भारत का ऑफिस स्पेस 901 मिलियन स्क्वायर फीट पार, 2026 की पहली छमाही में 6% की बढ़त
सारांश
मुख्य बातें
भारत के शीर्ष आठ शहरों में इस्तेमाल हो रहा कमर्शियल ऑफिस स्पेस 2026 की पहली छमाही (जनवरी-जून) में सालाना आधार पर 6 प्रतिशत बढ़कर 901.1 मिलियन स्क्वायर फीट हो गया, जो 2025 की पहली छमाही में 847 मिलियन स्क्वायर फीट था। नाइट फ्रैंक इंडिया की 26 अगस्त 2026 को जारी रिपोर्ट के अनुसार, देश का कुल ऑफिस स्टॉक 1.05 बिलियन स्क्वायर फीट दर्ज किया गया है।
मुख्य घटनाक्रम
रिपोर्ट के आँकड़े बताते हैं कि ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) के विस्तार और घरेलू कंपनियों की बढ़ती ज़रूरतों के चलते ऑफिस बाज़ार में माँग लगातार बनी हुई है। नाइट फ्रैंक इंडिया के इंटरनेशनल पार्टनर और सीनियर एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर विरल देसाई ने कहा, 'GCC के विस्तार और घरेलू कंपनियों के बढ़ते दायरे की वजह से ऑफिस की माँग बनी हुई है। कंपनियाँ ऐसे स्थापित बाज़ारों की ओर बढ़ रही हैं जहाँ उन्हें टैलेंट, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और बड़े पैमाने पर काम करने की सुविधा मिलती है।'
शहर-दर-शहर प्रदर्शन
बेंगलुरु देश के सबसे बड़े ऑफिस मार्केट के रूप में शीर्ष पर बना हुआ है। यहाँ इस्तेमाल हो रहा ऑफिस स्पेस 222.4 मिलियन स्क्वायर फीट तक पहुँच गया, जो सालाना आधार पर 8 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। दिल्ली-एनसीआर 178.1 मिलियन स्क्वायर फीट के साथ दूसरे स्थान पर है, जहाँ सालाना 2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
मुंबई में यह आँकड़ा 146.6 मिलियन स्क्वायर फीट रहा, जिसमें 5 प्रतिशत की सालाना बढ़त देखी गई। चेन्नई ने 6 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 88.9 मिलियन स्क्वायर फीट दर्ज किया। कोलकाता में यह आँकड़ा 24.4 मिलियन स्क्वायर फीट रहा, जहाँ 6 प्रतिशत की स्थिर बढ़ोतरी हुई।
पुणे और अहमदाबाद की तेज़ रफ़्तार
पुणे सबसे तेज़ी से उभरते बाज़ारों में शामिल हो गया है। रिपोर्ट के अनुसार, पुणे में सालाना 10 प्रतिशत की वृद्धि के साथ इस्तेमाल हो रहा ऑफिस स्पेस 98.8 मिलियन स्क्वायर फीट तक पहुँच गया और यह शहर जल्द ही 100 मिलियन स्क्वायर फीट का आँकड़ा पार करने की राह पर है। अहमदाबाद ने ट्रैक किए गए सभी शहरों में सर्वाधिक 9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की और यहाँ इस्तेमाल हो रहा ऑफिस स्पेस 27.5 मिलियन स्क्वायर फीट हो गया।
आम जनता और कारोबार पर असर
यह वृद्धि दर्शाती है कि भारत में कॉर्पोरेट विस्तार की गति धीमी नहीं पड़ी है। GCC सेक्टर की बढ़ती उपस्थिति से आईटी, बैंकिंग और पेशेवर सेवाओं में रोज़गार के नए अवसर बन रहे हैं। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर रियल एस्टेट बाज़ार दबाव में हैं, जो भारत के कमर्शियल रियल एस्टेट की मज़बूती को रेखांकित करता है।
क्या होगा आगे
विशेषज्ञों के अनुसार, पुणे और अहमदाबाद जैसे टियर-2 बाज़ारों में वृद्धि की रफ़्तार आने वाली तिमाहियों में भी जारी रहने की संभावना है। GCC विस्तार और 'वर्क फ्रॉम ऑफिस' नीतियों की वापसी ऑफिस स्पेस की माँग को और मज़बूत बनाए रखने के प्रमुख कारक बने रहेंगे।