नौसेना प्रमुख एडमिरल स्वामीनाथन की मॉरीशस यात्रा: समुद्री सुरक्षा व EEZ निगरानी पर अहम बातचीत
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन 11 अगस्त 2026 से मॉरीशस की आधिकारिक यात्रा पर हैं, जिसके दौरान उन्होंने हिंद महासागर में द्विपक्षीय समुद्री सुरक्षा सहयोग को नई दिशा देने के लिए मॉरीशस के शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों से मुलाकात की। इस यात्रा का केंद्रीय उद्देश्य दोनों देशों के बीच समुद्री समन्वय को और अधिक प्रभावी बनाना है।
किन अधिकारियों से हुई मुलाकात
यात्रा के प्रारंभिक चरण में एडमिरल स्वामीनाथन ने मॉरीशस सरकार में गृह एवं रक्षा मामलों की सचिव कान ओए फोंग वेंग-पूर्न, मॉरीशस पुलिस बल के पुलिस आयुक्त रामप्रसाद सूरूजीबली और मॉरीशस में भारत के उच्चायुक्त अनुराग श्रीवास्तव से अलग-अलग बैठकें कीं। ये बैठकें समुद्री सहयोग के ठोस ढाँचे को विस्तार देने की दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।
मुख्य चर्चा बिंदु
भारतीय नौसेना के अनुसार, बातचीत में मॉरीशस के राष्ट्रीय तटरक्षक बल की क्षमता बढ़ाने, दोनों देशों के विशेष आर्थिक क्षेत्रों (EEZ) की संयुक्त निगरानी, और समुद्री सुरक्षा बलों के बीच परिचालन संपर्क के विस्तार पर विशेष ज़ोर दिया गया। इसके साथ ही समुद्री क्षेत्र में सूचनाओं के आदान-प्रदान और संयुक्त अभियानों की संभावनाओं पर भी विचार किया गया।
यह ऐसे समय में आया है जब हिंद महासागर क्षेत्र में अवैध मछली पकड़ने, तस्करी और अन्य गैर-पारंपरिक समुद्री खतरों में वृद्धि देखी जा रही है। दोनों पक्षों ने माना कि इन चुनौतियों से निपटने के लिए बेहतर परिचालन समन्वय अनिवार्य है।
भारत-मॉरीशस समुद्री साझेदारी की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि भारत और मॉरीशस के बीच पहले से ही प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण, समुद्री निगरानी और संयुक्त गतिविधियों के क्षेत्र में सहयोग होता रहा है। मॉरीशस हिंद महासागर में रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान पर स्थित है, और उसके तटरक्षक बल को सशक्त करना भारत की व्यापक क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा नीति का अभिन्न हिस्सा है।
यह सहयोग भारत की 'महासागर' (क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास) विजन के अनुरूप है, जो हिंद महासागर में एक स्थिर और सुरक्षित समुद्री वातावरण सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
यात्रा का महत्व और आगे की राह
एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन 13 अगस्त 2026 तक मॉरीशस में रहेंगे। इस यात्रा को दोनों देशों के समुद्री सुरक्षा संबंधों को नई ऊँचाई देने की दिशा में एक निर्णायक कदम माना जा रहा है। नई बातचीत के बाद दोनों देशों के समुद्री सुरक्षा तंत्र के बीच परिचालन संपर्क और साझा निगरानी तंत्र को और मज़बूत किए जाने की उम्मीद है।