26 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

जनरल अनिल चौहान के बयान पर इमरान मसूद का तंज: 'राजनीति में आना हो तो आ जाइए'

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
जनरल अनिल चौहान के बयान पर इमरान मसूद का तंज: 'राजनीति में आना हो तो आ जाइए'

सारांश

पूर्व सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने ऑपरेशन सिंदूर से पहले PM मोदी द्वारा सेना को 'पूर्ण परिचालन स्वतंत्रता' दिए जाने का दावा किया। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने इस पर तंज कसते हुए उन्हें राजनीति में आने का न्योता दे डाला — जनरल वी.के. सिंह की मिसाल देते हुए।

मुख्य बातें

पूर्व सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर से पहले PM मोदी ने सेना को 'कम्प्लीट फ्रीडम ऑफ एक्शन' दी थी।
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने जनरल चौहान पर तंज कसते हुए कहा — 'राजनीति में आने की इच्छा है तो आ जाइए।' मसूद ने पूर्व सेना प्रमुख जनरल वी.के.
सिंह के BJP में शामिल होने का उदाहरण दिया।
UP कैबिनेट के 60+ वर्ष की महिलाओं को मुफ्त बस यात्रा और 25 लाख टैबलेट योजना पर मसूद ने व्यावहारिकता पर सवाल उठाए।
मसूद ने कहा कि पिछले पाँच वर्षों में IIT के 70 छात्रों ने आत्महत्या की — शिक्षा संकट गंभीर है।
इलाहाबाद उच्च न्यायालय के हिजाब फैसले पर मसूद ने कहा — पहनावे को धर्म के चश्मे से न देखें।

कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने 26 अगस्त 2026 को पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल (सेवानिवृत्त) अनिल चौहान के उस बयान पर तीखा तंज कसा, जिसमें उन्होंने कहा था कि ऑपरेशन सिंदूर से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सशस्त्र बलों को 'पूर्ण परिचालन स्वतंत्रता' दी थी। मसूद ने कहा कि यदि पूर्व सीडीएस की राजनीति में आने की इच्छा है, तो वे स्वागत योग्य हैं।

जनरल चौहान का बयान और उसकी पृष्ठभूमि

नई दिल्ली स्थित विवेकानंद केंद्र में मंगलवार को आयोजित एक कार्यक्रम में जनरल चौहान ने खुलासा किया कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने सेना को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि कार्रवाई का समय सैन्य नेतृत्व तय करे। उनके अनुसार, प्रधानमंत्री ने कहा था कि कोई राजनीतिक दबाव नहीं है, लेकिन मिशन किसी भी — मानवीय या तकनीकी — कारण से विफल नहीं होना चाहिए और हर कार्रवाई के पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध होने चाहिए।

जनरल चौहान ने इसे 'कम्प्लीट फ्रीडम ऑफ एक्शन' की संज्ञा दी। यह बयान ऑपरेशन सिंदूर को लेकर जारी राजनीतिक बहस के बीच आया है, जिसमें विपक्ष सरकार से पारदर्शिता की माँग करता रहा है।

इमरान मसूद की प्रतिक्रिया

मसूद ने इस बयान को राजनीतिक प्रेरित बताते हुए कहा, 'मोदी जी की तारीफ करते रहिए। पहले भी पूर्व सेना प्रमुख जनरल वी.के. सिंह राजनीति में आए थे। अगर आपकी भी राजनीति में आने की इच्छा है तो आइए, शामिल हो जाइए।' उन्होंने यह टिप्पणी जनरल वी.के. सिंह के उदाहरण से जोड़ी, जो सेवानिवृत्ति के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हुए थे।

उत्तर प्रदेश चुनाव और विचारधारा की लड़ाई

समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष अखिलेश यादव के इस बयान — कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में मुख्य मुकाबला सपा और BJP के बीच होगा — पर मसूद ने कहा कि असल संघर्ष दो विचारधाराओं के बीच है। उन्होंने कहा, 'एक विचारधारा का नेतृत्व राहुल गांधी कर रहे हैं और दूसरी का पीएम नरेंद्र मोदी। यह देश में बदलाव की लड़ाई है। इस लड़ाई में कुछ सहयोगी इधर होंगे, कुछ उधर, लेकिन नेतृत्व राहुल गांधी के हाथ में है।'

उत्तर प्रदेश सरकार की नीतियों पर सवाल

उत्तर प्रदेश कैबिनेट के उस फैसले पर — जिसमें 60 वर्ष और उससे अधिक आयु की महिलाओं को आजीवन मुफ्त बस यात्रा देने की घोषणा की गई — मसूद ने व्यावहारिकता पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस उम्र में महिलाएं कितना सफर कर पाएंगी। युवाओं के लिए 25 लाख टैबलेट खरीदने की योजना को भी उन्होंने अपर्याप्त बताया।

उन्होंने शिक्षा संकट का हवाला देते हुए कहा, 'पिछले पाँच वर्षों में IIT जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के 70 छात्रों ने आत्महत्या की है। जब देश के सबसे मेधावी छात्र ऐसा कदम उठा रहे हैं, तो हालात की गंभीरता समझी जा सकती है।' मसूद ने सरकार पर स्थायी नौकरियों के बजाय संविदा आधारित रोजगार को बढ़ावा देने का आरोप भी लगाया, यह तर्क देते हुए कि स्थायी नियुक्तियों में आरक्षण लागू करना पड़ता है।

हिजाब और पोशाक विवाद पर मसूद का रुख

इलाहाबाद उच्च न्यायालय के उस फैसले पर — जिसमें कहा गया कि हिजाब स्कूल यूनिफॉर्म का हिस्सा नहीं है — मसूद ने कहा कि पहनावे को धार्मिक नज़रिए से नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा, 'सिर ढकना हमारी संस्कृति का हिस्सा है। यह व्यक्ति का निजी फैसला है।' BJP सांसद कंगना रनौत द्वारा अभिनेत्री कृति सेनन के रक्षाबंधन विज्ञापन की आलोचना पर मसूद ने कटाक्ष करते हुए कहा कि कंगना को पहले अपने पहनावे पर ध्यान देना चाहिए।

यह ऐसे समय में आया है जब विपक्ष ऑपरेशन सिंदूर, रोजगार नीति और न्यायपालिका के फैसलों को लेकर सत्तापक्ष पर लगातार दबाव बना रहा है। आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश चुनाव की तैयारियों के साथ इस राजनीतिक बहस के और तीखे होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसका समय और मंच — एक सार्वजनिक कार्यक्रम, चुनावी माहौल में — इसे स्वाभाविक रूप से राजनीतिक रंग देता है। सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारियों का सत्तारूढ़ दल के पक्ष में बयान देना कोई नई परिघटना नहीं है, लेकिन यह सेना की संस्थागत तटस्थता के बारे में गंभीर सवाल खड़े करता है। विपक्ष का तंज सतही लग सकता है, पर असली मुद्दा यह है कि ऑपरेशन सिंदूर जैसी संवेदनशील सैन्य कार्रवाई के ब्यौरे किस हद तक और किस मंच पर सार्वजनिक होने चाहिए — यह प्रश्न अभी भी अनुत्तरित है।
RashtraPress
26 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जनरल अनिल चौहान ने ऑपरेशन सिंदूर के बारे में क्या कहा?
जनरल चौहान ने नई दिल्ली के विवेकानंद केंद्र में कहा कि पहलगाम हमले के बाद PM मोदी ने सशस्त्र बलों को पूरी परिचालन स्वतंत्रता दी थी और कार्रवाई का समय सैन्य नेतृत्व पर छोड़ा था। उन्होंने यह भी बताया कि PM ने मिशन की सफलता और पर्याप्त साक्ष्य सुनिश्चित करने पर जोर दिया था।
इमरान मसूद ने जनरल चौहान पर तंज क्यों कसा?
मसूद का कहना है कि एक सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी का सत्तारूढ़ प्रधानमंत्री की प्रशंसा करना राजनीतिक प्रेरणा का संकेत है। उन्होंने पूर्व सेना प्रमुख जनरल वी.के. सिंह का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि इच्छा है तो वे सीधे राजनीति में आ सकते हैं।
उत्तर प्रदेश चुनाव को लेकर मसूद का क्या कहना है?
मसूद ने कहा कि यूपी चुनाव केवल पार्टियों की नहीं, बल्कि दो विचारधाराओं की लड़ाई है — एक का नेतृत्व राहुल गांधी कर रहे हैं और दूसरे का PM मोदी। उन्होंने स्पष्ट किया कि गठबंधन में सहयोगी अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन विपक्ष की बागडोर राहुल गांधी के हाथ में है।
IIT छात्रों की आत्महत्या पर मसूद ने क्या कहा?
मसूद ने कहा कि पिछले पाँच वर्षों में IIT जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के 70 छात्रों ने आत्महत्या की है, जो शिक्षा क्षेत्र में गहरे संकट का संकेत है। उन्होंने तर्क दिया कि टैबलेट बाँटने जैसे प्रलोभन छात्रों की मूल समस्याओं का समाधान नहीं हैं।
हिजाब विवाद पर इमरान मसूद का क्या रुख है?
इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले — कि हिजाब स्कूल यूनिफॉर्म का हिस्सा नहीं है — पर मसूद ने कहा कि सिर ढकना भारतीय संस्कृति का हिस्सा है और इसे धर्म के नज़रिए से नहीं देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार यह व्यक्ति का निजी निर्णय है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 महीने पहले
  2. 8 महीने पहले
  3. 8 महीने पहले
  4. 8 महीने पहले
  5. 10 महीने पहले
  6. 11 महीने पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले