अमेरिका बना भारत का सबसे बड़ा एलपीजी आपूर्तिकर्ता, आयात हिस्सेदारी 67% पर पहुँची — पुरी
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने 7 अगस्त 2026 को घोषणा की कि अमेरिका अब भारत का सबसे बड़ा तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) आपूर्तिकर्ता बन चुका है, जिसकी आयात हिस्सेदारी बढ़कर लगभग 67 प्रतिशत हो गई है। यह बदलाव भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा विविधीकरण रणनीति का परिणाम है, न कि किसी तात्कालिक भू-राजनीतिक संकट की प्रतिक्रिया।
मुख्य घटनाक्रम
पुरी ने बताया कि सरकार ने पहले ही अमेरिका से देश की कुल एलपीजी आवश्यकता का लगभग 10 प्रतिशत आयात करने का निर्णय लिया था। उस समय इस फैसले पर सवाल उठे थे, क्योंकि भारत परंपरागत रूप से अपने निकटवर्ती देशों और क्षेत्रों से एलपीजी का आयात करता रहा है। हालाँकि, बाद के महीनों में आयात ढाँचे में उल्लेखनीय परिवर्तन आया और अमेरिका प्रमुख आपूर्तिकर्ता के रूप में उभरा।
मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह निर्णय होर्मुज जलडमरूमध्य में संभावित व्यवधान की आशंका से प्रेरित नहीं था, बल्कि यह भारत की सुनियोजित ऊर्जा सुरक्षा नीति का अंग था।
ऊर्जा विविधीकरण की रणनीति
पुरी के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इनमें ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाना, मजबूत ऊर्जा अवसंरचना विकसित करना, भरोसेमंद अंतरराष्ट्रीय साझेदारियाँ बनाना, रणनीतिक भंडार तैयार करना और वैकल्पिक ईंधनों को प्रोत्साहन देना शामिल है।
गौरतलब है कि दशकों तक ऊर्जा सुरक्षा को केवल हाइड्रोकार्बन स्रोतों के संदर्भ में देखा जाता था। सरकार का कहना है कि भारत अब इस सोच से आगे बढ़कर एलएनजी, जैव ईंधन, हरित हाइड्रोजन और घरेलू तेल-गैस उत्पादन को एक साथ बढ़ावा दे रहा है।
'समुद्र मंथन' मिशन का उल्लेख
पुरी ने हाल ही में घोषित ₹84,000 करोड़ के 'समुद्र मंथन' मिशन का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह परियोजना भारत के गहरे समुद्री क्षेत्रों में हाइड्रोकार्बन खोज गतिविधियों को अभूतपूर्व गति देगी। उनके शब्दों में, "समुद्र मंथन मिशन केवल एक निवेश नहीं है, बल्कि भारत के ऊर्जा भविष्य में विश्वास का सबसे बड़ा प्रमाण है।"
आम जनता पर असर
ऊर्जा आपूर्ति के विविधीकरण से वैश्विक संकटों और बाहरी परिस्थितियों का आम नागरिकों पर पड़ने वाला प्रभाव कम होता है। अमेरिका से एलपीजी आयात में वृद्धि से आपूर्ति श्रृंखला में स्थिरता आती है, जिससे घरेलू रसोई गैस की उपलब्धता पर सकारात्मक असर पड़ सकता है।
क्या होगा आगे
सरकार का लक्ष्य केवल ऊर्जा आयात करना नहीं, बल्कि एक ऐसी ऊर्जा व्यवस्था तैयार करना है जो सुरक्षित, टिकाऊ और आत्मनिर्भर हो। 'समुद्र मंथन' मिशन और ऊर्जा विविधीकरण की नीति मिलकर भारत को वैश्विक ऊर्जा मानचित्र पर नई स्थिति दिलाने की दिशा में काम करेंगी।