30 जून 2026
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भारत के 2,100+ जीसीसी केंद्र नवाचार-आधारित विकास की अगली लहर को दे सकते हैं गति: नीति आयोग

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भारत के 2,100+ जीसीसी केंद्र नवाचार-आधारित विकास की अगली लहर को दे सकते हैं गति: नीति आयोग

सारांश

भारत के 2,100 से अधिक GCC केंद्र और 100 अरब डॉलर का राजस्व — लेकिन असली सवाल यह है कि क्या यह ताकत देश के स्टार्टअप्स और युवा इनोवेटर्स तक पहुँच पाएगी? बेंगलुरु कॉन्क्लेव में नीति आयोग ने इसी जुड़ाव को 'विकसित भारत 2047' की अगली बड़ी छलांग बताया।

मुख्य बातें

नीति आयोग AIM के निदेशक दीपक बागला ने 30 जून 2026 को बेंगलुरु में GCC कॉन्क्लेव को संबोधित किया।
भारत में 2,100 से अधिक GCC केंद्र कार्यरत हैं, जो लगभग 100 अरब डॉलर का राजस्व उत्पन्न करते हैं।
अटल इनोवेशन मिशन ने 10,000+ अटल टिंकरिंग लैब्स और 100+ इनक्यूबेटर्स के ज़रिए युवा उद्यमियों को तैयार किया है।
STPI और AIM की साझेदारी GCC को देशभर के स्टार्टअप्स व नवोन्मेषकों से जोड़ने का माध्यम बनेगी।
Intel, IBM, NVIDIA, Amazon सहित 16 से अधिक वैश्विक प्रौद्योगिकी कंपनियों के प्रतिनिधियों ने कॉन्क्लेव में भाग लिया।
बेंगलुरु को भारत के सबसे बड़े GCC हब के रूप में रेखांकित किया गया।

नीति आयोग के अटल इनोवेशन मिशन (AIM) के निदेशक दीपक बागला ने 30 जून 2026 को बेंगलुरु में आयोजित जीसीसी कॉन्क्लेव — इनोवेशन 2026 को संबोधित करते हुए कहा कि भारत का ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) इकोसिस्टम स्टार्टअप्स, इनक्यूबेटर्स और युवा इनोवेटर्स के साथ मिलकर देश में नवाचार-आधारित विकास की अगली लहर को आगे बढ़ाने की ठोस क्षमता रखता है। यह कॉन्क्लेव अटल इनोवेशन मिशन, नीति आयोग और सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया (STPI) की साझा पहल के रूप में आयोजित किया गया।

मुख्य घटनाक्रम

बागला ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बार-बार इस बात पर ज़ोर देते रहे हैं कि 'जय अनुसंधान' को विकसित भारत की प्रेरक शक्ति बनना चाहिए। उन्होंने बताया कि पिछले एक दशक में अटल इनोवेशन मिशन ने देशभर में 10,000 से अधिक अटल टिंकरिंग लैब्स के ज़रिए युवा इनोवेटर्स को तैयार किया है और 100 से अधिक इनक्यूबेटर्स के माध्यम से स्टार्टअप्स व ज़मीनी स्तर के उद्यमियों को सहयोग दिया है।

बागला ने यह भी रेखांकित किया कि जीसीसी ने भारत को प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और प्रोडक्ट इनोवेशन का वैश्विक केंद्र बना दिया है। उनके अनुसार, यदि इन क्षमताओं को स्टार्टअप्स और नवाचार इकोसिस्टम से जोड़ा जाए, तो प्रतिभाओं को बेहतर अवसर मिलेंगे, उद्यमिता को बढ़ावा मिलेगा, नई तकनीकों को तेज़ी से अपनाया जा सकेगा और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी कंपनियाँ उभरेंगी — जो 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य में निर्णायक भूमिका निभाएंगी।

जीसीसी इकोसिस्टम की ताकत

STPI के महानिदेशक अरविंद कुमार ने बताया कि भारत में फिलहाल 2,100 से अधिक GCC केंद्र कार्यरत हैं, जो मिलकर लगभग 100 अरब डॉलर का राजस्व उत्पन्न करते हैं — और यह देश की बढ़ती तकनीकी क्षमता का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि वर्ष 1991 से STPI ने भारत में तकनीकी और नीतिगत बुनियादी ढाँचे को सुदृढ़ करने में अहम भूमिका निभाई है।

कुमार का मानना है कि AIM के साथ यह साझेदारी GCC को देशभर के स्टार्टअप्स और नवोन्मेषकों से जोड़ने में कारगर सिद्ध होगी। गौरतलब है कि यह सहयोग ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक तकनीकी आपूर्ति श्रृंखला में अपनी स्थिति को और मज़बूत करने की कोशिश कर रहा है।

बेंगलुरु की केंद्रीय भूमिका

STPI बेंगलुरु के निदेशक डॉ. संजय त्यागी ने कहा कि बेंगलुरु भारत का सबसे बड़ा GCC हब बनकर उभरा है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि यदि स्टार्टअप्स, इनक्यूबेटर्स और GCC के बीच सहयोग और गहरा किया जाए, तो तकनीकों के व्यावसायीकरण और उद्यमिता को नई गति मिलेगी।

उद्योग जगत की भागीदारी

इस कॉन्क्लेव में Intel, IBM, Bosch, Amazon, SAP, Thermo Fisher Scientific, CGI, Shell, Mercedes-Benz, Philips, Morgan Stanley, NVIDIA, Samsung, SanDisk, Wipro और Yahoo जैसी प्रमुख वैश्विक प्रौद्योगिकी कंपनियों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इसके अलावा अटल टिंकरिंग लैब्स (ATL), अटल इनक्यूबेशन सेंटर्स (AIC), अटल कम्युनिटी इनोवेशन सेंटर्स (ACIC), STPI सेंटर्स ऑफ एंटरप्रेन्योरशिप, कर्नाटक डिजिटल इकोनॉमी मिशन (KDEM) और अन्य नवाचार संस्थाओं के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।

आगे की राह

यह कॉन्क्लेव भारत के GCC और स्टार्टअप इकोसिस्टम के बीच संरचनात्मक सहयोग की नींव रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में इस साझेदारी के ज़रिए तकनीकी नवाचार को व्यावसायिक सफलता में बदलने के ठोस प्रयास देखने को मिल सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

100 से अधिक केंद्रों के साथ भारत का GCC इकोसिस्टम कागज़ पर प्रभावशाली दिखता है, लेकिन असली चुनौती इस ताकत को ज़मीनी स्टार्टअप्स और टिंकरिंग लैब्स के युवा इनोवेटर्स तक पहुँचाने की है। अब तक GCC और घरेलू इनोवेशन इकोसिस्टम काफी हद तक समानांतर पटरियों पर चलते रहे हैं — एक वैश्विक कॉर्पोरेट ज़रूरतों की पूर्ति करता है, दूसरा स्थानीय उद्यमिता को पोषित करता है। इस कॉन्क्लेव की घोषणाएँ नीयत की दृष्टि से सही दिशा में हैं, परंतु जब तक GCC-स्टार्टअप सहयोग के लिए मापनीय और बाध्यकारी ढाँचा नहीं बनता, यह जुड़ाव संस्थागत इच्छाशक्ति से आगे नहीं बढ़ पाएगा।
RashtraPress
30 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत का GCC इकोसिस्टम क्या है और यह कितना बड़ा है?
भारत में फिलहाल 2,100 से अधिक ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) कार्यरत हैं, जो मिलकर लगभग 100 अरब डॉलर का राजस्व उत्पन्न करते हैं। ये केंद्र बहुराष्ट्रीय कंपनियों की प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और प्रोडक्ट इनोवेशन आवश्यकताओं की पूर्ति करते हैं।
जीसीसी कॉन्क्लेव — इनोवेशन 2026 का उद्देश्य क्या था?
यह कॉन्क्लेव 30 जून 2026 को बेंगलुरु में AIM (नीति आयोग) और STPI की साझेदारी में आयोजित हुआ। इसका मुख्य उद्देश्य GCC को भारत के स्टार्टअप्स, इनक्यूबेटर्स और युवा इनोवेटर्स से जोड़कर नवाचार-आधारित विकास को गति देना था।
अटल इनोवेशन मिशन ने अब तक क्या हासिल किया है?
अटल इनोवेशन मिशन ने पिछले एक दशक में देशभर में 10,000 से अधिक अटल टिंकरिंग लैब्स स्थापित की हैं और 100 से अधिक इनक्यूबेटर्स के ज़रिए स्टार्टअप्स व ज़मीनी इनोवेटर्स को सहयोग दिया है। यह मिशन 'जय अनुसंधान' की सोच को व्यावहारिक रूप देने का प्रयास है।
GCC और स्टार्टअप्स के बीच सहयोग से क्या फायदे होंगे?
AIM निदेशक दीपक बागला के अनुसार, इस सहयोग से प्रतिभाओं को बेहतर अवसर मिलेंगे, उद्यमिता को बढ़ावा मिलेगा, नई तकनीकों को तेज़ी से अपनाया जा सकेगा और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी कंपनियाँ उभरेंगी। यह सब मिलकर 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य में योगदान देगा।
बेंगलुरु को GCC हब के रूप में क्यों चुना गया?
STPI बेंगलुरु के निदेशक डॉ. संजय त्यागी के अनुसार, बेंगलुरु भारत का सबसे बड़ा GCC हब बन चुका है। शहर की स्थापित तकनीकी प्रतिभा, मज़बूत इनक्यूबेशन नेटवर्क और वैश्विक कंपनियों की उपस्थिति इसे स्टार्टअप्स और GCC के बीच सहयोग के लिए आदर्श केंद्र बनाती है।
राष्ट्र प्रेस
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