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भीषण गर्मी में बिहार के 5 ठंडे पर्यटन स्थल: परेवा दह से घोड़ा कटोरा तक सुकून की तलाश

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भीषण गर्मी में बिहार के 5 ठंडे पर्यटन स्थल: परेवा दह से घोड़ा कटोरा तक सुकून की तलाश

सारांश

45°C की तपती गर्मी में बिहार छुपाए बैठा है कई ठंडे राज़ — वाल्मीकि के जंगलों में परेवा दह की कलकल से लेकर राजगीर की ऐतिहासिक घोड़ा कटोरा झील तक। रामसर दर्जा पाई उदयपुर झील और पटना के बीचोंबीच राजधानी जलाशय भी इस सूची में शामिल हैं।

मुख्य बातें

परेवा दह ( पश्चिम चंपारण ): वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के गोवर्धना रेंज में स्थित, वाइल्डलाइफ फोटोग्राफी के लिए आदर्श।
उदयपुर झील : 319 हेक्टेयर में फैली, हाल ही में रामसर साइट घोषित; 280+ पौधे व 35+ प्रवासी पक्षी।
ललभेतिया गिरि दर्शन : मंगुराहा रेंज में प्रसिद्ध सनसेट पॉइंट, तीन परतों वाले जंगलों का नज़ारा।
घोड़ा कटोरा झील ( राजगीर ): महाभारत काल से जुड़ी मानी जाती है, जैव विविधता संरक्षण का उदाहरण।
राजधानी जलाशय ( पटना ): 12 एकड़ में फैला, पुराने सचिवालय परिसर में, प्रवासी पक्षियों का ठिकाना।
देश में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के करीब; बिहार के ये स्थल प्राकृतिक ठंडक के लिए सुलभ विकल्प।

बिहार के 5 प्रमुख प्राकृतिक पर्यटन स्थल इस भीषण गर्मी में राहत का सबसे बेहतर विकल्प बन रहे हैं। देशभर में 20 मई 2026 तक तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुँच चुका है और लू का प्रकोप जारी है। ऐसे में वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के घने जंगलों से लेकर राजगीर की ऐतिहासिक झीलों तक, बिहार में प्राकृतिक ठंडक, हरियाली और शांत वातावरण की कोई कमी नहीं है।

परेवा दह — जंगल की गोद में जल का सुकून (पश्चिम चंपारण)

वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के गोवर्धना फॉरेस्ट रेंज में स्थित परेवा दह प्रकृति प्रेमियों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं। स्थानीय भाषा में 'परेवा' का अर्थ कबूतर और 'दह' का अर्थ जल स्रोत है। घने जंगलों के बीच कलकल बहता पानी और चारों ओर फैली हरियाली यहाँ आते ही मन को तरोताजा कर देती है।

वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर्स और प्रकृति प्रेमियों के लिए यह स्थान विशेष रूप से आकर्षक है। पश्चिम चंपारण में स्थित इस जगह तक पहुँचने के लिए बेतिया या नरकटियागंज रेलवे स्टेशन सबसे सुविधाजनक मार्ग है, जहाँ से टैक्सी या स्थानीय वाहन द्वारा गोवर्धना रेंज पहुँचा जा सकता है।

उदयपुर झील — रामसर साइट का शांत सौंदर्य (पश्चिम चंपारण)

उदयपुर वन्यजीव अभयारण्य के भीतर स्थित उदयपुर झील एक खूबसूरत ऑक्सबो झील है, जिसे हाल ही में रामसर साइट घोषित किया गया है। 319 हेक्टेयर में फैले इस क्षेत्र में 280 से अधिक पौधों की प्रजातियाँ और 35 से ज़्यादा प्रवासी पक्षी पाए जाते हैं।

झील के किनारे जामुन के पेड़ और घनी वनस्पति इसे गर्मियों में भी ठंडक भरा स्थल बनाती है। बेतिया या नरकटियागंज से सड़क मार्ग द्वारा यहाँ आसानी से पहुँचा जा सकता है। गौरतलब है कि रामसर दर्जा मिलने के बाद इस झील की अंतरराष्ट्रीय पहचान और भी बढ़ी है।

ललभेतिया गिरि दर्शन — सूर्यास्त का मनमोहक सनसेट पॉइंट (पश्चिम चंपारण)

वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के मंगुराहा रेंज में स्थित ललभेतिया गिरि दर्शन एक प्रसिद्ध सनसेट पॉइंट है। यहाँ से तीन परतों वाले घने जंगलों का मनमोहक नज़ारा दिखता है और शाम के समय सूर्यास्त देखने के लिए यह स्थान विशेष रूप से लोकप्रिय है।

ठंडी हवाएँ और शांत जंगल गर्मी से राहत देने के साथ-साथ रोमांच भी प्रदान करते हैं। यह स्थान मंगुराहा से गोवर्धना जाने वाले मार्ग पर पड़ता है। बेतिया या वाल्मीकि नगर से कार या कैब द्वारा यहाँ पहुँचा जा सकता है।

घोड़ा कटोरा झील — राजगीर की ऐतिहासिक विरासत

राजगीर में स्थित घोड़ा कटोरा झील अपने कटोरे जैसे आकार और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए जानी जाती है। यह झील न केवल प्राकृतिक दृष्टि से बल्कि सांस्कृतिक महत्व की दृष्टि से भी विशेष है — इसे महाभारत काल से जुड़ा माना जाता है।

गर्मियों में यहाँ की ठंडी हवा और शांत माहौल पर्यटकों को विशेष रूप से आकर्षित करता है। यह जैव विविधता संरक्षण का भी एक उल्लेखनीय उदाहरण है। पटना या आसपास के शहरों से बस अथवा टैक्सी द्वारा यहाँ पहुँचा जा सकता है।

राजधानी जलाशय — पटना के बीच शहरी ठंडक

पटना के पुराने सचिवालय परिसर में स्थित राजधानी जलाशय 12 एकड़ में फैला हुआ है। गर्मियों में यह शहरवासियों के लिए ठंडक का एक सुलभ ठिकाना है। यहाँ कई प्रवासी पक्षी आकर जलाशय के सौंदर्य को और बढ़ा देते हैं।

शाम के समय टहलना और पक्षियों को निहारना यहाँ का एक विशेष आकर्षण है। शहर के मध्य स्थित होने के कारण लोकल ऑटो, ई-रिक्शा या निजी वाहन से यहाँ पहुँचना बेहद आसान है। यह ऐसे समय में आया है जब शहरी हरित स्थलों की माँग पटना जैसे बड़े शहरों में तेज़ी से बढ़ रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन उदयपुर झील का रामसर दर्जा और वाल्मीकि टाइगर रिजर्व की समृद्ध जैव विविधता यह साबित करती है कि राज्य में इको-टूरिज्म की अपार संभावनाएँ हैं। विडंबना यह है कि इन स्थलों की बुनियादी सुविधाएँ — सड़क संपर्क, आवास, साइनेज — अभी भी उनकी क्षमता से कोसों पीछे हैं। जब तक राज्य सरकार इन स्थलों के प्रचार और बुनियादी ढाँचे में ठोस निवेश नहीं करती, ये रत्न केवल स्थानीय पर्यटकों तक ही सीमित रहेंगे और राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर अपनी उचित जगह बनाने से वंचित रह जाएंगे।
RashtraPress
19 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

परेवा दह कहाँ स्थित है और वहाँ कैसे पहुँचें?
परेवा दह बिहार के पश्चिम चंपारण जिले में वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के गोवर्धना फॉरेस्ट रेंज में स्थित है। बेतिया या नरकटियागंज रेलवे स्टेशन से टैक्सी या स्थानीय वाहन द्वारा गोवर्धना रेंज तक पहुँचा जा सकता है।
उदयपुर झील को रामसर साइट का दर्जा क्यों मिला?
उदयपुर झील को रामसर साइट घोषित किया गया है क्योंकि यह 319 हेक्टेयर में फैली ऑक्सबो झील है जिसमें 280 से अधिक पौधों की प्रजातियाँ और 35 से ज़्यादा प्रवासी पक्षी पाए जाते हैं। यह दर्जा उन आर्द्रभूमियों को दिया जाता है जो अंतरराष्ट्रीय महत्व की जैव विविधता रखती हैं।
घोड़ा कटोरा झील राजगीर में क्यों प्रसिद्ध है?
घोड़ा कटोरा झील अपने कटोरे जैसे अनूठे आकार, चारों ओर हरियाली और शांत वातावरण के लिए प्रसिद्ध है। इसे महाभारत काल से जुड़ा माना जाता है और यह जैव विविधता संरक्षण का भी एक उल्लेखनीय उदाहरण है।
पटना में गर्मी से राहत के लिए कौन-सी जगह जाएँ?
पटना के पुराने सचिवालय परिसर में स्थित राजधानी जलाशय 12 एकड़ में फैला है और गर्मियों में शहरवासियों के लिए ठंडक का सुलभ ठिकाना है। लोकल ऑटो, ई-रिक्शा या निजी वाहन से यहाँ आसानी से पहुँचा जा सकता है।
बिहार में गर्मियों में घूमने के लिए सबसे अच्छे प्राकृतिक स्थल कौन-से हैं?
बिहार में गर्मियों में परेवा दह, उदयपुर झील, ललभेतिया गिरि दर्शन, घोड़ा कटोरा झील (राजगीर) और राजधानी जलाशय (पटना) प्रमुख प्राकृतिक पर्यटन स्थल हैं। ये सभी स्थान प्राकृतिक ठंडक, हरियाली और शांत वातावरण के लिए जाने जाते हैं।
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