ऑस्ट्रेलियनसुपर का NIIF में ₹500 मिलियन AUD का अतिरिक्त निवेश, भारत की इंफ्रास्ट्रक्चर नीति पर वैश्विक भरोसे का संकेत
सारांश
मुख्य बातें
ऑस्ट्रेलिया के सबसे बड़े पेंशन फंड ऑस्ट्रेलियनसुपर ने नेशनल इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (NIIF) में 500 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर का अतिरिक्त निवेश करने का फैसला किया है। 9 जुलाई को सामने आए इस निर्णय को विशेषज्ञों ने भारत की इंफ्रास्ट्रक्चर-केंद्रित विकास रणनीति पर वैश्विक संस्थागत निवेशकों के बढ़ते विश्वास का ठोस प्रमाण बताया है।
निवेश का संदर्भ और महत्त्व
विशेषज्ञ राजीव साहू के अनुसार, 2014 से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने बुनियादी ढाँचे के विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। इसी नीतिगत निरंतरता के परिणामस्वरूप हाईवे, रेलवे, बंदरगाह, एयरपोर्ट, शहरी अवसंरचना और कनेक्टिविटी परियोजनाओं पर व्यापक पैमाने पर सार्वजनिक व्यय किया गया है। उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रेलियनसुपर का यह निवेश इस बात की पुष्टि करता है कि NIIF विदेशी पूँजी आकर्षित करने का एक प्रभावी और विश्वसनीय मंच बन चुका है।
पूँजीगत व्यय में ऐतिहासिक उछाल
साहू ने बताया कि केंद्र सरकार ने हाल के बजटों में पूँजीगत व्यय को बढ़ाकर ₹10 लाख करोड़ से अधिक कर दिया है, जबकि करीब एक दशक पहले यह आँकड़ा मात्र ₹2 लाख करोड़ के आसपास था। उनके मुताबिक, इस निरंतर सार्वजनिक निवेश के कारण वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत पिछले कई वर्षों से 7 प्रतिशत से अधिक की आर्थिक वृद्धि दर बनाए रखने में सफल रहा है। यह ऐसे समय में उल्लेखनीय है जब अधिकांश प्रमुख अर्थव्यवस्थाएँ मंदी की आशंका से जूझ रही हैं।
बहु-स्तरीय निवेश से बदल रही तस्वीर
साहू ने रेखांकित किया कि भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण अब केवल केंद्र सरकार तक सीमित नहीं है — राज्य सरकारें, निजी क्षेत्र और पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के ज़रिये भी निवेश तेज़ी से बढ़ रहा है। इन संयुक्त प्रयासों से कनेक्टिविटी बेहतर हो रही है, लॉजिस्टिक्स लागत में कमी आ रही है, रोज़गार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं और भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता मज़बूत हो रही है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
ओएनजीसी के पूर्व चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक (एमडी) तथा वित्त निदेशक ने भी कहा कि भारत की नीतियाँ लगातार स्थिर रही हैं और देश ने हमेशा निवेश का स्वागत किया है। उनके अनुसार, NIIF ने शानदार प्रदर्शन किया है, लेकिन भारत में निवेश के अवसर केवल इसी तक सीमित नहीं हैं — हर क्षेत्र में अपार संभावनाएँ मौजूद हैं।
उन्होंने कहा कि भारत का लक्ष्य 2047 तक 25 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनना है, जिसके लिए मौजूदा अर्थव्यवस्था को पाँच से छह गुना बढ़ाना होगा। कोविड-19 महामारी, महंगाई और वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव जैसी चुनौतियों के दौरान भारत की मज़बूत आर्थिक स्थिति ने विदेशी निवेशकों का भरोसा और गहरा किया है।
भविष्य की चुनौतियाँ और आगे की राह
साहू ने कहा कि 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य को हासिल करने के लिए भारत को आने वाले वर्षों में और अधिक वैश्विक पूँजी की आवश्यकता होगी। उन्होंने यह भी आगाह किया कि वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव के बीच प्रमुख देशों के रुख बदल रहे हैं, और युद्धविराम के बावजूद छोटे-छोटे संघर्ष जारी रहने की आशंका है। ऐसे में भारत के लिए ज़रूरी है कि वह हर संभावित चुनौती के लिए पहले से तैयार रहे। गौरतलब है कि चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में भारत की उभरती भूमिका वैश्विक निवेशकों के लिए उसे एक अपरिहार्य गंतव्य बना रही है।