भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल त्रिपाठी की म्यांमार रक्षामंत्री से नेपीडॉ में बैठक, द्विपक्षीय सुरक्षा सहयोग पर चर्चा
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी ने 4 मई 2026 को नेपीडॉ में म्यांमार के रक्षामंत्री जनरल हटुन आंग से मुलाकात की और दोनों देशों के बीच रक्षा संबंधों की मौजूदा स्थिति तथा भविष्य के सहयोग पर विस्तृत चर्चा की। चीफ ऑफ नेवल स्टाफ (CNS) एडमिरल त्रिपाठी म्यांमार के चार दिवसीय आधिकारिक दौरे पर हैं, जो मंगलवार को समाप्त होगा।
बैठक में क्या हुई चर्चा
भारतीय नौसेना के प्रवक्ता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से बताया कि एडमिरल त्रिपाठी और जनरल हटुन आंग के बीच हुई बातचीत में भारत-म्यांमार रक्षा संबंधों की समीक्षा की गई। दोनों पक्षों ने भविष्य में किन नए क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया जाए, इस पर भी विचार-विमर्श किया। बैठक में इस बात पर सहमति जताई गई कि दोनों देशों का रक्षा सहयोग क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
चल रही संयुक्त गतिविधियों और भविष्य में मिलकर काम करने के नए तरीकों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। भारतीय नौसेना के अनुसार, इस बातचीत से स्पष्ट है कि दोनों देशों की साझेदारी लगातार सुदृढ़ हो रही है।
म्यांमार नौसेना के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात
रविवार को एडमिरल त्रिपाठी ने म्यांमार नौसेना के सेंट्रल नेवल कमांड के प्रमुख रियर एडमिरल आंग आंग नाइंग और ट्रेनिंग कमांड के प्रमुख रियर एडमिरल खुन आंग क्याव से भी मुलाकात की। इन बैठकों में दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच सहयोग बढ़ाने, रक्षा साझेदारी को मजबूत करने और ऑपरेशनल गतिविधियों को बेहतर बनाने पर विचार-विमर्श हुआ।
यांगून में सेंट्रल नेवल कमांड मुख्यालय पर एडमिरल त्रिपाठी को गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया, जो इस दौरे के कूटनीतिक महत्व को रेखांकित करता है।
भारत की ओर से सौंपे गए उपकरण और परियोजनाएँ
एडमिरल त्रिपाठी ने म्यांमार नेवल ट्रेनिंग कमांड का दौरा किया, जहाँ उन्होंने भारत की सहायता से तैयार की गई कुछ परियोजनाएँ सौंपीं। इस अवसर पर उन्होंने कंटेनराइज्ड स्मॉल आर्म्स सिमुलेटर और रिजिड इन्फ्लेटेबल बोट भी हस्तांतरित किए, जो बंगाल की खाड़ी में समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने में सहायक होंगे।
उन्होंने 'मोबाइल ट्रेनिंग टीम' के कार्य की सराहना की और स्पष्ट किया कि भारत म्यांमार की क्षमता निर्माण और पेशेवर सहयोग के लिए प्रतिबद्ध है। गौरतलब है कि यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को लेकर क्षेत्रीय देशों के बीच सहयोग बढ़ाने की ज़रूरत पहले से कहीं अधिक महसूस की जा रही है।
द्विपक्षीय संबंधों का महत्व
भारतीय नौसेना के अनुसार, यह दौरा भारत और म्यांमार के दीर्घकालिक एवं सुदृढ़ संबंधों को और प्रगाढ़ बनाता है। यह साझेदारी आपसी सम्मान, विश्वास और हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा बनाए रखने की साझा प्रतिबद्धता पर आधारित है। दोनों पक्षों ने प्रशिक्षण को और उन्नत बनाने तथा भविष्य में नए सहयोग के अवसर तलाशने पर भी सहमति जताई।
आगे क्या
एडमिरल त्रिपाठी का यह दौरा मंगलवार को समाप्त होगा। इस दौरे से उभरे सहमति-बिंदु आने वाले महीनों में दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच संयुक्त अभ्यास और क्षमता-निर्माण कार्यक्रमों की दिशा तय करेंगे।