जीसीसी क्षेत्र में 2031 तक 11.8 लाख नौकरियाँ और 1,380 नए केंद्र स्थापित करने का लक्ष्य, राज्यों में निवेश की होड़
सारांश
मुख्य बातें
भारत के विभिन्न राज्य वर्ष 2031 तक 11.8 लाख रोज़गार अवसर सृजित करने और लगभग 1,380 नए ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी) स्थापित करने के महत्वाकांक्षी लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रहे हैं। रियल एस्टेट कंसल्टेंसी फर्म सीबीआरई साउथ एशिया की एक ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, राज्यों द्वारा तैयार की गई समर्पित जीसीसी नीतियाँ इस क्षेत्र की तीव्र वृद्धि की बुनियाद बन रही हैं।
जीसीसी की बढ़ती ऑफिस उपस्थिति
रिपोर्ट के आँकड़ों के अनुसार, 2022 से 2026 की पहली छमाही तक जीसीसी ने भारत के शीर्ष नौ शहरों में 12.3 करोड़ वर्गफुट से अधिक कार्यालय क्षेत्र लीज़ पर लिया। यह आँकड़ा स्पष्ट करता है कि वैश्विक कंपनियाँ भारत को बैक-ऑफिस, रिसर्च, प्रौद्योगिकी और व्यावसायिक संचालन केंद्र स्थापित करने के लिए प्राथमिकता दे रही हैं।
कुल ऑफिस लीज़िंग में जीसीसी की हिस्सेदारी भी उल्लेखनीय रूप से बढ़ी है — 2022 में यह 29 प्रतिशत थी, जो 2026 की पहली छमाही तक बढ़कर 43 प्रतिशत पर पहुँच गई। यह संकेत देता है कि देश के वाणिज्यिक रियल एस्टेट बाज़ार में जीसीसी की भूमिका तेज़ी से केंद्रीय होती जा रही है।
किन राज्यों ने उठाया कदम
कर्नाटक, महाराष्ट्र, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश और आंध्र प्रदेश ने जीसीसी निवेश आकर्षित करने के लिए विशेष नीतियाँ लागू की हैं। तेलंगाना, दिल्ली और तमिलनाडु ने भी प्रोत्साहन योजनाएँ और नीति ढाँचे तैयार किए हैं। केरल उन राज्यों में शामिल है जिसने जीसीसी नीति का मसौदा तैयार कर लिया है और इस दिशा में सक्रिय रूप से आगे बढ़ रहा है।
सेक्टरवार योगदान
आँकड़ों के अनुसार, प्रौद्योगिकी, बैंकिंग-फाइनेंशियल सर्विसेज़ एंड इंश्योरेंस (बीएफएसआई) तथा इंजीनियरिंग एवं विनिर्माण क्षेत्रों ने कुल लीज़िंग गतिविधियों में 60 प्रतिशत से अधिक योगदान दिया। इनमें टेक्नोलॉजी की हिस्सेदारी 23 प्रतिशत, बीएफएसआई की 22 प्रतिशत और इंजीनियरिंग एवं मैन्युफैक्चरिंग की 16 प्रतिशत रही।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
सीबीआरई इंडिया, दक्षिण-पूर्व एशिया, मध्य पूर्व एवं अफ्रीका के चेयरमैन एवं सीईओ अंशुमन मैगज़ीन ने कहा कि राज्य सरकारों द्वारा जीसीसी के लिए समर्पित नीतियाँ इतनी तेज़ी से अपनाना भारत के वाणिज्यिक रियल एस्टेट क्षेत्र में अभूतपूर्व बदलाव है। उन्होंने कहा कि 'अब जीसीसी केवल सेवा क्षेत्र का एक हिस्सा नहीं रह गए हैं, बल्कि राज्यों की आर्थिक रणनीति का महत्वपूर्ण स्तंभ बन चुके हैं।'
सीबीआरई के मैनेजिंग डायरेक्टर, लीज़िंग सर्विसेज़, राम चंदनानी ने कहा कि राज्यों की नीतियाँ अब ज़मीनी स्तर पर वास्तविक माँग में बदलती दिखाई दे रही हैं। उनके अनुसार, पूंजीगत व्यय सहायता, पेरोल प्रोत्साहन और तेज़ नियामकीय मंज़ूरी जैसी सुविधाओं का सीधा असर ऑफिस स्पेस की माँग और लीज़िंग गतिविधियों पर दिखाई दे रहा है।
आगे की राह
गौरतलब है कि यह प्रतिस्पर्धा अब केवल प्रोत्साहन पैकेजों तक सीमित नहीं रही — बेहतर बुनियादी ढाँचा, कुशल मानव संसाधन और परियोजनाओं के त्वरित क्रियान्वयन की क्षमता भी निर्णायक भूमिका निभा रही है। यही कारण है कि स्थापित महानगरों के साथ-साथ उभरते शहर भी जीसीसी निवेश के नए केंद्र बनते जा रहे हैं, और यह रुझान आने वाले वर्षों में और तेज़ होने की संभावना है।