10 अगस्त 2026
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नौसेना प्रमुख एडमिरल स्वामीनाथन मॉरीशस दौरे पर, समुद्री सुरक्षा और रक्षा सहयोग होगा मज़बूत

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नौसेना प्रमुख एडमिरल स्वामीनाथन मॉरीशस दौरे पर, समुद्री सुरक्षा और रक्षा सहयोग होगा मज़बूत

सारांश

नौसेना प्रमुख का पद संभालने के बाद एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन की मॉरीशस की यह पहली यात्रा महज़ शिष्टाचार नहीं — यह हिंद महासागर में भारत की बढ़ती रणनीतिक पकड़ का संकेत है। समुद्री निगरानी से लेकर संयुक्त अभ्यास तक, दोनों देशों की साझेदारी 'महासागर' दृष्टिकोण की धुरी बन रही है।

मुख्य बातें

एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन 10 से 13 अगस्त 2026 तक मॉरीशस की आधिकारिक यात्रा पर हैं — नौसेना प्रमुख बनने के बाद उनकी पहली मॉरीशस यात्रा।
यात्रा का फोकस समुद्री सुरक्षा , रक्षा सहयोग , क्षमता निर्माण और सैन्य-से-सैन्य संपर्क पर है।
भारतीय नौसेना मॉरीशस के राष्ट्रीय तटरक्षक बल के साथ संयुक्त निगरानी, प्रशिक्षण और जल सर्वेक्षण नियमित रूप से करती है।
मॉरीशस IONS , मिलान , IOS सागर और अभ्यास ऐकीमे सहित भारत की प्रमुख नौसैनिक पहलों में सक्रिय भागीदार है।
यह यात्रा भारत के 'महासागर' दृष्टिकोण के तहत हिंद महासागर क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी को मज़बूत करने की कड़ी है।

भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन 10 अगस्त 2026 को मॉरीशस की चार दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर रवाना हुए। यह दौरा 13 अगस्त तक चलेगा और नौसेना प्रमुख का पदभार संभालने के बाद मॉरीशस की उनकी यह पहली यात्रा है। हिंद महासागर क्षेत्र में भारत के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री साझेदारों में से एक मॉरीशस के साथ द्विपक्षीय रक्षा संबंधों को और गहरा करना इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य है।

यात्रा का एजेंडा और प्रमुख बैठकें

नौसेना के अनुसार, एडमिरल स्वामीनाथन मॉरीशस सरकार के वरिष्ठ नेतृत्व के साथ उच्चस्तरीय वार्ता करेंगे। इन बैठकों में समुद्री सुरक्षा, रक्षा सहयोग, क्षमता निर्माण और सैन्य-से-सैन्य संपर्क जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा होने की संभावना है। यह यात्रा दोनों देशों की सेनाओं के बीच परिचालन स्तर पर समन्वय को और सुदृढ़ करने का अवसर भी प्रदान करेगी।

भारत-मॉरीशस समुद्री साझेदारी की पृष्ठभूमि

भारत और मॉरीशस के बीच समुद्री क्षेत्र में दशकों पुरानी साझेदारी रही है। भारतीय नौसेना मॉरीशस के राष्ट्रीय तटरक्षक बल के साथ नियमित रूप से प्रशिक्षण आदान-प्रदान, संयुक्त विशेष आर्थिक क्षेत्र निगरानी, बंदरगाह यात्राएँ और जल सर्वेक्षण जैसी गतिविधियाँ संचालित करती है। यह ऐसे समय में आया है जब हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक भूमिका लगातार विस्तृत हो रही है।

बहुपक्षीय मंचों पर मॉरीशस की भागीदारी

मॉरीशस भारतीय नौसेना की कई प्रमुख पहलों में सक्रिय भागीदार रहा है। इनमें हिंद महासागर नौसेना संगोष्ठी (IONS), मिलान, अंतरराष्ट्रीय बेड़ा समीक्षा, गोवा समुद्री सम्मेलन, IOS सागर और अभ्यास ऐकीमे शामिल हैं। गौरतलब है कि इन मंचों पर मॉरीशस की निरंतर उपस्थिति दोनों देशों के बीच साझा समुद्री हितों की गहराई को दर्शाती है।

भारत के 'महासागर' दृष्टिकोण से जुड़ाव

भारत और मॉरीशस के बीच यह समुद्री सहयोग भारत के 'महासागर' (MAHASAGAR) दृष्टिकोण के अनुरूप है, जिसका लक्ष्य क्षेत्र में सुरक्षा और विकास के लिए साझा प्रयासों को आगे बढ़ाना है। मॉरीशस की रणनीतिक भौगोलिक स्थिति — हिंद महासागर के मध्य में — उसे भारत की समुद्री कूटनीति में विशेष महत्व देती है। इस यात्रा से समुद्री स्थिरता, क्षेत्रीय सुरक्षा और आर्थिक विकास के लिए नए सहयोग के अवसर तलाशे जाएंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि इस क्षेत्र में सहयोग की घोषणाएँ अक्सर क्रियान्वयन से आगे निकल जाती हैं।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन की मॉरीशस यात्रा का उद्देश्य क्या है?
यह यात्रा भारत और मॉरीशस के बीच समुद्री सुरक्षा, रक्षा सहयोग और क्षमता निर्माण को मज़बूत करने के लिए है। नौसेना प्रमुख का पद संभालने के बाद यह मॉरीशस की उनकी पहली आधिकारिक यात्रा है।
एडमिरल स्वामीनाथन की मॉरीशस यात्रा कब से कब तक है?
यह यात्रा 10 अगस्त से 13 अगस्त 2026 तक चार दिनों की है। इस दौरान वे मॉरीशस सरकार के वरिष्ठ नेतृत्व से मुलाकात करेंगे।
भारत और मॉरीशस के बीच समुद्री सहयोग में क्या-क्या शामिल है?
भारतीय नौसेना और मॉरीशस का राष्ट्रीय तटरक्षक बल संयुक्त विशेष आर्थिक क्षेत्र निगरानी, प्रशिक्षण आदान-प्रदान, बंदरगाह यात्राएँ और जल सर्वेक्षण नियमित रूप से करते हैं। दोनों देश IONS, मिलान और अभ्यास ऐकीमे जैसे बहुपक्षीय मंचों पर भी साथ भाग लेते हैं।
भारत का 'महासागर' दृष्टिकोण क्या है और मॉरीशस इसमें कैसे फिट होता है?
'महासागर' (MAHASAGAR) भारत का हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा और विकास के लिए साझा सहयोग का दृष्टिकोण है। मॉरीशस की रणनीतिक भौगोलिक स्थिति के कारण वह इस दृष्टिकोण में एक प्रमुख साझेदार की भूमिका निभाता है।
हिंद महासागर क्षेत्र में भारत-मॉरीशस साझेदारी क्यों महत्वपूर्ण है?
मॉरीशस हिंद महासागर के मध्य में स्थित है, जो उसे समुद्री निगरानी और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिहाज़ से रणनीतिक रूप से अहम बनाता है। भारत के लिए यह साझेदारी क्षेत्र में शांति, स्थिरता और अपने समुद्री हितों की रक्षा के लिए ज़रूरी है।
राष्ट्र प्रेस
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