नौसेना प्रमुख एडमिरल स्वामीनाथन ने मॉरीशस PM रामगूलाम से की मुलाकात, समुद्री सुरक्षा सहयोग पर चर्चा
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन ने 12 अगस्त 2026 को मॉरीशस के प्रधानमंत्री डॉ. नवीनचंद्र रामगूलाम से मुलाकात की। इस बैठक में दोनों देशों के बीच समुद्री सुरक्षा सहयोग को और सुदृढ़ करने तथा भारतीय नौसेना एवं मॉरीशस राष्ट्रीय तटरक्षक बल के बीच परिचालन सहयोग बढ़ाने पर विस्तृत चर्चा हुई। एडमिरल स्वामीनाथन इन दिनों मॉरीशस की आधिकारिक यात्रा पर हैं।
बैठक में क्या हुई चर्चा
बैठक में मॉरीशस में भारत के उच्चायुक्त अनुराग श्रीवास्तव भी उपस्थित रहे। दोनों पक्षों के बीच समुद्री सुरक्षा, प्रशिक्षण के आदान-प्रदान, सूचना साझाकरण व्यवस्था, क्षमता निर्माण और परिचालन स्तर पर सहयोग को मज़बूत करने पर विशेष ज़ोर दिया गया। यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा के मोर्चे पर क्षेत्रीय सहयोग की माँग लगातार बढ़ रही है।
भारत की प्रतिबद्धता
बैठक के दौरान एडमिरल स्वामीनाथन ने प्रधानमंत्री रामगूलाम को आश्वस्त किया कि भारतीय नौसेना, मॉरीशस पुलिस बल और मॉरीशस राष्ट्रीय तटरक्षक बल की क्षमताओं को बढ़ाने में पूर्ण सहयोग, सहायता और समर्थन जारी रखेगी। उन्होंने क्षमता निर्माण के प्रयासों को भारत की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता का हिस्सा बताया।
भारत-मॉरीशस समुद्री साझेदारी की पृष्ठभूमि
मॉरीशस, हिंद महासागर में भारत का एक रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण समुद्री साझेदार है। दोनों देशों के बीच प्रशिक्षण, सूचना साझाकरण और संयुक्त क्षमता निर्माण के स्तर पर लंबे समय से घनिष्ठ सहयोग रहा है। गौरतलब है कि यह यात्रा उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत भारत हिंद महासागर क्षेत्र के अपने समुद्री साझेदार देशों के साथ सुरक्षा सहयोग को निरंतर मज़बूत कर रहा है।
उदार शक्ति 2026: भारत-मलेशिया वायु सेना अभ्यास
इसी क्रम में, भारतीय वायु सेना और रॉयल मलेशियन एयर फोर्स के बीच द्विपक्षीय सैन्य अभ्यास 'उदार शक्ति 2026' मलेशिया के सुबांग एयरबेस में आयोजित किया जा रहा है। इस अभ्यास का उद्देश्य दोनों वायु सेनाओं के बीच परिचालन सहयोग, आपसी तालमेल और सैन्य अनुभवों के आदान-प्रदान को सुदृढ़ करना है। अभ्यास के दौरान दोनों देशों के वायु योद्धा संयुक्त मैदानी प्रशिक्षण में भाग ले रहे हैं और विभिन्न विषयों के विशेषज्ञों के बीच सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों का आदान-प्रदान भी हो रहा है।
क्या होगा आगे
एडमिरल स्वामीनाथन की इस यात्रा से दोनों देशों के समुद्री सुरक्षा संस्थानों के बीच परिचालन संबंध और गहरे होने की उम्मीद है। समुद्री क्षेत्र में सूचना साझाकरण और संयुक्त क्षमता निर्माण को आगे बढ़ाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाने की संभावना है, जो हिंद महासागर में क्षेत्रीय स्थिरता के लिए दीर्घकालिक महत्व रखते हैं।