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भारत में GCC की ऑफिस स्पेस हिस्सेदारी 2027 तक 50% तक पहुँचने का अनुमान: Colliers रिपोर्ट

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भारत में GCC की ऑफिस स्पेस हिस्सेदारी 2027 तक 50% तक पहुँचने का अनुमान: Colliers रिपोर्ट

सारांश

Colliers की रिपोर्ट बताती है कि GCC अब भारत के ऑफिस बाज़ार की रीढ़ बन चुके हैं — 2026 की पहली छमाही में ही 46% हिस्सेदारी। 2027 तक यह आँकड़ा 50% छू सकता है, और AI व R&D केंद्रों के रूप में इनकी भूमिका भारत को सस्ते श्रम से आगे, वैश्विक इनोवेशन हब की ओर ले जा रही है।

मुख्य बातें

Colliers India की रिपोर्ट के अनुसार 2026-27 में GCC की ग्रेड-ए ऑफिस स्पेस में हिस्सेदारी 45-50% तक पहुँचने का अनुमान है।
2026 की पहली छमाही में GCC ने 1.66 करोड़ वर्ग फुट लीज़ किया — कुल लीजिंग का 46% ।
2021 से अब तक सात शहरों में GCC लीजिंग 11.8 करोड़ वर्ग फुट , कुल मांग का 37% ।
बेंगलुरु और हैदराबाद की संयुक्त हिस्सेदारी 60% से अधिक ; चेन्नई, पुणे, मुंबई और दिल्ली-NCR में भी तेज़ी।
BFSI क्षेत्र की लीजिंग 2021-2025 में लगभग तीन गुना बढ़ी; इंजीनियरिंग व मैन्युफैक्चरिंग 2.5 गुना से अधिक ।
AI-नेटिव GCC और 'हब-प्लस-वन' रणनीति के तहत टियर-2 और टियर-3 शहरों में विस्तार अगला बड़ा चरण।

ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) भारत के ऑफिस रियल एस्टेट बाज़ार में तेज़ी से अपनी पकड़ मज़बूत कर रहे हैं — Colliers India की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, 2026 और 2027 तक देश में ग्रेड-ए ऑफिस स्पेस की कुल लीजिंग मांग में GCC की हिस्सेदारी 45 से 50 प्रतिशत तक पहुँचने का अनुमान है। इस दौरान सालाना लीजिंग 3.5 से 4 करोड़ वर्ग फुट के स्तर पर रह सकती है, जो भारत को वैश्विक इनोवेशन मानचित्र पर और अधिक प्रासंगिक बनाएगी।

मुख्य आँकड़े और मौजूदा स्थिति

2021 से अब तक GCC ने देश के सात प्रमुख शहरों में करीब 11.8 करोड़ वर्ग फुट ग्रेड-ए ऑफिस स्पेस लीज़ पर लिया है, जो इस पूरी अवधि की कुल ऑफिस स्पेस मांग का 37 प्रतिशत है। गौरतलब है कि केवल 2026 की पहली छमाही में ही GCC ने 1.66 करोड़ वर्ग फुट ग्रेड-ए स्पेस लीज़ किया, जो उस अवधि की कुल लीजिंग का 46 प्रतिशत था — यह आँकड़ा स्पष्ट संकेत देता है कि रफ़्तार तेज़ हो रही है।

GCC की बदलती भूमिका

रिपोर्ट में रेखांकित किया गया है कि भारत में GCC अब महज़ पारंपरिक बैक-ऑफिस संचालन तक सीमित नहीं रहे। ये केंद्र अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), इंजीनियरिंग, एनालिटिक्स, रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन के रणनीतिक केंद्र बन चुके हैं। यह बदलाव भारत की वैश्विक तकनीकी पारिस्थितिकी में भूमिका को गुणात्मक रूप से ऊपर उठा रहा है।

Colliers India के मैनेजिंग डायरेक्टर (ऑफिस सर्विसेज़) अर्पित मेहरोत्रा ने कहा, 'भारत ने प्रतिभा, लागत दक्षता, तकनीकी क्षमता, नीतिगत समर्थन और अनुकूल कारोबारी माहौल के दम पर GCC आधारित नवाचार के वैश्विक केंद्र के रूप में खुद को मज़बूती से स्थापित किया है।' उन्होंने यह भी कहा कि बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ भारत में अपने कैपेबिलिटी सेंटर का विस्तार जारी रखेंगी और AI-आधारित इनोवेशन ऑफिस स्पेस मांग का प्रमुख चालक बना रहेगा।

क्षेत्रवार विश्लेषण

क्षेत्रों की बात करें तो 2021 से अब तक GCC लीजिंग में टेक्नोलॉजी सेक्टर की हिस्सेदारी सर्वाधिक 39 प्रतिशत रही। हालाँकि, रिपोर्ट के अनुसार विविधीकरण तेज़ी से बढ़ रहा है। बैंकिंग, वित्तीय सेवाएँ और बीमा (BFSI) क्षेत्र की हिस्सेदारी 22 प्रतिशत रही, जबकि इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग का योगदान 16 प्रतिशत रहा। उल्लेखनीय है कि 2021 से 2025 के बीच BFSI क्षेत्र की लीजिंग लगभग तीन गुना बढ़ी, जबकि इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग की लीजिंग 2.5 गुना से अधिक बढ़ी।

प्रमुख शहर और उभरते बाज़ार

शहरों के लिहाज़ से बेंगलुरु और हैदराबाद GCC बाज़ार में सबसे आगे बने हुए हैं। 2021 से अब तक कुल लीजिंग में इन दोनों शहरों की संयुक्त हिस्सेदारी 60 प्रतिशत से अधिक रही है। यह ऐसे समय में आया है जब चेन्नई, पुणे, मुंबई और दिल्ली-NCR में भी बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ नए कैपेबिलिटी सेंटर स्थापित करने में बढ़ती रुचि दिखा रही हैं।

आगे क्या होगा

रिपोर्ट में कहा गया है कि AI-नेटिव GCC, नैनो और मिड-साइज़ GCC, तथा 'हब-प्लस-वन' रणनीति के तहत टियर-2 और टियर-3 शहरों तक परिचालन का विस्तार आने वाले वर्षों में GCC क्षेत्र की वृद्धि के अगले चरण को परिभाषित करेगा। आँकड़ों के अनुसार, भारत का GCC परिदृश्य अब केवल लागत-बचत के लिए नहीं, बल्कि वैश्विक नवाचार नेतृत्व के लिए भी चुना जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसमें एकाग्रता का जोखिम भी छिपा है — बेंगलुरु और हैदराबाद में 60% से अधिक लीजिंग यह सवाल उठाती है कि क्या बाकी शहर वास्तव में तैयार हैं या सिर्फ इच्छासूची में हैं। दूसरी बात, GCC का AI और R&D केंद्रों में रूपांतरण उत्साहजनक है, परंतु इसका लाभ मुख्यतः उच्च-कौशल प्रतिभा को मिलता है — व्यापक रोज़गार सृजन पर इसका प्रभाव सीमित रह सकता है। टियर-2 और टियर-3 शहरों तक विस्तार की बात वर्षों से होती रही है; असली परीक्षा यह होगी कि 'हब-प्लस-वन' रणनीति केवल कागज़ी घोषणा न बनकर ज़मीन पर उतरे।
RashtraPress
23 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत में GCC की ऑफिस स्पेस हिस्सेदारी 2027 तक कितनी होने का अनुमान है?
Colliers India की रिपोर्ट के अनुसार 2026 और 2027 में ग्रेड-ए ऑफिस स्पेस की कुल लीजिंग में GCC की हिस्सेदारी 45 से 50 प्रतिशत तक पहुँच सकती है। इस दौरान सालाना लीजिंग 3.5 से 4 करोड़ वर्ग फुट तक रहने का अनुमान है।
2021 से अब तक भारत में GCC ने कितना ऑफिस स्पेस लीज़ किया है?
2021 से अब तक GCC ने देश के सात प्रमुख शहरों में करीब 11.8 करोड़ वर्ग फुट ग्रेड-ए ऑफिस स्पेस लीज़ पर लिया है, जो इस अवधि की कुल ऑफिस मांग का 37 प्रतिशत है। केवल 2026 की पहली छमाही में ही 1.66 करोड़ वर्ग फुट लीज़ हुआ, जो उस अवधि का 46 प्रतिशत था।
GCC लीजिंग में कौन से शहर सबसे आगे हैं?
बेंगलुरु और हैदराबाद GCC लीजिंग में सबसे आगे हैं और 2021 से अब तक इन दोनों की संयुक्त हिस्सेदारी 60 प्रतिशत से अधिक रही है। अब चेन्नई, पुणे, मुंबई और दिल्ली-NCR में भी बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ नए कैपेबिलिटी सेंटर स्थापित करने में रुचि दिखा रही हैं।
भारत में GCC की भूमिका कैसे बदल रही है?
रिपोर्ट के अनुसार भारत में GCC अब केवल बैक-ऑफिस कार्यों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि AI, इंजीनियरिंग, एनालिटिक्स, R&D और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन के रणनीतिक केंद्र बन चुके हैं। यह बदलाव भारत को वैश्विक इनोवेशन हब के रूप में स्थापित कर रहा है।
GCC लीजिंग में किस सेक्टर की हिस्सेदारी सबसे अधिक है?
2021 से अब तक GCC लीजिंग में टेक्नोलॉजी सेक्टर की हिस्सेदारी सर्वाधिक 39 प्रतिशत रही है। इसके बाद BFSI 22 प्रतिशत और इंजीनियरिंग व मैन्युफैक्चरिंग 16 प्रतिशत पर हैं; BFSI की लीजिंग 2021-2025 के बीच लगभग तीन गुना बढ़ी है।
राष्ट्र प्रेस
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