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गुरु दत्त की 101वीं जयंती: जैकी श्रॉफ ने ब्लैक-एंड-व्हाइट तस्वीरें शेयर कर दी भावभीनी श्रद्धांजलि

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गुरु दत्त की 101वीं जयंती: जैकी श्रॉफ ने ब्लैक-एंड-व्हाइट तस्वीरें शेयर कर दी भावभीनी श्रद्धांजलि

सारांश

जैकी श्रॉफ ने गुरु दत्त की 101वीं जयंती पर दुर्लभ ब्लैक-एंड-व्हाइट तस्वीरें साझा कीं। 9 जुलाई 1925 को जन्मे गुरु दत्त ने 'प्यासा' और 'कागज़ के फूल' जैसी कालजयी फिल्मों से हिंदी सिनेमा को एक नई भाषा दी, जो आज भी उतनी ही प्रासंगिक है।

मुख्य बातें

जैकी श्रॉफ ने 9 जुलाई 2026 को गुरु दत्त की 101वीं जयंती पर सोशल मीडिया पर ब्लैक-एंड-व्हाइट तस्वीरों का कोलाज साझा किया।
गुरु दत्त का जन्म 9 जुलाई 1925 को वसंत कुमार शिवशंकर पादुकोण के रूप में हुआ था।
उन्होंने 1951 में 'बाजी' से निर्देशन शुरू किया; 'प्यासा' और 'कागज़ के फूल' आज भारतीय सिनेमा की सर्वश्रेष्ठ फिल्मों में गिनी जाती हैं।
उनके गीतों को एस.डी.
नय्यर और रवि ने संगीतबद्ध किया; मोहम्मद रफ़ी और गीता दत्त ने गाया।
मात्र 39 वर्ष की आयु में 10 अक्टूबर 1964 को उनका असमय निधन हो गया।

बॉलीवुड अभिनेता जैकी श्रॉफ ने 9 जुलाई 2026 को भारतीय सिनेमा के अमर फिल्मकार और अभिनेता गुरु दत्त की 101वीं जयंती पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। श्रॉफ ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर गुरु दत्त की दुर्लभ ब्लैक-एंड-व्हाइट तस्वीरों का एक कोलाज साझा किया, जो हिंदी सिनेमा के इस महान स्तंभ को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ले आया।

जैकी श्रॉफ की श्रद्धांजलि

जैकी श्रॉफ ने अपनी पोस्ट में लिखा, 'गुरु दत्त जी को उनकी जयंती पर याद करते हुए' — साथ में हाथ जोड़ने वाला इमोजी और हैशटैग 'गुरुदत्त' भी था। यह पोस्ट फिल्म जगत और आम दर्शकों के बीच तेज़ी से वायरल हुई। गुरु दत्त की कालजयी विरासत आज भी सिनेप्रेमियों के दिलों में जीवित है।

गुरु दत्त: एक परिचय

गुरु दत्त का जन्म 9 जुलाई 1925 को वसंत कुमार शिवशंकर पादुकोण के रूप में हुआ था। उन्होंने 1951 में फिल्म 'बाजी' से बतौर निर्देशक अपना करियर शुरू किया। इसके बाद उन्होंने हिंदी सिनेमा को एक से बढ़कर एक कालजयी फिल्में दीं — 'आर-पार', 'मिस्टर एंड मिसेज '55', 'सीआईडी', 'प्यासा', 'कागज़ के फूल', 'चौदहवीं का चाँद' और 'साहिब बीबी और गुलाम' उनकी विरासत के स्वर्णिम अध्याय हैं।

वो फिल्में जो वक्त के साथ और चमकीं

गौरतलब है कि 'प्यासा' और 'कागज़ के फूल' अपने रिलीज़ के समय बड़ी व्यावसायिक सफलता नहीं पा सकीं, लेकिन कालांतर में इन्हें भारतीय सिनेमा की सर्वश्रेष्ठ कृतियों में गिना जाने लगा। यह ऐसे समय में आया जब हिंदी सिनेमा मुख्यतः मनोरंजन-केंद्रित था — गुरु दत्त ने उसमें काव्यात्मक यथार्थवाद की एक नई धारा प्रवाहित की।

संगीत की अमर विरासत

गुरु दत्त की फिल्मों ने हिंदी सिनेमा को कुछ सबसे यादगार गीत दिए — 'जाने वो कैसे लोग थे', 'ये दुनिया अगर मिल भी जाए', 'वक्त ने किया क्या हसीन सितम', 'चौदहवीं का चाँद हो' और 'बाबूजी धीरे चलना'। इन रचनाओं को एस.डी. बर्मन, ओ.पी. नय्यर और रवि जैसे संगीत उस्तादों ने संगीतबद्ध किया था, जबकि मोहम्मद रफ़ी, गीता दत्त और हेमंत कुमार की आवाज़ों ने इन्हें अमर बना दिया।

निजी जीवन और असमय विदाई

गुरु दत्त ने 1953 में प्रसिद्ध पार्श्वगायिका गीता दत्त से विवाह किया और दोनों के तीन बच्चे हुए। खबरों के मुताबिक बाद के वर्षों में उनके वैवाहिक जीवन में उतार-चढ़ाव आए, जबकि अभिनेत्री वहीदा रहमान के साथ उनका करीबी पेशेवर रिश्ता हिंदी सिनेमा के इतिहास में सर्वाधिक चर्चित रहा। मात्र 39 वर्ष की आयु में 10 अक्टूबर 1964 को गुरु दत्त का निधन हो गया — कथित तौर पर शराब और नींद की गोलियों के मिश्रित प्रभाव से। भारतीय सिनेमा ने एक ऐसे कलाकार को खो दिया जो अभी और ऊँचाइयाँ छू सकता था।

संपादकीय दृष्टिकोण

गुरु दत्त की काव्यात्मक, अंतर्मुखी फिल्मसाज़ी एक ज़रूरी आईना है। जैकी श्रॉफ जैसे समकालीन कलाकारों का यह स्मरण इस विरासत को नई पीढ़ी तक पहुँचाने की एक सार्थक कोशिश है।
RashtraPress
9 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुरु दत्त की 101वीं जयंती कब है?
गुरु दत्त की 101वीं जयंती 9 जुलाई 2026 को मनाई गई। उनका जन्म 9 जुलाई 1925 को हुआ था और उनका असली नाम वसंत कुमार शिवशंकर पादुकोण था।
जैकी श्रॉफ ने गुरु दत्त को कैसे याद किया?
जैकी श्रॉफ ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर गुरु दत्त की ब्लैक-एंड-व्हाइट तस्वीरों का एक कोलाज साझा किया और लिखा 'गुरु दत्त जी को उनकी जयंती पर याद करते हुए।'
गुरु दत्त की सबसे प्रसिद्ध फिल्में कौन सी हैं?
गुरु दत्त की सबसे प्रसिद्ध फिल्मों में 'प्यासा', 'कागज़ के फूल', 'साहिब बीबी और गुलाम', 'चौदहवीं का चाँद', 'आर-पार' और 'मिस्टर एंड मिसेज '55' शामिल हैं। 'प्यासा' और 'कागज़ के फूल' रिलीज़ के समय व्यावसायिक रूप से सफल नहीं रहीं, लेकिन बाद में भारतीय सिनेमा की सर्वश्रेष्ठ कृतियों में गिनी जाने लगीं।
गुरु दत्त का निधन कब और कैसे हुआ?
गुरु दत्त का निधन 10 अक्टूबर 1964 को मात्र 39 वर्ष की आयु में हुआ। कथित तौर पर उनकी मृत्यु शराब और नींद की गोलियों के मिश्रित प्रभाव से हुई मानी जाती है।
गुरु दत्त की फिल्मों के गाने किसने गाए और संगीत किसने दिया?
गुरु दत्त की फिल्मों का संगीत एस.डी. बर्मन, ओ.पी. नय्यर और रवि जैसे उस्तादों ने तैयार किया था। इन गीतों को मोहम्मद रफ़ी, गीता दत्त और हेमंत कुमार जैसे दिग्गज गायकों ने अपनी आवाज़ दी।
राष्ट्र प्रेस
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