जून में अमेरिका बना भारत का सबसे बड़ा एलपीजी आपूर्तिकर्ता, 7.73 लाख मीट्रिक टन आयात
सारांश
मुख्य बातें
भारत ने जून 2026 में अमेरिका से 7.73 लाख मीट्रिक टन (773.78 टीएमटी) द्रवीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) का आयात किया — जो मई की तुलना में 19.4 प्रतिशत अधिक है — और इस तरह अमेरिका लगातार दूसरे महीने भारत का सबसे बड़ा एलपीजी आपूर्तिकर्ता बना रहा। कमोडिटी एनालिटिक्स फर्म केप्लर के आंकड़ों के अनुसार, पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं की पृष्ठभूमि में भारत ने ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने की अपनी रणनीति तेज कर दी है, जिससे खाड़ी देशों पर पारंपरिक निर्भरता कम हो रही है।
मुख्य आंकड़े और आपूर्ति का स्वरूप
केप्लर के आंकड़ों के अनुसार, जून में भारत का कुल एलपीजी आयात 3 प्रतिशत बढ़कर 11.91 लाख मीट्रिक टन (1,191 टीएमटी) हो गया, जबकि मई में यह 11.55 लाख मीट्रिक टन (1,155 टीएमटी) था। इसमें अमेरिका की हिस्सेदारी सबसे बड़ी रही।
जून में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) भारत का दूसरा सबसे बड़ा एलपीजी आपूर्तिकर्ता रहा, जहाँ से आयात 16.6 प्रतिशत बढ़कर 1.57 लाख मीट्रिक टन पहुँचा, जो मई में 1.34 लाख मीट्रिक टन था। सऊदी अरब और कुवैत ने जून में प्रत्येक ने भारत को 64-64 हजार मीट्रिक टन एलपीजी की आपूर्ति की।
विविधीकरण की रणनीति और दीर्घकालिक समझौते
अमेरिका से एलपीजी आयात में यह बढ़ोतरी भारत की उस व्यापक ऊर्जा नीति का हिस्सा है, जो पश्चिम एशिया में हालिया संघर्ष के बाद और मजबूत हुई है। इसी दिशा में सरकारी तेल रिफाइनरियों ने 2026 से अमेरिका से 22 लाख टन एलपीजी आयात के लिए दीर्घकालिक समझौता किया है।
गौरतलब है कि पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने से पहले भारत के करीब 90 प्रतिशत एलपीजी आयात का मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर गुजरता था। आपूर्ति में आई बाधाओं के बाद भारतीय रिफाइनरियों ने आयात के स्रोतों का दायरा तेजी से बढ़ाना शुरू किया।
भारत अब केवल अमेरिका तक सीमित नहीं है — ओमान, अर्जेंटीना, नाइजीरिया, अल्जीरिया और मिस्र जैसे देशों से भी एलपीजी आयात बढ़ाया जा रहा है, ताकि किसी एक क्षेत्र पर अत्यधिक निर्भरता न रहे।
आपूर्ति की स्थिति और होर्मुज की भूमिका
उद्योग सूत्रों के अनुसार, भारत ने अगस्त तक के लिए कच्चे तेल और एलपीजी दोनों की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित कर ली है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के दोबारा खुलने के बाद खाड़ी देशों से ऊर्जा आपूर्ति सामान्य होने लगी है, जिससे घरेलू बाजार में उपलब्धता को लेकर बनी चिंताएँ काफी हद तक कम हो गई हैं।
विशेषज्ञों की राय और आगे की राह
विशेषज्ञों का मानना है कि क्षेत्रीय तनाव कम होने के बाद भी भारत ऊर्जा आयात विविधीकरण की नीति जारी रखेगा। खाड़ी देश आगे भी कच्चे तेल और एलपीजी के प्रमुख आपूर्तिकर्ता बने रहेंगे, लेकिन भारतीय रिफाइनरियाँ अब कई देशों से आयात का संतुलित मिश्रण बनाए रखेंगी। यह बदलाव भारत-अमेरिका ऊर्जा सहयोग को नई गहराई देने के साथ-साथ भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूत आधार प्रदान करता है।