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भारत में गैस बाज़ार सुधार और बुनियादी ढाँचे में निवेश के बिना नहीं बढ़ेगी दीर्घकालिक माँग: IGU रिपोर्ट

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भारत में गैस बाज़ार सुधार और बुनियादी ढाँचे में निवेश के बिना नहीं बढ़ेगी दीर्घकालिक माँग: IGU रिपोर्ट

सारांश

IGU की नई रिपोर्ट चेतावनी देती है कि भारत की गैस माँग में असली बाधा टर्मिनल क्षमता नहीं, बल्कि पाइपलाइन नेटवर्क की कमी और पुरानी मूल्य निर्धारण नीति है। साथ ही, LPG माँग का 60-65% और LNG का बड़ा हिस्सा होर्मुज़ से गुज़रता है — एक भू-राजनीतिक जोखिम जिसे नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।

मुख्य बातें

IGU की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में गैस की दीर्घकालिक माँग के लिए मिडस्ट्रीम इन्फ्रास्ट्रक्चर में निवेश और बाज़ार सुधार अनिवार्य हैं।
भारत का घरेलू उत्पादन कुल प्राकृतिक गैस माँग का केवल 50-52% पूरा करता है; शेष कतर, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका और रूस से आयात होता है।
LPG माँग का 60-65% आयात से पूरा होता है, जिसका अधिकांश हिस्सा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ से गुज़रता है।
हालिया होर्मुज़ संकट ने भारत की ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला की भेद्यता उजागर की।
इस दशक में नई वैश्विक LNG निर्यात क्षमता आने से कीमतों में गिरावट और भारत में गैस उपयोग की आर्थिक व्यवहार्यता बेहतर होने की संभावना।

इंटरनेशनल गैस यूनियन (IGU) की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, भारत में प्राकृतिक गैस की दीर्घकालिक माँग को गति देने के लिए केवल तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) आयात क्षमता बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि ट्रांसमिशन और वितरण अवसंरचना में तेज़ निवेश, गैस मूल्य निर्धारण प्रणाली में सुधार और गैस-आधारित उद्योगों से मज़बूत माँग — ये तीनों स्तंभ एक साथ खड़े होने ज़रूरी हैं।

मिडस्ट्रीम इन्फ्रास्ट्रक्चर में पिछड़ापन

रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने LNG रीगैसिफिकेशन टर्मिनलों की क्षमता बढ़ाने में उल्लेखनीय प्रगति की है, लेकिन मिडस्ट्रीम इन्फ्रास्ट्रक्चर — यानी पाइपलाइन नेटवर्क और वितरण तंत्र — में निवेश उसी रफ़्तार से नहीं बढ़ पाया है। इस असंतुलन के कारण देश में प्राकृतिक गैस की खपत बढ़ाने की वास्तविक क्षमता सीमित बनी हुई है। रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया गया है कि मूल्य निर्धारण प्रणाली, बाज़ार तक पहुँच और वाणिज्यिक ढाँचे में सुधार के बिना गैस की माँग में स्थायी वृद्धि संभव नहीं होगी।

होर्मुज़ संकट ने उजागर किया आपूर्ति जोखिम

IGU ने अपनी रिपोर्ट में हालिया स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ संकट का विशेष उल्लेख किया है। रिपोर्ट के अनुसार, इस संकट ने ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान के प्रति भारत की संवेदनशीलता को स्पष्ट रूप से उजागर किया, क्योंकि देश LNG और तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (LPG) के लिए खाड़ी क्षेत्र से होने वाले आयात पर काफ़ी निर्भर है। कतर भारत का सबसे बड़ा LNG आपूर्तिकर्ता बना हुआ है, और LPG आयात का भी बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से आता है। ईरान संघर्ष के दौरान ऊर्जा आपूर्ति में आई बाधा ने इस रणनीतिक समुद्री मार्ग पर भारत की निर्भरता से जुड़े जोखिमों को और स्पष्ट कर दिया।

घरेलू उत्पादन और आयात निर्भरता

रिपोर्ट के अनुसार, भारत का घरेलू उत्पादन देश की कुल प्राकृतिक गैस माँग का केवल लगभग 50-52 प्रतिशत ही पूरा कर पाता है। शेष आवश्यकता कतर, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका और रूस जैसे देशों से LNG आयात के ज़रिए पूरी की जाती है। LPG के मामले में स्थिति और भी चिंताजनक है — दुनिया के सबसे बड़े LPG उपभोक्ताओं में शामिल होने के बावजूद, भारत की घरेलू माँग का लगभग 60-65 प्रतिशत हिस्सा आयात से पूरा किया जाता है, और इनमें से अधिकांश आयात स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ के रास्ते आता है।

मध्यम और दीर्घकालिक परिदृश्य

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यदि खाड़ी क्षेत्र में तनाव कम होता है, तो मध्यम और दीर्घकालिक परिदृश्य बेहतर हो सकता है। इस दशक के शेष वर्षों में बड़ी मात्रा में नई LNG निर्यात क्षमता वैश्विक बाज़ार में आने की संभावना है, जिससे वैश्विक LNG आपूर्ति पर्याप्त बनी रहेगी। इससे कीमतों पर दबाव पड़ेगा और भारत में प्राकृतिक गैस के उपयोग की आर्थिक व्यवहार्यता बेहतर होगी। रिपोर्ट के अनुसार, हालिया कीमतों के झटके के बाद एशिया के अन्य बाज़ारों में माँग कमज़ोर रहने से क्षेत्रीय LNG बेंचमार्क कीमतों में गिरावट और तेज़ हो सकती है। यह परिस्थिति भारत के लिए अनुकूल हो सकती है, बशर्ते देश अपनी अवसंरचना और नीतिगत कमियों को समय रहते दूर करे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन गैस को उपभोक्ता तक पहुँचाने वाली पाइपलाइन और वितरण व्यवस्था उसी रफ़्तार से नहीं बढ़ी। LPG माँग का 60-65% और LNG का बड़ा हिस्सा एक ही भू-राजनीतिक रूप से संवेदनशील समुद्री मार्ग से गुज़रना, भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए गंभीर जोखिम है जिसे अब और टाला नहीं जा सकता। मूल्य निर्धारण सुधार बिना किसी ठोस समयसीमा के वर्षों से लंबित हैं — और जब तक औद्योगिक उपभोक्ताओं को प्रतिस्पर्धी दर पर गैस नहीं मिलती, माँग में स्थायी वृद्धि की उम्मीद बेमानी है।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

IGU रिपोर्ट में भारत की गैस माँग के बारे में क्या कहा गया है?
IGU की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में प्राकृतिक गैस की दीर्घकालिक माँग बढ़ाने के लिए केवल LNG आयात क्षमता बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। मिडस्ट्रीम इन्फ्रास्ट्रक्चर में निवेश, मूल्य निर्धारण सुधार और गैस-आधारित उद्योगों से मज़बूत माँग — तीनों एक साथ ज़रूरी हैं।
भारत की प्राकृतिक गैस आयात निर्भरता कितनी है?
रिपोर्ट के अनुसार, भारत का घरेलू उत्पादन कुल प्राकृतिक गैस माँग का केवल 50-52% पूरा कर पाता है। शेष ज़रूरत कतर, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका और रूस से LNG आयात के ज़रिए पूरी की जाती है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ संकट का भारत पर क्या असर पड़ा?
हालिया होर्मुज़ संकट ने भारत की ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला की कमज़ोरी उजागर की, क्योंकि LNG और LPG का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से आता है। ईरान संघर्ष के दौरान आई आपूर्ति बाधा ने इस रणनीतिक जोखिम को और स्पष्ट कर दिया।
भारत में LPG आयात निर्भरता कितनी है?
रिपोर्ट के अनुसार, भारत दुनिया के सबसे बड़े LPG उपभोक्ताओं में से एक है, फिर भी घरेलू माँग का लगभग 60-65% हिस्सा आयात से पूरा किया जाता है। इनमें से अधिकांश आयात स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ के रास्ते आता है।
वैश्विक LNG आपूर्ति में वृद्धि से भारत को क्या फ़ायदा होगा?
IGU रिपोर्ट के अनुसार, इस दशक के शेष वर्षों में नई वैश्विक LNG निर्यात क्षमता बाज़ार में आने से कीमतों पर दबाव पड़ेगा। इससे भारत में प्राकृतिक गैस के उपयोग की आर्थिक व्यवहार्यता बेहतर होगी, बशर्ते देश अपनी अवसंरचना और नीतिगत कमियाँ समय रहते दूर करे।
राष्ट्र प्रेस
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