3 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

जून में अमेरिका बना भारत का सबसे बड़ा एलपीजी आपूर्तिकर्ता, 7.73 लाख मीट्रिक टन आयात

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
जून में अमेरिका बना भारत का सबसे बड़ा एलपीजी आपूर्तिकर्ता, 7.73 लाख मीट्रिक टन आयात

सारांश

पश्चिम एशिया संकट ने भारत की ऊर्जा रणनीति को स्थायी रूप से बदल दिया है। जून में अमेरिका से 7.73 लाख मीट्रिक टन एलपीजी आयात और 2026 से 22 लाख टन के दीर्घकालिक समझौते के साथ, भारत होर्मुज-केंद्रित निर्भरता से बाहर निकलने की ठोस राह पर है।

मुख्य बातें

जून 2026 में भारत ने अमेरिका से 7.73 लाख मीट्रिक टन एलपीजी आयात किया — मई की तुलना में 19.4% अधिक।
भारत का कुल एलपीजी आयात जून में 3% बढ़कर 11.91 लाख मीट्रिक टन हुआ।
यूएई दूसरा सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता रहा — 1.57 लाख मीट्रिक टन ; सऊदी अरब और कुवैत ने 64-64 हजार मीट्रिक टन की आपूर्ति की।
सरकारी रिफाइनरियों ने 2026 से अमेरिका से 22 लाख टन एलपीजी के दीर्घकालिक आयात समझौते किए हैं।
संघर्ष से पहले भारत के 90% एलपीजी आयात का मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से था; अब स्रोत विविध हो रहे हैं।
ओमान, अर्जेंटीना, नाइजीरिया, अल्जीरिया और मिस्र से भी एलपीजी आयात बढ़ाया जा रहा है।

भारत ने जून 2026 में अमेरिका से 7.73 लाख मीट्रिक टन (773.78 टीएमटी) द्रवीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) का आयात किया — जो मई की तुलना में 19.4 प्रतिशत अधिक है — और इस तरह अमेरिका लगातार दूसरे महीने भारत का सबसे बड़ा एलपीजी आपूर्तिकर्ता बना रहा। कमोडिटी एनालिटिक्स फर्म केप्लर के आंकड़ों के अनुसार, पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं की पृष्ठभूमि में भारत ने ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने की अपनी रणनीति तेज कर दी है, जिससे खाड़ी देशों पर पारंपरिक निर्भरता कम हो रही है।

मुख्य आंकड़े और आपूर्ति का स्वरूप

केप्लर के आंकड़ों के अनुसार, जून में भारत का कुल एलपीजी आयात 3 प्रतिशत बढ़कर 11.91 लाख मीट्रिक टन (1,191 टीएमटी) हो गया, जबकि मई में यह 11.55 लाख मीट्रिक टन (1,155 टीएमटी) था। इसमें अमेरिका की हिस्सेदारी सबसे बड़ी रही।

जून में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) भारत का दूसरा सबसे बड़ा एलपीजी आपूर्तिकर्ता रहा, जहाँ से आयात 16.6 प्रतिशत बढ़कर 1.57 लाख मीट्रिक टन पहुँचा, जो मई में 1.34 लाख मीट्रिक टन था। सऊदी अरब और कुवैत ने जून में प्रत्येक ने भारत को 64-64 हजार मीट्रिक टन एलपीजी की आपूर्ति की।

विविधीकरण की रणनीति और दीर्घकालिक समझौते

अमेरिका से एलपीजी आयात में यह बढ़ोतरी भारत की उस व्यापक ऊर्जा नीति का हिस्सा है, जो पश्चिम एशिया में हालिया संघर्ष के बाद और मजबूत हुई है। इसी दिशा में सरकारी तेल रिफाइनरियों ने 2026 से अमेरिका से 22 लाख टन एलपीजी आयात के लिए दीर्घकालिक समझौता किया है।

गौरतलब है कि पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने से पहले भारत के करीब 90 प्रतिशत एलपीजी आयात का मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर गुजरता था। आपूर्ति में आई बाधाओं के बाद भारतीय रिफाइनरियों ने आयात के स्रोतों का दायरा तेजी से बढ़ाना शुरू किया।

भारत अब केवल अमेरिका तक सीमित नहीं है — ओमान, अर्जेंटीना, नाइजीरिया, अल्जीरिया और मिस्र जैसे देशों से भी एलपीजी आयात बढ़ाया जा रहा है, ताकि किसी एक क्षेत्र पर अत्यधिक निर्भरता न रहे।

आपूर्ति की स्थिति और होर्मुज की भूमिका

उद्योग सूत्रों के अनुसार, भारत ने अगस्त तक के लिए कच्चे तेल और एलपीजी दोनों की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित कर ली है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के दोबारा खुलने के बाद खाड़ी देशों से ऊर्जा आपूर्ति सामान्य होने लगी है, जिससे घरेलू बाजार में उपलब्धता को लेकर बनी चिंताएँ काफी हद तक कम हो गई हैं।

विशेषज्ञों की राय और आगे की राह

विशेषज्ञों का मानना है कि क्षेत्रीय तनाव कम होने के बाद भी भारत ऊर्जा आयात विविधीकरण की नीति जारी रखेगा। खाड़ी देश आगे भी कच्चे तेल और एलपीजी के प्रमुख आपूर्तिकर्ता बने रहेंगे, लेकिन भारतीय रिफाइनरियाँ अब कई देशों से आयात का संतुलित मिश्रण बनाए रखेंगी। यह बदलाव भारत-अमेरिका ऊर्जा सहयोग को नई गहराई देने के साथ-साथ भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूत आधार प्रदान करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक भू-राजनीतिक पुनर्संतुलन है — और यह बदलाव उस संकट की देन है जिसने होर्मुज पर 90% निर्भरता की कमज़ोरी उजागर की। दीर्घकालिक समझौते यह संकेत देते हैं कि नीति-निर्माता इसे अस्थायी नहीं मानते। लेकिन असली सवाल यह है कि क्या यह विविधीकरण खाड़ी देशों के साथ कूटनीतिक संतुलन को प्रभावित करेगा, जो भारतीय प्रवासियों और कच्चे तेल आपूर्ति दोनों के लिहाज से अभी भी अपरिहार्य हैं। ऊर्जा सुरक्षा और कूटनीतिक लचीलेपन के बीच यह तनाव भारत की विदेश नीति की अगली परीक्षा होगी।
RashtraPress
3 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जून 2026 में भारत का सबसे बड़ा एलपीजी आपूर्तिकर्ता कौन रहा?
केप्लर के आंकड़ों के अनुसार, जून 2026 में अमेरिका भारत का सबसे बड़ा एलपीजी आपूर्तिकर्ता रहा, जिसने 7.73 लाख मीट्रिक टन की आपूर्ति की। यह मई की तुलना में 19.4 प्रतिशत अधिक है।
भारत ने अमेरिका से एलपीजी आयात क्यों बढ़ाया है?
पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक संघर्ष के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज मार्ग से आपूर्ति बाधित होने के बाद भारत ने ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने की रणनीति अपनाई। चूँकि संघर्ष से पहले भारत के 90 प्रतिशत एलपीजी आयात का मार्ग होर्मुज से था, इसलिए भारतीय रिफाइनरियों ने जोखिम कम करने के लिए अमेरिका सहित अन्य देशों से आयात बढ़ाया।
भारत और अमेरिका के बीच एलपीजी का दीर्घकालिक समझौता क्या है?
सरकारी तेल रिफाइनरियों ने 2026 से अमेरिका से 22 लाख टन एलपीजी आयात के लिए दीर्घकालिक समझौता किया है। यह समझौता भारत-अमेरिका ऊर्जा सहयोग को संस्थागत रूप देता है और खाड़ी देशों पर निर्भरता कम करने में सहायक होगा।
जून 2026 में भारत के एलपीजी आयात में अन्य देशों की स्थिति क्या रही?
जून में यूएई दूसरा सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता रहा — 1.57 लाख मीट्रिक टन (मई से 16.6% अधिक)। सऊदी अरब और कुवैत ने प्रत्येक 64-64 हजार मीट्रिक टन की आपूर्ति की। इसके अलावा ओमान, अर्जेंटीना, नाइजीरिया, अल्जीरिया और मिस्र से भी आयात बढ़ाया जा रहा है।
क्या स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुलने के बाद भी भारत विविधीकरण जारी रखेगा?
विशेषज्ञों के अनुसार, क्षेत्रीय तनाव कम होने के बाद भी भारत ऊर्जा आयात विविधीकरण की नीति जारी रखेगा। भारतीय रिफाइनरियाँ अब कई देशों से आयात का संतुलित मिश्रण बनाए रखेंगी, ताकि भविष्य में किसी भी भू-राजनीतिक संकट का असर सीमित रहे।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 सप्ताह पहले
  2. 4 सप्ताह पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 3 महीने पहले
  6. 3 महीने पहले
  7. 3 महीने पहले
  8. 7 महीने पहले