बिहार की पांच अद्भुत जगहें: तेलहर जलप्रपात से तुतला भवानी झरना तक

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बिहार की पांच अद्भुत जगहें: तेलहर जलप्रपात से तुतला भवानी झरना तक

सारांश

बिहार, प्राकृतिक और ऐतिहासिक धरोहरों से भरपूर, में घूमने के लिए अनोखी जगहें हैं। जानें बिहार दिवस पर कुछ अद्भुत स्थलों के बारे में।

मुख्य बातें

बिहार की प्राकृतिक सुंदरता अद्वितीय है।
प्रकृति प्रेमियों के लिए कई पिकनिक स्थल उपलब्ध हैं।
धार्मिक और ऐतिहासिक स्थल भी यहां के आकर्षण में शामिल हैं।
बिहार का पर्यटन स्थलों की विविधता इसे खास बनाती है।
स्थानीय संस्कृति और परंपराएं यहां की पहचान हैं।

पटना, 22 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। बिहार एक ऐसा राज्य है जो अपनी प्राकृतिक, ऐतिहासिक और आध्यात्मिक धरोहर में समृद्ध है। यह न केवल प्राचीन इतिहास और समृद्ध संस्कृति का गढ़ है, बल्कि प्रकृति प्रेमियों के लिए भी एक अद्भुत स्थान है। यहां गंगा की पवित्र धारा, शांत पहाड़ियां, झरने, प्राचीन मंदिर और जीवंत लोककला का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। यह विविधता बिहार को पर्यटन के दृष्टिकोण से एक अनोखा और आकर्षक स्थान बनाती है। 'बिहार दिवस' के अवसर पर जानते हैं उन पांच खूबसूरत जगहों के बारे में, जहां प्रकृति, श्रद्धा और इतिहास का अद्भुत मेल देखने को मिलता है।

तेलहर जलप्रपात: कैमूर की पहाड़ियों में स्थित तेलहर कुंड एक अद्वितीय प्राकृतिक उपहार है। यहां से गिरता झरना दूर से तेल की तरह चमकता है, इसलिए इसका नाम तेलहर पड़ा है। चारों ओर हरे-भरे जंगल, ठंडी हवा और शांत वातावरण इसे पिकनिक और ट्रैकिंग के लिए आदर्श बनाते हैं। गर्मियों में यह जलप्रपात ठंडक और सुकून देता है। प्रकृति प्रेमियों और फोटोग्राफर्स के लिए यह स्थान स्वर्ग के समान है।

तेलहर जलप्रपात भभुआ में दुर्गावती नदी के निकट है। यह जलप्रपात भभुआ क्षेत्र से लगभग 32 किलोमीटर और मोहनिया क्षेत्र से लगभग 47 किलोमीटर दूर अवस्थित है। जलप्रपात के पास कई दर्शनीय स्थल हैं, जिनमें मां मुंडेश्वरी का मंदिर भी शामिल है, जो यहां से 28 किलोमीटर दूर है। साथ ही, करमचट नाम का एक बांध भी यहां स्थित है। यह जगह परिवार या दोस्तों के साथ पिकनिक मनाने के लिए एकदम सही है।

प्रह्लाद स्तंभ: पूर्णिया जिले में स्थित प्रह्लाद स्तंभ धार्मिक और पौराणिक महत्व का केंद्र है। मान्यता के अनुसार, यहीं भगवान नरसिंह ने भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए अवतार लिया था। हर साल होलिका दहन पर यहां भव्य मेला लगता है। यह स्थान भक्ति और उल्लास का प्रतीक है और पौराणिक कथाओं में रुचि रखने वालों के लिए आकर्षण का केंद्र है।

तुतला भवानी झरना: रोहतास की पहाड़ियों में बसा तुतला भवानी झरना आध्यात्मिक और प्राकृतिक सौंदर्य का अद्भुत संगम है। इसका नाम पास के मां तुतला भवानी मंदिर से जुड़ा है। झरना पहाड़ से गिरता हुआ एक शांत और मनोरम दृश्य प्रस्तुत करता है। आसपास का जंगल और शांत वातावरण ध्यान, योग और प्रकृति प्रेमियों के लिए इसे आदर्श बनाते हैं। यह जगह शांति और भक्ति का अनुभव कराती है।

यह तिलौथू के पास और डेहरी-ऑन-सोन से लगभग 20 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में स्थित है। उत्तर-पश्चिम और दक्षिण-पूर्व में दो बड़े पहाड़ हैं। इन पहाड़ों के बीच में एक झरना है और घाटी के बीच से कछुआर नदी बहती है। यहां घूमने का सबसे अच्छा समय जून से अगस्त तक का है।

कैमूर की पहाड़ियां: कैमूर जिले की पहाड़ियां बिहार की प्राकृतिक सुंदरता का शांत और मनमोहक रूप प्रस्तुत करती हैं। घने जंगल, झरने, घाटियां और हरी-भरी ढलानें यहां का नजारा बनाती हैं। ट्रैकिंग, कैंपिंग और पक्षी अवलोकन के शौकीनों के लिए यहां कई रास्ते हैं। सुबह की धुंध और शाम की सुनहरी रोशनी में ये पहाड़ियां बेहद खूबसूरत नजर आती हैं। यहां की शांति और ताजगी मन को सुकून देती है।

दरभंगा किला: दरभंगा का शाही किला, जिसे राज किला भी कहा जाता है, का निर्माण 20वीं शताब्दी की शुरुआत में दरभंगा के महाराजा सर कामेश्वर सिंह ने करवाया था। यह किला कभी दरभंगा राज परिवार का आलीशान निवास था। इसकी दीवारें और महल आज भी शाही वैभव की कहानी सुनाते हैं। यहां मिथिला पेंटिंग, लोक संगीत और परंपराओं का संगम देखने को मिलता है। इतिहास प्रेमियों और संस्कृति रसिकों के लिए यह स्थान अवश्य देखने योग्य है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि ये देश के पर्यटन मानचित्र पर भी महत्वपूर्ण स्थान रखती हैं। यहां की विविधता और सांस्कृतिक समृद्धि इसे एक अद्वितीय गंतव्य बनाते हैं।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तेलहर जलप्रपात कहां स्थित है?
तेलहर जलप्रपात कैमूर की पहाड़ियों में स्थित है।
प्रह्लाद स्तंभ का धार्मिक महत्व क्या है?
यहां भगवान नरसिंह ने भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए अवतार लिया था।
तुतला भवानी झरना किससे जुड़ा है?
यह झरना मां तुतला भवानी मंदिर से संबंधित है।
दरभंगा किला कब बना था?
यह किला 20वीं शताब्दी की शुरुआत में बना था।
बिहार में घूमने का सबसे अच्छा समय कब है?
बिहार में घूमने का सबसे अच्छा समय जून से अगस्त तक है।
राष्ट्र प्रेस
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