भारत में गैस बाज़ार सुधार और बुनियादी ढाँचे में निवेश के बिना नहीं बढ़ेगी दीर्घकालिक माँग: IGU रिपोर्ट
सारांश
मुख्य बातें
इंटरनेशनल गैस यूनियन (IGU) की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, भारत में प्राकृतिक गैस की दीर्घकालिक माँग को गति देने के लिए केवल तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) आयात क्षमता बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि ट्रांसमिशन और वितरण अवसंरचना में तेज़ निवेश, गैस मूल्य निर्धारण प्रणाली में सुधार और गैस-आधारित उद्योगों से मज़बूत माँग — ये तीनों स्तंभ एक साथ खड़े होने ज़रूरी हैं।
मिडस्ट्रीम इन्फ्रास्ट्रक्चर में पिछड़ापन
रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने LNG रीगैसिफिकेशन टर्मिनलों की क्षमता बढ़ाने में उल्लेखनीय प्रगति की है, लेकिन मिडस्ट्रीम इन्फ्रास्ट्रक्चर — यानी पाइपलाइन नेटवर्क और वितरण तंत्र — में निवेश उसी रफ़्तार से नहीं बढ़ पाया है। इस असंतुलन के कारण देश में प्राकृतिक गैस की खपत बढ़ाने की वास्तविक क्षमता सीमित बनी हुई है। रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया गया है कि मूल्य निर्धारण प्रणाली, बाज़ार तक पहुँच और वाणिज्यिक ढाँचे में सुधार के बिना गैस की माँग में स्थायी वृद्धि संभव नहीं होगी।
होर्मुज़ संकट ने उजागर किया आपूर्ति जोखिम
IGU ने अपनी रिपोर्ट में हालिया स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ संकट का विशेष उल्लेख किया है। रिपोर्ट के अनुसार, इस संकट ने ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान के प्रति भारत की संवेदनशीलता को स्पष्ट रूप से उजागर किया, क्योंकि देश LNG और तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (LPG) के लिए खाड़ी क्षेत्र से होने वाले आयात पर काफ़ी निर्भर है। कतर भारत का सबसे बड़ा LNG आपूर्तिकर्ता बना हुआ है, और LPG आयात का भी बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से आता है। ईरान संघर्ष के दौरान ऊर्जा आपूर्ति में आई बाधा ने इस रणनीतिक समुद्री मार्ग पर भारत की निर्भरता से जुड़े जोखिमों को और स्पष्ट कर दिया।
घरेलू उत्पादन और आयात निर्भरता
रिपोर्ट के अनुसार, भारत का घरेलू उत्पादन देश की कुल प्राकृतिक गैस माँग का केवल लगभग 50-52 प्रतिशत ही पूरा कर पाता है। शेष आवश्यकता कतर, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका और रूस जैसे देशों से LNG आयात के ज़रिए पूरी की जाती है। LPG के मामले में स्थिति और भी चिंताजनक है — दुनिया के सबसे बड़े LPG उपभोक्ताओं में शामिल होने के बावजूद, भारत की घरेलू माँग का लगभग 60-65 प्रतिशत हिस्सा आयात से पूरा किया जाता है, और इनमें से अधिकांश आयात स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ के रास्ते आता है।
मध्यम और दीर्घकालिक परिदृश्य
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यदि खाड़ी क्षेत्र में तनाव कम होता है, तो मध्यम और दीर्घकालिक परिदृश्य बेहतर हो सकता है। इस दशक के शेष वर्षों में बड़ी मात्रा में नई LNG निर्यात क्षमता वैश्विक बाज़ार में आने की संभावना है, जिससे वैश्विक LNG आपूर्ति पर्याप्त बनी रहेगी। इससे कीमतों पर दबाव पड़ेगा और भारत में प्राकृतिक गैस के उपयोग की आर्थिक व्यवहार्यता बेहतर होगी। रिपोर्ट के अनुसार, हालिया कीमतों के झटके के बाद एशिया के अन्य बाज़ारों में माँग कमज़ोर रहने से क्षेत्रीय LNG बेंचमार्क कीमतों में गिरावट और तेज़ हो सकती है। यह परिस्थिति भारत के लिए अनुकूल हो सकती है, बशर्ते देश अपनी अवसंरचना और नीतिगत कमियों को समय रहते दूर करे।