धमतरी में फसल बीमा योजना ने तोड़ा 5 साल का रिकॉर्ड, 81,000 किसानों ने 84,277 हेक्टेयर का बीमा कराया
सारांश
मुख्य बातें
छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) ने इस वर्ष पाँच साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। 26 अगस्त 2026 तक प्राप्त आँकड़ों के अनुसार, जिले के लगभग 81,000 किसानों ने 84,277.75 हेक्टेयर कृषि भूमि का फसल बीमा कराया है — जो पिछले पाँच वर्षों में सर्वाधिक है। यह उपलब्धि न केवल योजना की बढ़ती स्वीकार्यता को रेखांकित करती है, बल्कि ग्रामीण स्तर पर जोखिम प्रबंधन के प्रति किसानों की बढ़ती सजगता का भी प्रमाण है।
मुख्य घटनाक्रम
कृषि अधिकारी मोनेश साहू ने बताया कि पिछले वर्ष की तुलना में इस बार 9,300 अधिक किसान बीमा कवर के दायरे में आए हैं। उन्होंने कहा कि विभाग ने पिछले 5 वर्षों के आँकड़ों की समीक्षा की, जिसमें यह वर्ष सबसे अधिक फसल बीमा नामांकन का वर्ष सिद्ध हुआ।
धमतरी के जिला कलेक्टर अविनाश मिश्रा ने पुष्टि की कि पिछले वर्ष की तुलना में इस बार बीमा नामांकन में लगभग 10 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने इसे जागरूकता अभियानों और ज़मीनी स्तर पर प्रशासनिक प्रयासों का परिणाम बताया।
किसानों की प्रतिक्रिया
जिले के एक किसान ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा, 'केंद्र सरकार ने किसानों के लिए बहुत सारी योजनाएं लागू की हैं। जहाँ तक प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की बात है तो यह बेहद महत्वपूर्ण योजना है। जब कभी भी किसी प्रकार की प्राकृतिक आपदा आती है और किसानों की फसलों को नुकसान होता है तो केंद्र सरकार की ओर से मुआवजा दिया जाता है। मैं खुद इसका लाभ ले चुका हूँ।'
एक अन्य किसान ने कहा, 'छोटे और मध्यम वर्ग के किसानों के लिए यह योजना वरदान साबित हो रही है। मैंने भी फसल बर्बाद होने पर इसका लाभ लिया, जिससे मैं आर्थिक संकट से उभर पाया।'
योजना की पृष्ठभूमि और महत्त्व
गौरतलब है कि एक दशक पहले तक प्राकृतिक आपदाओं — अतिवृष्टि, सूखा, ओलावृष्टि — के कारण फसल नष्ट होने पर किसानों के पास कोई वित्तीय सुरक्षा जाल नहीं होता था। इसी संकट के मद्देनज़र केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना लागू की, जो फसल क्षति होने पर किसानों को उचित मुआवजा सुनिश्चित करती है।
यह ऐसे समय में आया है जब देश के कई हिस्सों में मानसून की अनिश्चितता और जलवायु परिवर्तन के कारण कृषि जोखिम बढ़ रहे हैं। धमतरी जैसे कृषि-प्रधान जिले में इस योजना की बढ़ती पहुँच किसानों को आर्थिक स्थिरता प्रदान करने की दिशा में एक सकारात्मक संकेत है।
आम जनता पर असर
बीमा कवर में 10% की वृद्धि का सीधा अर्थ है कि अब जिले के अधिक परिवार फसल नुकसान की स्थिति में आर्थिक संकट से सुरक्षित रहेंगे। छोटे और सीमांत किसान, जो पहले कर्ज़ के बोझ तले दब जाते थे, अब बीमा मुआवजे के ज़रिये अपनी अगली फसल की तैयारी कर सकते हैं।
क्या होगा आगे
कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार, आगामी रबी सीज़न में भी नामांकन अभियान जारी रखा जाएगा। प्रशासन का लक्ष्य है कि जिले के अधिकतम पात्र किसान इस सुरक्षा कवच का लाभ उठा सकें और फसल बीमा को कृषि प्रबंधन का एक अनिवार्य हिस्सा बनाया जा सके।