखे का ऑपरेशन सफल' वाले बयान को ठाकरे गुट ने महाराष्ट्र की राजनीतिक संस्कृति के पतन का प्रतीक बताया।

मुख्य बातें

शिवसेना (यूबीटी) ने 23 जून 2026 को 'सामना' के संपादकीय के ज़रिए महायुति गठबंधन पर तीखा हमला बोला।
'ऑपरेशन टाइगर' के तहत शिवसेना (यूबीटी) के छह बागी सांसद शिंदे गुट में शामिल हुए; इस दल-बदल पर कथित तौर पर ₹500 करोड़ से अधिक खर्च का दावा।
मुंबई को पानी देने वाले सात बांधों में जलस्तर गिरकर 8.5% पर पहुँचा, तत्काल जल-कटौती लागू।
पार्टी का आरोप — 81 लाख महिलाओं की 'लाडकी बहिन' योजना की सहायता चुनाव बाद बंद।
महाराष्ट्र विधानसभा के दोनों सदन बिना विपक्ष के नेता के कार्यरत; ठाकरे गुट ने विधानसभा सत्र स्थगित करने की माँग की।
ठाकरे गुट ने नीट-यूजी 2026 पेपर लीक में गिरफ्तार लोगों के BJP से करीबी संबंध होने का आरोप लगाया।

शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने मंगलवार, 23 जून 2026 को सत्ताधारी महायुति गठबंधन पर सीधा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की नीतियाँ महाराष्ट्र को 25 साल पीछे धकेल रही हैं और राज्य की गरिमा को गहरी ठेस पहुँचा रही हैं। पार्टी के मुखपत्र 'सामना' में प्रकाशित तीखे संपादकीय में यह भी दावा किया गया कि जहाँ संकटग्रस्त किसानों के लिए सरकारी खजाने में पैसा नहीं है, वहीं राजनीतिक दल-बदल कराने पर कथित तौर पर ₹500 करोड़ से अधिक खर्च किए गए।

ऑपरेशन टाइगर और दल-बदल का विवाद

संपादकीय में 'ऑपरेशन टाइगर' का विशेष उल्लेख किया गया, जिसके तहत सोमवार, 22 जून को शिवसेना (यूबीटी) के छह बागी सांसद शिंदे गुट में शामिल हो गए। ठाकरे गुट ने आरोप लगाया कि फडणवीस ने इस घटनाक्रम को 'धोखे का ऑपरेशन' बताते हुए खुलेआम जश्न मनाया और कहा कि 'मरीज ठीक है।' संपादकीय में व्यंग्यात्मक लहजे में इसे शिंदे द्वारा छह 'गद्दारों' को जन्म देने की संज्ञा दी गई।

ठाकरे गुट ने यह भी दावा किया कि दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेतृत्व का एक गुट खुलेआम शिंदे को मुख्यमंत्री के अधिकार को चुनौती देने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है, जो आगे चलकर फडणवीस के लिए नुकसानदेह साबित होगा।

किसान संकट और प्रशासनिक विफलता

संपादकीय में ग्रामीण महाराष्ट्र की बिगड़ती स्थिति को केंद्र में रखा गया। आरोप लगाया गया कि बारिश में देरी के चलते राज्य के बड़े हिस्से में पानी की भारी किल्लत है, पलायन बढ़ रहा है और मवेशियों के लिए चारे का संकट गहरा रहा है। मुंबई को पानी आपूर्ति करने वाले सात प्रमुख बांधों में जलस्तर गिरकर 8.5 प्रतिशत तक पहुँच जाने की बात कही गई, जिसके चलते तत्काल जल-कटौती लागू करनी पड़ी।

किसानों की आत्महत्याओं पर चिंता जताते हुए संपादकीय में कहा गया कि फडणवीस ने हाल ही में कर्ज माफी को स्थायी समाधान मानने से इनकार किया, लेकिन सरकार यह नहीं बता पा रही कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और फसल बीमा के उचित क्रियान्वयन के बिना किसानों को कैसे सशक्त बनाया जाएगा। विदर्भ और मराठवाड़ा में सूखे के गंभीर हालात का भी उल्लेख किया गया।

नीट-यूजी पेपर लीक और युवाओं का भविष्य

ठाकरे गुट ने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र नीट-यूजी 2026 पेपर लीक घोटाले का केंद्र बन गया है। दावा किया गया कि इस मामले में गिरफ्तार किए गए लोगों के BJP परिवार से करीबी संबंध हैं, जिससे राज्य के लाखों युवाओं का भविष्य दाँव पर लग गया है। पार्टी ने माँग की कि जब तक फडणवीस इन मुद्दों पर विपक्ष के सवालों का जवाब नहीं देते, विधानसभा सत्र स्थगित किया जाए।

लाडकी बहिन योजना और लोकतंत्र पर सवाल

शिवसेना (यूबीटी) ने सरकार की प्रमुख 'लाडकी बहिन' योजना को धोखा करार दिया। पार्टी का दावा है कि चुनाव समाप्त होते ही 81 लाख महिलाओं को मिलने वाली आर्थिक सहायता बंद कर दी गई। इसके अलावा, संपादकीय में यह भी रेखांकित किया गया कि महाराष्ट्र विधानसभा के दोनों सदन फिलहाल बिना विपक्ष के नेता के चल रहे हैं। आरोप लगाया गया कि सत्ताधारी गठबंधन ने जानबूझकर इन नियुक्तियों में देरी की है ताकि सदन में जवाबदेही से बचा जा सके।

यह ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र में बेरोज़गारी बढ़ रही है और कानून-व्यवस्था की स्थिति पर भी सवाल उठ रहे हैं। 'सामना' संपादकीय ने छत्रपति शिवाजी महाराज की विरासत का हवाला देते हुए कहा कि जिस महाराष्ट्र में कभी गद्दारों के दिल में डर होता था, वहाँ आज की सत्ता दल-बदल का उत्सव मना रही है। आने वाले दिनों में विधानसभा सत्र में यह टकराव और तीखा होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

दूसरी तरफ दल-बदल पर कथित रूप से सैकड़ों करोड़ खर्च होने के आरोप लग रहे हैं — यह प्राथमिकताओं का सवाल है जिसका जवाब सरकार को देना होगा। मुंबई के बाँधों में 8.5% जलस्तर और विदर्भ-मराठवाड़ा में सूखे की स्थिति बताती है कि प्रशासनिक ध्यान कहाँ केंद्रित है। विधानसभा में विपक्ष के नेता की अनुपस्थिति लोकतांत्रिक जवाबदेही की संरचना को कमज़ोर करती है — और यह महज संयोग नहीं लगता।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'ऑपरेशन टाइगर' क्या है और इसका महाराष्ट्र की राजनीति पर क्या असर है?
'ऑपरेशन टाइगर' वह कथित राजनीतिक अभियान है जिसके तहत 22 जून 2026 को शिवसेना (यूबीटी) के छह बागी सांसद शिंदे गुट में शामिल हुए। शिवसेना (यूबीटी) का दावा है कि इस दल-बदल पर कथित तौर पर ₹500 करोड़ से अधिक खर्च हुए, जबकि राज्य में किसान और आम जनता संकट में हैं।
शिवसेना (यूबीटी) ने फडणवीस और शिंदे पर क्या-क्या आरोप लगाए हैं?
ठाकरे गुट ने 'सामना' संपादकीय में आरोप लगाया कि फडणवीस और शिंदे महाराष्ट्र को 25 साल पीछे धकेल रहे हैं। पार्टी ने किसानों की अनदेखी, 'लाडकी बहिन' योजना की सहायता बंद करने, नीट पेपर लीक और प्रशासनिक विफलता को लेकर सरकार को घेरा है।
महाराष्ट्र में पानी का संकट कितना गंभीर है?
मुंबई को पानी आपूर्ति करने वाले सात प्रमुख बांधों में जलस्तर गिरकर 8.5 प्रतिशत तक पहुँच गया है, जिससे तत्काल जल-कटौती लागू करनी पड़ी है। ग्रामीण महाराष्ट्र में बारिश की देरी के चलते पलायन और पशुओं के लिए चारे की कमी का संकट भी गहराता जा रहा है।
'लाडकी बहिन' योजना पर शिवसेना (यूबीटी) का क्या आरोप है?
शिवसेना (यूबीटी) का दावा है कि महायुति सरकार ने विधानसभा चुनाव समाप्त होते ही 81 लाख महिलाओं को मिलने वाली 'लाडकी बहिन' योजना की आर्थिक सहायता बंद कर दी। पार्टी ने इसे चुनावी वादे से पलटना और महिलाओं के साथ धोखा करार दिया है।
महाराष्ट्र विधानसभा में विपक्ष के नेता की नियुक्ति क्यों नहीं हुई?
शिवसेना (यूबीटी) के अनुसार महाराष्ट्र विधानसभा के दोनों सदन फिलहाल बिना विपक्ष के नेता के कार्यरत हैं। पार्टी का आरोप है कि सत्ताधारी गठबंधन ने जानबूझकर इन नियुक्तियों में देरी की है ताकि सदन में जवाबदेही और कड़े सवालों से बचा जा सके।
राष्ट्र प्रेस
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