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बिहार इको-टूरिज्म: राजगीर, मंदार हिल और नागी-नकटी में दो वर्षों में 36% बढ़े पर्यटक

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बिहार इको-टूरिज्म: राजगीर, मंदार हिल और नागी-नकटी में दो वर्षों में 36% बढ़े पर्यटक

सारांश

बिहार के इको-टूरिज्म केंद्रों पर दो वर्षों में पर्यटकों की संख्या करीब 36% बढ़ी है। राजगीर नेचर सफारी में तो यह लगभग दोगुनी हो गई। 276 पीपीपी परियोजनाओं के साथ राज्य अब प्राकृतिक पर्यटन को अपनी नई पहचान बनाने की राह पर है।

मुख्य बातें

बिहार के इको-टूरिज्म केंद्रों पर पर्यटक संख्या 2022-23 में 55,20,156 से बढ़कर 2024-25 में 74,90,847 हुई — करीब 35.7% की वृद्धि।
राजगीर नेचर सफारी में पर्यटक 1.59 लाख से बढ़कर 3 लाख हुए — 1.89 गुना की बढ़ोतरी।
करमचट डैम (कैमूर) में संख्या 46,163 से 1,49,832 और भीमबांध (मुंगेर) में 35,093 से 85,868 हुई।
नागी-नकटी पक्षी आश्रयणी (जमुई) में पर्यटक 30,797 से बढ़कर 48,068 हुए।
पीपीपी मॉडल के तहत 276 परियोजनाओं की पहचान; चयनित स्थलों को 30 वर्ष की लीज पर विकसित किया जाएगा।

बिहार के इको-टूरिज्म केंद्रों पर पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय उछाल दर्ज किया गया है। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 2022-23 में राज्य के इको-टूरिज्म स्थलों पर 55,20,156 पर्यटक पहुँचे थे, जो 2024-25 में बढ़कर 74,90,847 हो गए — यानी दो वर्षों में करीब 35.7 फीसदी की वृद्धि। राजगीर नेचर सफारी, मंदार हिल और नागी-नकटी पक्षी आश्रयणी इस बदलाव के सबसे प्रमुख उदाहरण बनकर उभरे हैं।

राजगीर नेचर सफारी: सबसे तेज़ उभरता केंद्र

आंकड़ों के मुताबिक, राजगीर नेचर सफारी में 2022-23 में करीब 1.59 लाख पर्यटक पहुँचे थे, जो 2024-25 में बढ़कर लगभग 3 लाख हो गए — दो वर्षों में लगभग 1.89 गुना की वृद्धि। पहाड़ियों और हरियाली के बीच विकसित इस सफारी में ग्लास स्काईवॉक, जिपलाइन, स्काई साइकिलिंग और सस्पेंशन ब्रिज जैसे रोमांचक आकर्षण पर्यटकों को खींच रहे हैं। बच्चों और युवाओं के लिए आर्चरी, राइफल शूटिंग, ट्रैंपोलिन और वॉल क्लाइंबिंग जैसी गतिविधियाँ भी उपलब्ध हैं।

मंदार हिल और नागी-नकटी की बढ़ती लोकप्रियता

बांका जिले का मंदार हिल भी इको-टूरिज्म के नक्शे पर तेज़ी से उभर रहा है। यहाँ 2022-23 में करीब 80 हज़ार पर्यटक पहुँचे थे, जो 2024-25 में बढ़कर करीब 98 हज़ार हो गए। प्राकृतिक वातावरण और धार्मिक-सांस्कृतिक महत्व इसे पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण बनाते हैं।

जमुई की नागी-नकटी पक्षी आश्रयणी में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज हुई है — 2022-23 में 30,797 पर्यटकों की तुलना में 2024-25 में 48,068 पर्यटक पहुँचे। पक्षियों की विविधता और शांत प्राकृतिक परिवेश इस स्थल को प्रकृति प्रेमियों के बीच खास बना रहा है।

करमचट डैम और भीमबांध भी तेज़ी से उभरे

कैमूर का करमचट डैम और मुंगेर का भीमबांध भी इस बदलाव में भागीदार हैं। करमचट डैम में पर्यटकों की संख्या 46,163 से बढ़कर 1,49,832 हो गई, जबकि भीमबांध में 35,093 से बढ़कर 85,868 पर्यटक पहुँचे। गौरतलब है कि यह वृद्धि ऐसे समय में आई है जब राज्य सरकार इको-टूरिज्म बुनियादी ढाँचे में सक्रिय निवेश कर रही है।

पीपीपी मॉडल से निजी निवेश को बढ़ावा

अधिकारियों के मुताबिक, इको-टूरिज्म के विस्तार के लिए पीपीपी (सार्वजनिक-निजी भागीदारी) मॉडल के तहत 276 परियोजनाओं की पहचान की गई है — जिनमें 29 जलाशय आधारित और 247 तालाब, झील, आर्द्रभूमि व अन्य जल निकायों से जुड़ी परियोजनाएँ शामिल हैं।

सरकार के अनुसार, चयनित परियोजनाओं को 30 वर्ष की लीज पर विकसित किया जाएगा। इसके साथ ही समयबद्ध स्वीकृति, व्यवहार्यता अंतर वित्त पोषण और बिहार पर्यटन नीति के तहत प्रोत्साहन भी उपलब्ध कराए जाएंगे। यदि यह ढाँचा प्रभावी रहा, तो आने वाले वर्षों में राज्य के प्राकृतिक पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों की संख्या में और बड़ी वृद्धि की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा अब शुरू होती है। 276 पीपीपी परियोजनाओं की पहचान और 30 वर्षीय लीज मॉडल कागज़ पर मज़बूत दिखता है, पर देश के कई राज्यों में ऐसे मॉडल क्रियान्वयन की दीवार से टकराकर ठंडे पड़ चुके हैं। राजगीर जैसे केंद्रों पर पर्यटकों की दोगुनी भीड़ बुनियादी ढाँचे पर दबाव भी बढ़ाती है — यदि गुणवत्ता और पर्यावरणीय संतुलन नहीं बना, तो यही भीड़ इन स्थलों की विशेषता को नष्ट कर सकती है। सरकार को संख्या बढ़ाने के साथ-साथ धारण क्षमता और स्थानीय समुदायों की भागीदारी पर भी उतना ही ध्यान देना होगा।
RashtraPress
26 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिहार के इको-टूरिज्म केंद्रों पर पर्यटक संख्या कितनी बढ़ी है?
पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 2022-23 में 55,20,156 पर्यटकों की तुलना में 2024-25 में 74,90,847 पर्यटक पहुँचे — यानी दो वर्षों में करीब 35.7% की वृद्धि।
राजगीर नेचर सफारी में क्या-क्या आकर्षण हैं?
राजगीर नेचर सफारी में ग्लास स्काईवॉक, जिपलाइन, स्काई साइकिलिंग और सस्पेंशन ब्रिज जैसी रोमांचक गतिविधियाँ हैं। इसके अलावा बच्चों और युवाओं के लिए आर्चरी, राइफल शूटिंग, ट्रैंपोलिन और वॉल क्लाइंबिंग की सुविधाएँ भी उपलब्ध हैं।
नागी-नकटी पक्षी आश्रयणी कहाँ स्थित है और यह क्यों खास है?
नागी-नकटी पक्षी आश्रयणी बिहार के जमुई जिले में स्थित है। पक्षियों की विविधता और शांत प्राकृतिक परिवेश के कारण यह प्रकृति प्रेमियों के बीच लोकप्रिय है; यहाँ पर्यटक संख्या 2022-23 के 30,797 से बढ़कर 2024-25 में 48,068 हो गई।
बिहार सरकार इको-टूरिज्म के विस्तार के लिए क्या कदम उठा रही है?
सरकार पीपीपी मॉडल के तहत 276 परियोजनाओं को विकसित करने की योजना बना रही है, जिनमें 29 जलाशय आधारित और 247 तालाब, झील व आर्द्रभूमि परियोजनाएँ शामिल हैं। चयनित स्थलों को 30 वर्ष की लीज पर विकसित किया जाएगा और बिहार पर्यटन नीति के तहत निवेशकों को प्रोत्साहन दिया जाएगा।
करमचट डैम और भीमबांध में पर्यटन की क्या स्थिति है?
कैमूर के करमचट डैम में पर्यटक संख्या 46,163 से बढ़कर 1,49,832 हो गई है, जबकि मुंगेर के भीमबांध में 35,093 से बढ़कर 85,868 पर्यटक पहुँचे — दोनों स्थल तेज़ी से उभरते इको-टूरिज्म गंतव्य बन रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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