21 सितंबर 2026
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पश्चिम बंगाल PMMSY में शामिल, मछुआरों को मिलेंगे ऋण व ₹9 करोड़ के विकास लाभ

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पश्चिम बंगाल PMMSY में शामिल, मछुआरों को मिलेंगे ऋण व ₹9 करोड़ के विकास लाभ

सारांश

पश्चिम बंगाल आखिरकार PMMSY में शामिल हो गया — मछुआरों के लिए ऋण, ₹9 करोड़ का विकास पैकेज और सुंदरबन तटीय क्षेत्र में निवेश का वादा। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने TMC की पूर्व सरकार पर राज्य को वर्षों तक इस योजना से दूर रखने का आरोप लगाया।

मुख्य बातें

पश्चिम बंगाल 21 सितंबर 2026 को औपचारिक रूप से प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) से जुड़ा।
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी और केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह के बीच न्यूटाउन, कोलकाता में डेढ़ घंटे की बैठक के बाद निर्णय अंतिम हुआ।
मत्स्य पालन विकास के लिए केंद्र ने ₹9 करोड़ मंज़ूर किए; मछुआरों को अब ऋण व अन्य लाभ मिलेंगे।
बाँकुड़ा और पुरुलिया ज़िलों में 6 अमृत सरोवरों को मंज़ूरी दी गई।
केंद्रीय मंत्री के अनुसार पिछले 5 वर्षों से लंबित कार्य पिछले 4 महीनों में पूरे किए गए।
अधिकारी ने पूर्व TMC सरकार पर मछुआरों को योजना के लाभों से वंचित रखने का आरोप लगाया।

पश्चिम बंगाल सरकार सोमवार, 21 सितंबर 2026 को औपचारिक रूप से प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) से जुड़ गई — केंद्र सरकार की वह महत्वाकांक्षी पहल जो देशभर में मत्स्य पालन के बुनियादी ढाँचे को मज़बूत करने और मछुआरों की आजीविका सुधारने के लिए बनाई गई है। इस जुड़ाव के साथ ही राज्य के मछुआरों को ऋण और अन्य प्रत्यक्ष लाभ मिलने का रास्ता खुल गया है।

बैठक और निर्णय का विवरण

मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कोलकाता के न्यूटाउन में केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह से मुलाकात कर इस निर्णय को अंतिम रूप दिया। करीब डेढ़ घंटे चली इस बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि पश्चिम बंगाल अब PMMSY के अंतर्गत विधिवत शामिल हो गया है।

अधिकारी ने कहा, 'राज्य के मत्स्य पालन क्षेत्र में अपार संभावनाएँ हैं। हमने इस पर कई बार चर्चा की है। आज मैं विशेष रूप से केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह को धन्यवाद देता हूँ। उन्होंने हमारी चिंताओं को सुना और मत्स्य पालन विकास के लिए ₹9 करोड़ दिए। आज से मछुआरों को ज़रूरत के अनुसार ऋण और अन्य लाभ मिलेंगे।'

तटीय और आंतरिक ज़िलों का विकास

मुख्यमंत्री ने बताया कि सुंदरबन सहित दक्षिण बंगाल के तटीय क्षेत्रों का विकास प्राथमिकता में है। उन्होंने कहा कि समुद्र और नदियों से जीविका चलाने वाले मछुआरों की अपनी विशिष्ट समस्याएँ हैं, जिनके समाधान के लिए अब केंद्र का सहयोग मिल रहा है। उनके प्रस्तावों के आधार पर केंद्रीय मंत्री ने बाँकुड़ा और पुरुलिया ज़िलों में छह अमृत सरोवरों को भी मंज़ूरी दी है।

पिछली सरकार पर आरोप

अधिकारी ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नेतृत्व वाली पूर्व ममता बनर्जी सरकार पर आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल को जानबूझकर PMMSY से दूर रखा गया, जिससे वर्षों तक मछुआरे इस केंद्रीय योजना के लाभों से वंचित रहे। केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने भी मुख्यमंत्री के इस बयान का समर्थन करते हुए कहा कि पिछली सरकार के असहयोग के चलते केंद्र सरकार के प्रयास ठप पड़ गए थे।

लंबित कार्यों में तेज़ी

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि पिछले पाँच वर्षों से लंबित कई काम पिछले चार महीनों में पूरे कर दिए गए हैं। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में नई सरकार के साथ केंद्र-राज्य संबंधों में बदलाव देखा जा रहा है और योजनाओं के क्रियान्वयन में तेज़ी आई है।

आगे की राह

PMMSY से जुड़ने के बाद पश्चिम बंगाल के मछुआरे अब केंद्र सरकार की सब्सिडी, ऋण सुविधा और अवसंरचना विकास की योजनाओं का लाभ उठा सकेंगे। गौरतलब है कि यह योजना देश के कई राज्यों में पहले से लागू है और इसे मत्स्य पालन क्षेत्र में सबसे बड़े केंद्रीय हस्तक्षेपों में से एक माना जाता है। अब नज़र इस पर होगी कि धनराशि का वितरण ज़मीनी स्तर पर कितनी तेज़ी से पहुँचता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि ₹9 करोड़ की यह राशि राज्य के विशाल मछुआरा समुदाय के लिए पर्याप्त है या नहीं। सुंदरबन और तटीय क्षेत्रों में मछुआरों की समस्याएँ बहुआयामी हैं — ऋण तक पहुँच, प्रसंस्करण अवसंरचना और बाज़ार संपर्क — जिनके लिए एकल बजट आवंटन से अधिक की ज़रूरत है। राजनीतिक दोषारोपण के बीच यह देखना ज़रूरी होगा कि योजना का लाभ वास्तव में ज़मीनी स्तर तक कब और कैसे पहुँचता है।
RashtraPress
21 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) क्या है?
PMMSY केंद्र सरकार की एक प्रमुख पहल है जिसका उद्देश्य मत्स्य पालन क्षेत्र में बुनियादी ढाँचे की कमियों को दूर करना, मछुआरों को ऋण व सब्सिडी उपलब्ध कराना और उत्पादन बढ़ाना है। यह योजना देश के कई राज्यों में पहले से लागू थी; पश्चिम बंगाल 21 सितंबर 2026 को इससे जुड़ा।
पश्चिम बंगाल अब तक PMMSY में क्यों शामिल नहीं था?
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी और केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह दोनों ने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस की पूर्व ममता बनर्जी सरकार के असहयोग के कारण केंद्र की कोशिशें बाधित रहीं और राज्य वर्षों तक इस योजना से वंचित रहा।
मछुआरों को PMMSY से क्या लाभ मिलेंगे?
योजना के तहत पश्चिम बंगाल के मछुआरों को अब ऋण सुविधा, सब्सिडी और अन्य प्रत्यक्ष लाभ मिलेंगे। मत्स्य पालन विकास के लिए केंद्र ने ₹9 करोड़ की राशि भी मंज़ूर की है।
बाँकुड़ा और पुरुलिया में अमृत सरोवरों की मंज़ूरी क्यों दी गई?
मुख्यमंत्री अधिकारी के प्रस्तावों के आधार पर केंद्रीय मंत्री ने बाँकुड़ा और पुरुलिया ज़िलों में 6 अमृत सरोवरों को मंज़ूरी दी, जो आंतरिक ज़िलों में जलकृषि और मीठे पानी की मत्स्य पालन क्षमता बढ़ाने में सहायक होंगे।
क्या पश्चिम बंगाल में लंबित मत्स्य पालन परियोजनाएँ शुरू हो गई हैं?
केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह के अनुसार पिछले पाँच वर्षों से लंबित कई काम पिछले चार महीनों में पूरे कर दिए गए हैं। PMMSY में औपचारिक शामिल होने के बाद और परियोजनाओं में तेज़ी आने की उम्मीद है।
राष्ट्र प्रेस
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