क्या बिहार के राजगीर में मकर मेला एक नई शुरुआत है?

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क्या बिहार के राजगीर में मकर मेला एक नई शुरुआत है?

सारांश

राजगीर में मकर मेला का शुभारंभ हुआ, जिसमें लोक परंपराओं और सामाजिक समरसता की झलक देखने को मिली। यह मेला न केवल धार्मिक बल्कि सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक भी है।

Key Takeaways

  • राजगीर में मकर मेला एक प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन है।
  • मेला मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सराहनीय कदम से राजकीय दर्जा प्राप्त हुआ।
  • यह मेला कृषि उत्पादों और लोक परंपराओं का प्रतिनिधित्व करता है।
  • राजगीर अब एक प्रमुख पर्यटन केंद्र बन चुका है।
  • मेला में आकर्षक प्रतियोगिताएं भी आयोजित की गई हैं।

राजगीर, 14 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। बिहार के नालंदा जिले की ऐतिहासिक नगरी राजगीर में सात दिवसीय राजकीय मकर संक्रांति मेला का आगाज बुधवार को वैदिक मंत्रोच्चार और विधिवत पूजा-अर्चना के साथ हुआ। इस मेले का औपचारिक उद्घाटन ग्रामीण विकास विभाग एवं परिवहन मंत्री श्रवण कुमार ने किया।

उद्घाटन से पहले, वर्षों से चली आ रही परंपरा के अनुसार हिंदू रीति-रिवाजों से पूजा-अर्चना का आयोजन हुआ। इस दौरान मंत्री श्रवण कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि राजगीर एक ऐतिहासिक स्थल है, जहां चार महत्वपूर्ण महोत्सवों का आयोजन होता है, जिनमें राजगीर महोत्सव, महाप्रतापी सम्राट जरासंध महोत्सव, गोपाष्टमी महोत्सव और दोगी महोत्सव शामिल हैं।

उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राजगीर के धार्मिक महत्व को ध्यान में रखते हुए मकर मेला को राजकीय मेला का दर्जा दिया, जो अत्यंत सराहनीय है। राजगीर अब केवल एक तीर्थ स्थल नहीं, बल्कि एक प्रमुख पर्यटन केंद्र भी बन चुका है। पहले यह मेला 10-10 किलो वजनी मूली और कृषि उत्पादों की प्रदर्शनी के लिए जाना जाता था, लेकिन आज राजगीर अंतरराष्ट्रीय खेलों और आधुनिक पर्यटन का केंद्र बन गया है।

मंत्री ने कहा कि बचपन में कुंड स्नान के बाद मेले में डेढ़-दो हाथ लंबी और 10 किलो वजनी मूली देखने की उत्सुकता रहती थी। आज सरकार ने संस्कृति को संरक्षित रखते हुए विकास की नई दिशा दी है। अब राजगीर में अंतरराष्ट्रीय हॉकी और रग्बी जैसे बड़े आयोजनों का सफल आयोजन हो रहा है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2008 में सरकारी विद्यालयों में नौवीं कक्षा में पढ़ने वाली छात्राओं की संख्या मात्र 1.70 लाख थी, जो अब बढ़कर 9 लाख हो गई है। बिहार देश का पहला राज्य है, जहां एक ही माह में 1.20 लाख शिक्षकों की बहाली की गई। साथ ही 44 हजार से अधिक बेटियां अब पुलिस विभाग में सेवा दे रही हैं।

उन्होंने कहा कि राज्य में कोई भी परिवार बेघर न रहे, इसके लिए बिहार सरकार द्वारा बड़े पैमाने पर सर्वेक्षण कराया जा रहा है। मकर संक्रांति के पावन अवसर पर आयोजित यह मेला क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत, लोक परंपराओं एवं सामाजिक समरसता का जीवंत प्रतीक है।

सांसद कौशलेंद्र कुमार ने कहा कि मकर मेला राजगीर एक प्रमुख धार्मिक मेला है, जिसका धार्मिक महत्व अत्यंत विशिष्ट है। इस मेले का लाभ लेने के लिए नालंदा जिले के अलावा बिहार के अन्य जिलों से भी श्रद्धालु राजगीर पहुंचते हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार हमेशा सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए कार्य करते रहे हैं। मकर मेला के अवसर पर कृषि मेला में प्रदर्शनी भी लगाई गई है, जिसमें नई उन्नत फसलों के बारे में किसानों के लिए विभिन्न प्रकार की लाभकारी योजनाएं और जानकारियां दी जा रही हैं। मेले में आकर्षक और मनोरंजक प्रतियोगिता 'दही खाओ–इनाम पाओ' का सफल आयोजन भी किया गया।

Point of View

बल्कि बाहरी श्रद्धालुओं के लिए भी एक बड़ा आकर्षण है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का इस मेले को राजकीय दर्जा देना इस बात का संकेत है कि बिहार सरकार संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण के प्रति गंभीर है।
NationPress
14/01/2026

Frequently Asked Questions

राजगीर में मकर मेला कब शुरू हुआ?
मकर मेला 14 जनवरी को शुरू हुआ।
इस मेले का उद्घाटन किसने किया?
इस मेले का उद्घाटन ग्रामीण विकास विभाग और परिवहन मंत्री श्रवण कुमार ने किया।
मकर मेले का धार्मिक महत्व क्या है?
यह मेला धार्मिक समरसता और स्थानीय परंपराओं का प्रतीक है।
क्या यह मेला केवल धार्मिक है?
नहीं, यह मेला सांस्कृतिक धरोहर और विकास का भी प्रतीक है।
क्या मकर मेला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध है?
हाँ, यह मेला अब अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों का भी केंद्र बन चुका है।
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