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एलएनजी आयात बिल 24% उछला, अप्रैल-जुलाई में 5.6 अरब डॉलर; पश्चिम एशिया संकट से बढ़ी ऊर्जा लागत

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एलएनजी आयात बिल 24% उछला, अप्रैल-जुलाई में 5.6 अरब डॉलर; पश्चिम एशिया संकट से बढ़ी ऊर्जा लागत

सारांश

पश्चिम एशिया संकट ने भारत की ऊर्जा खरीद को महँगा और जटिल दोनों बना दिया है। अप्रैल-जुलाई में एलएनजी बिल 24% उछलकर 5.6 अरब डॉलर पहुँचा, अमेरिका 73% एलपीजी हिस्सेदारी के साथ नया प्रमुख आपूर्तिकर्ता बन गया, और आयात स्रोत 6 से 15 देशों तक फैल गए।

मुख्य बातें

भारत का एलएनजी आयात बिल अप्रैल-जुलाई 2026 में 24% बढ़कर 5.6 अरब डॉलर हो गया, जो पिछले वर्ष 4.5 अरब डॉलर था।
जुलाई 2026 में मासिक एलएनजी आयात 1.2 अरब डॉलर रहा; आयात मात्रा 2,915 मिलियन मानक घन मीटर तक पहुँची।
अमेरिका जुलाई-अगस्त में भारत के कुल एलपीजी आयात में 73% से अधिक हिस्सेदारी के साथ शीर्ष आपूर्तिकर्ता बना।
UAE से एलपीजी आयात घटकर 1.4 लाख टन ; सऊदी अरब ने जुलाई-अगस्त में कोई एलपीजी आपूर्ति नहीं की।
एलएनजी आयात स्रोत 6 देशों से बढ़कर 15 देशों ; कच्चे तेल के स्रोत 27 से 41 देशों तक विस्तारित।
लंबी शिपिंग दूरी के कारण समुद्री परिवहन लागत में भी तेज़ वृद्धि दर्ज की गई।

पश्चिम एशिया में गहराते भू-राजनीतिक तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ते दबाव के बीच भारत का तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) आयात बिल चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-जुलाई अवधि में 24 प्रतिशत की तीव्र वृद्धि के साथ 5.6 अरब डॉलर पर पहुँच गया। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह आँकड़ा 4.5 अरब डॉलर था — यानी एक वर्ष में 1.1 अरब डॉलर की अतिरिक्त ऊर्जा लागत।

मासिक आंकड़े और मात्रा में बदलाव

जुलाई 2026 में भारत का एलएनजी आयात 1.2 अरब डॉलर रहा, जो जुलाई 2025 के 1.1 अरब डॉलर की तुलना में 9.1 प्रतिशत अधिक है। आयात की भौतिक मात्रा भी बढ़कर 2,915 मिलियन मानक घन मीटर हो गई, जबकि एक वर्ष पूर्व यह 2,872 मिलियन मानक घन मीटर थी। यह वृद्धि दर्शाती है कि महँगे दामों के बावजूद भारत की गैस माँग कम नहीं हुई।

अमेरिका बना प्रमुख एलपीजी आपूर्तिकर्ता

खाड़ी देशों से आपूर्ति बाधित होने के बाद भारत ने अमेरिका से एलएनजी और एलपीजी खरीद में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की है। केप्लर के आंकड़ों के अनुसार, अगस्त 2026 में भारत ने अमेरिका से लगभग 6.2 लाख टन एलपीजी आयात की, जबकि जुलाई में यह मात्रा 8.9 लाख टन थी। जुलाई-अगस्त के दौरान भारत के कुल एलपीजी आयात में अमेरिकी हिस्सेदारी 73 प्रतिशत से अधिक रही।

गौरतलब है कि जुलाई में अमेरिका से आयातित एलपीजी की मात्रा लगभग उस रिकॉर्ड स्तर के बराबर रही, जो अक्टूबर 2025 में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से आयात के दौरान दर्ज की गई थी। लंबे समय तक भारत का प्रमुख एलपीजी आपूर्तिकर्ता रहे UAE से अगस्त में आयात घटकर मात्र 1.4 लाख टन रह गया। इसी अवधि में कतर ने लगभग 60,000 टन एलपीजी की आपूर्ति की, जबकि सऊदी अरब ने जुलाई और अगस्त दोनों महीनों में भारत को कोई एलपीजी आपूर्ति नहीं की।

आयात स्रोतों का व्यापक विविधीकरण

ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भारत ने आयात स्रोतों में व्यापक विविधीकरण किया है। एलएनजी के मामले में जहाँ पहले केवल 6 देशों से आयात होता था, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 15 देशों तक पहुँच गई है। कच्चे तेल के स्रोत भी 27 देशों से बढ़कर 41 देशों तक हो गए हैं। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया कि इस रणनीति से किसी एक देश, क्षेत्र या परिवहन मार्ग पर निर्भरता घटी है और वैश्विक बाज़ार के उतार-चढ़ाव से निपटने की क्षमता बेहतर हुई है।

समुद्री परिवहन लागत भी बढ़ी

अधिकारियों के अनुसार, पश्चिम एशिया संकट के कारण केवल ऊर्जा कीमतें ही नहीं बढ़ी हैं, बल्कि समुद्री परिवहन लागत में भी तेज़ वृद्धि हुई है। अमेरिका जैसे दूरस्थ स्रोतों से ऊर्जा कार्गो लाने पर लंबी शिपिंग दूरी तय करनी पड़ती है, जिससे कुल आयात व्यय और अधिक बढ़ गया है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी ऊर्जा माँग को पूरा करने के लिए घरेलू गैस उत्पादन बढ़ाने की कोशिशों में भी लगा है। आने वाले महीनों में पश्चिम एशिया की स्थिति और वैश्विक एलएनजी बाज़ार का रुख भारत के ऊर्जा आयात बिल की दिशा तय करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी कीमत चुकानी पड़ रही है: अमेरिका से लंबी दूरी की शिपिंग खाड़ी की सस्ती आपूर्ति की भरपाई नहीं कर पाती। असली सवाल यह है कि क्या यह बढ़ी हुई आयात लागत उपभोक्ताओं तक पहुँचेगी या सरकार सब्सिडी बोझ उठाती रहेगी — और कब तक। पश्चिम एशिया संकट ने एक बार फिर साबित किया है कि घरेलू गैस उत्पादन और नवीकरणीय ऊर्जा में निवेश की रफ़्तार अभी भी आयात-निर्भरता कम करने के लिए पर्याप्त नहीं है।
RashtraPress
26 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत का एलएनजी आयात बिल 2026 में कितना बढ़ा?
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल-जुलाई 2026 में भारत का एलएनजी आयात बिल 24 प्रतिशत बढ़कर 5.6 अरब डॉलर हो गया, जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में 4.5 अरब डॉलर था।
एलएनजी आयात बिल क्यों बढ़ा?
पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य पर दबाव से खाड़ी देशों की आपूर्ति प्रभावित हुई, जिससे भारत को दूरस्थ स्रोतों — विशेषकर अमेरिका — से महँगी खरीद करनी पड़ी। इसके अलावा लंबी शिपिंग दूरी के कारण समुद्री परिवहन लागत भी बढ़ी।
भारत को अब एलपीजी कहाँ से मिल रही है?
जुलाई-अगस्त 2026 में अमेरिका भारत का सबसे बड़ा एलपीजी आपूर्तिकर्ता बन गया, जिसकी हिस्सेदारी 73 प्रतिशत से अधिक रही। UAE से आयात घटकर 1.4 लाख टन रह गया और सऊदी अरब ने इन दोनों महीनों में कोई एलपीजी आपूर्ति नहीं की।
भारत ने ऊर्जा आयात स्रोत कितने बढ़ाए हैं?
एलएनजी आयात स्रोत पहले के 6 देशों से बढ़कर अब 15 देशों तक पहुँच गए हैं। कच्चे तेल के आयात स्रोत भी 27 से बढ़कर 41 देशों तक हो गए हैं, जो भारत की ऊर्जा सुरक्षा रणनीति का हिस्सा है।
जुलाई 2026 में भारत का मासिक एलएनजी आयात कितना रहा?
जुलाई 2026 में भारत का एलएनजी आयात 1.2 अरब डॉलर रहा, जो जुलाई 2025 के 1.1 अरब डॉलर से 9.1 प्रतिशत अधिक है। आयात की मात्रा 2,915 मिलियन मानक घन मीटर रही, जो एक वर्ष पहले 2,872 मिलियन मानक घन मीटर थी।
राष्ट्र प्रेस
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