9 जुलाई 2026
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मेलबर्न में PM मोदी ने ऑस्ट्रेलियाई कारोबारियों को दिया निवेश का न्योता, स्वच्छ ऊर्जा-AI-इंफ्रा में साझेदारी पर जोर

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मेलबर्न में PM मोदी ने ऑस्ट्रेलियाई कारोबारियों को दिया निवेश का न्योता, स्वच्छ ऊर्जा-AI-इंफ्रा में साझेदारी पर जोर

सारांश

मेलबर्न में मोदी का संदेश साफ था — भारत सिर्फ बाज़ार नहीं, साझेदार बनना चाहता है। स्वच्छ ऊर्जा से लेकर AI और पेंशन फंड तक, उन्होंने ऑस्ट्रेलियाई कारोबारियों के सामने भारत की विकास यात्रा का पूरा खाका रखा और ECTA के बाद CECA की ओर बढ़ने का संकेत दिया।

मुख्य बातें

PM नरेंद्र मोदी ने 9 जुलाई 2026 को मेलबर्न में भारत-ऑस्ट्रेलिया सीईओ फोरम को संबोधित किया।
2022 में हुए ECTA के बाद भारत से ऑस्ट्रेलिया को निर्यात दोगुना हो चुका है; अब CECA की दिशा में वार्ता जारी।
भारत का लक्ष्य 2030 तक 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा और 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा।
AI, क्वांटम और सेमीकंडक्टर मिशन के तहत भारत सरकार ने 10 अरब डॉलर से अधिक की प्रतिबद्धता जताई।
ऑस्ट्रेलिया के 4 ट्रिलियन डॉलर से अधिक के पेंशन फंड को भारत में निवेश के लिए आमंत्रित किया।
डीकिन यूनिवर्सिटी और यूनिवर्सिटी ऑफ वोलोंगोंग ने GIFT सिटी में परिसर स्थापित किए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 9 जुलाई 2026 को मेलबर्न में भारत-ऑस्ट्रेलिया सीईओ फोरम को संबोधित करते हुए ऑस्ट्रेलियाई कारोबारियों को स्वच्छ ऊर्जा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), इंफ्रास्ट्रक्चर और डिजिटल अर्थव्यवस्था में भारत की विकास यात्रा में भागीदार बनने का आमंत्रण दिया। उन्होंने वैश्विक अनिश्चितता और आपूर्ति श्रृंखला की बाधाओं के बीच भारत और ऑस्ट्रेलिया को एक-दूसरे का स्वाभाविक एवं भरोसेमंद साझेदार बताया।

भारत-ऑस्ट्रेलिया आर्थिक संबंधों की मजबूत नींव

मोदी ने 2022 में हुए भारत-ऑस्ट्रेलिया आर्थिक सहयोग और व्यापार समझौते (ECTA) का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके लागू होने के बाद से भारत से ऑस्ट्रेलिया को निर्यात दोगुना हो चुका है। उन्होंने कहा कि अब दोनों देश एक व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते (CECA) की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

फोरम में उपस्थित व्यापार जगत के नेताओं को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा, "आज दुनिया अनिश्चितता, सप्लाई चेन में रुकावट और ऊर्जा संकट के दौर से गुजर रही है। ऐसे समय में भारत और ऑस्ट्रेलिया के लिए स्वाभाविक और भरोसेमंद साझेदार के तौर पर आगे बढ़ना स्वाभाविक और जरूरी दोनों है।" उन्होंने जोड़ा कि दोनों देशों की सरकारों ने निवेश और नवाचार के लिए एक नया रनवे तैयार किया है।

स्वच्छ ऊर्जा और परमाणु क्षेत्र में अवसर

स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में संभावनाओं पर प्रकाश डालते हुए मोदी ने बताया कि भारत हाइड्रोइलेक्ट्रिक परियोजनाओं, ग्रीन हाइड्रोजन, सोलर मॉड्यूल और पवन ऊर्जा उपकरणों के लिए एक सशक्त मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम विकसित कर रहा है। भारत ने 2030 तक 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता हासिल करने और 2070 तक नेट-ज़ीरो उत्सर्जन का लक्ष्य रखा है।

उन्होंने हाल के नीतिगत सुधारों का उल्लेख करते हुए कहा, "कुछ महीने पहले भारत ने परमाणु क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोल दिया। हमने 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा का लक्ष्य रखा है।" उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के बड़े यूरेनियम भंडार को भारत की परमाणु ऊर्जा यात्रा से सीधे जुड़ा बताया।

इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रौद्योगिकी में निवेश के अवसर

मोदी ने ऑस्ट्रेलियाई निवेशकों को बंदरगाह, हवाई अड्डे, राजमार्ग, रेलवे और शहरी विकास परियोजनाओं में भागीदारी का आमंत्रण दिया। उन्होंने कहा, "आज भारत में राष्ट्रीय राजमार्ग लगभग 34 किलोमीटर प्रतिदिन की रफ्तार से बढ़ रहे हैं और रोजाना 8 किलोमीटर से अधिक रेलवे ट्रैक बिछाए जा रहे हैं।"

उभरती प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सहयोग पर जोर देते हुए उन्होंने बताया कि भारत सरकार ने AI मिशन, क्वांटम मिशन और सेमीकंडक्टर कार्यक्रम के तहत 10 अरब डॉलर से अधिक की प्रतिबद्धता जताई है। उन्होंने कहा कि दोनों देश डेटा सेंटर, AI, क्वांटम टेक्नोलॉजी और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में वैश्विक समाधान विकसित कर सकते हैं।

पेंशन फंड और शिक्षा साझेदारी

ऑस्ट्रेलिया के विशाल पेंशन फंड का संदर्भ देते हुए मोदी ने कहा, "ऑस्ट्रेलिया के पेंशन फंड इस समय 4 ट्रिलियन डॉलर से अधिक की परिसंपत्तियों का प्रबंधन कर रहे हैं। भारत में पेंशन की बचत को एक पवित्र जिम्मेदारी माना जाता है।" उन्होंने भारत को पेंशन फंडों के लिए सुरक्षित, स्थिर और टिकाऊ विकास का गंतव्य बताया।

शिक्षा और कौशल विकास के मोर्चे पर उन्होंने डीकिन यूनिवर्सिटी और यूनिवर्सिटी ऑफ वोलोंगोंग द्वारा गुजरात इंटरनेशनल फाइनेंस टेक-सिटी (GIFT सिटी) में परिसर स्थापित करने का उल्लेख किया। उन्होंने छात्र गतिशीलता को प्रतिभा साझेदारी में बदलने को दोनों देशों का साझा लक्ष्य बताया।

राज्य-से-राज्य और क्षेत्र-दर-क्षेत्र साझेदारी का आह्वान

अपने संबोधन के समापन में मोदी ने जोर दिया कि भारत-ऑस्ट्रेलिया साझेदारी को राष्ट्रीय राजधानियों तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि इसमें दोनों देशों के राज्य, शहर, विश्वविद्यालय और उद्योग सभी को शामिल होना चाहिए। उन्होंने विशेष राज्य-दर-राज्य और क्षेत्र-दर-क्षेत्र साझेदारियों की पहचान करने का सुझाव दिया।

विदेश मंत्रालय ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए बताया कि मोदी और ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने मेलबर्न में ऑस्ट्रेलिया-भारत सीईओ फोरम को संयुक्त रूप से संबोधित किया। मंत्रालय के अनुसार, मोदी ने भारत की मजबूत आर्थिक वृद्धि, सुधार-आधारित कारोबारी माहौल और बढ़ते नवाचार इकोसिस्टम को रेखांकित किया तथा भारत के स्केल और ऑस्ट्रेलिया की विशेषज्ञता को 'जीत की साझेदारी' करार दिया।

यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब वैश्विक व्यापार तनाव और ऊर्जा सुरक्षा की चुनौतियों के बीच भारत अपनी आर्थिक कूटनीति को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की कोशिश कर रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसमें ऊर्जा, प्रौद्योगिकी और पूंजी तीनों मोर्चों पर ऑस्ट्रेलिया को साधने की कोशिश दिखी। ECTA के बाद निर्यात दोगुना होने का आंकड़ा उत्साहजनक है, लेकिन असली कसौटी CECA की शर्तें और उनका क्रियान्वयन होगा। परमाणु क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोलना और ऑस्ट्रेलियाई यूरेनियम भंडार को भारत की ऊर्जा जरूरतों से जोड़ना एक रणनीतिक संदेश है — लेकिन नियामकीय ढांचा और द्विपक्षीय परमाणु समझौते की बारीकियां अभी सार्वजनिक नहीं हैं। 4 ट्रिलियन डॉलर के पेंशन फंड को आकर्षित करने की बात महत्वाकांक्षी है, पर भारत में दीर्घकालिक विदेशी संस्थागत निवेश के लिए नियामकीय स्थिरता और निकास सुगमता की मांग बनी रहती है।
RashtraPress
9 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत-ऑस्ट्रेलिया सीईओ फोरम में PM मोदी ने क्या कहा?
PM मोदी ने 9 जुलाई 2026 को मेलबर्न में ऑस्ट्रेलियाई कारोबारियों को स्वच्छ ऊर्जा, AI, इंफ्रास्ट्रक्चर, सेमीकंडक्टर और डिजिटल अर्थव्यवस्था में भारत की विकास यात्रा में भागीदार बनने का आमंत्रण दिया। उन्होंने भारत और ऑस्ट्रेलिया को वैश्विक अनिश्चितता के बीच एक-दूसरे का स्वाभाविक और भरोसेमंद साझेदार बताया।
भारत-ऑस्ट्रेलिया ECTA क्या है और इसका क्या असर हुआ?
ECTA यानी आर्थिक सहयोग और व्यापार समझौता 2022 में रिकॉर्ड समय में संपन्न हुआ था। इसके लागू होने के बाद भारत से ऑस्ट्रेलिया को निर्यात दोगुना हो चुका है और दोनों देशों के कारोबारियों को नए बाज़ार तक पहुंच मिली है। अब दोनों देश एक व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते (CECA) की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
भारत की स्वच्छ ऊर्जा योजनाओं में ऑस्ट्रेलिया की क्या भूमिका हो सकती है?
भारत ने 2030 तक 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा और 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा का लक्ष्य रखा है। ऑस्ट्रेलिया की तकनीकी विशेषज्ञता, वित्तीय संसाधन और यूरेनियम भंडार इस यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। भारत ने हाल ही में परमाणु क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए भी खोल दिया है।
ऑस्ट्रेलियाई पेंशन फंड भारत में निवेश क्यों करें?
PM मोदी ने बताया कि ऑस्ट्रेलिया के पेंशन फंड 4 ट्रिलियन डॉलर से अधिक की परिसंपत्तियों का प्रबंधन करते हैं। उन्होंने भारत को इन फंडों के लिए सुरक्षित, स्थिर और दीर्घकालिक विकास का गंतव्य बताया और आश्वासन दिया कि पूंजी की पूरी जिम्मेदारी से देखभाल की जाएगी।
भारत-ऑस्ट्रेलिया शिक्षा साझेदारी में क्या नया हुआ है?
डीकिन यूनिवर्सिटी और यूनिवर्सिटी ऑफ वोलोंगोंग ने गुजरात के GIFT सिटी में अपने परिसर स्थापित कर लिए हैं। PM मोदी ने कहा कि दोनों देशों का साझा लक्ष्य छात्र गतिशीलता को प्रतिभा साझेदारी में बदलना होना चाहिए।
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