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सीईसी ज्ञानेश कुमार पर नवीन पटनायक का हमला: बीजेडी ने मांगा तत्काल इस्तीफा, SIR की समीक्षा की माँग

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सीईसी ज्ञानेश कुमार पर नवीन पटनायक का हमला: बीजेडी ने मांगा तत्काल इस्तीफा, SIR की समीक्षा की माँग

सारांश

बीजेडी के नवीन पटनायक और ओडिशा कांग्रेस ने एकसाथ सीईसी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग की। मतदाता सूची की एसआईआर प्रक्रिया और कथित आंतरिक मतभेदों को लेकर चुनाव आयोग के भीतर गहरा संकट उभर रहा है — और यह विवाद लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है।

मुख्य बातें

नवीन पटनायक (बीजेडी अध्यक्ष) ने 25 सितंबर 2026 को सीईसी ज्ञानेश कुमार का तत्काल इस्तीफा माँगा।
विवाद की जड़ में मतदाता सूची का विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) है, जिसे विपक्ष शुरू से विवादास्पद बताता रहा है।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों में 14 बार आयोग के निर्णयों पर लिखित आपत्ति दर्ज कराई।
ओडिशा प्रदेश कांग्रेस ने पावर हाउस स्क्वायर से मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय तक रैली का आयोजन किया और महाभियोग की माँग की।
कांग्रेस नेता अरबिंद दास ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार चुनाव आयोग का इस्तेमाल 'चुनावी प्रक्रिया में हेरफेर' के लिए कर रही है।
चुनाव आयोग की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

बीजू जनता दल (बीजेडी) के अध्यक्ष और ओडिशा विधानसभा में विपक्ष के नेता नवीन पटनायक ने 25 सितंबर 2026 को मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे की माँग की। यह माँग चुनाव आयोग (ईसीआई) के भीतर मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (एसआईआर), नए मतदाता पंजीकरण और मतदाता आँकड़ों से जुड़े निर्णयों पर कथित आंतरिक मतभेदों की मीडिया रिपोर्टों के बाद उठाई गई है।

पटनायक का सीधा आरोप

मीडिया से बातचीत में पटनायक ने कहा, 'दोनों चुनाव आयुक्तों और मुख्य चुनाव आयुक्त के बीच गंभीर मतभेदों के कारण, सीईसी को तत्काल इस्तीफा देना चाहिए और पूरी एसआईआर प्रक्रिया की गहन समीक्षा की जानी चाहिए।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बीजेडी शुरू से ही इस एसआईआर प्रक्रिया के खिलाफ रही है।

गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब किसी प्रमुख राजनीतिक दल ने एसआईआर पर सवाल उठाए हों — लेकिन बीजेडी जैसे क्षेत्रीय दल का इस मुद्दे पर राष्ट्रीय स्तर पर खड़े होना इस विवाद की गंभीरता को रेखांकित करता है।

कांग्रेस की रैली और महाभियोग की माँग

इससे पहले ओडिशा प्रदेश कांग्रेस कमेटी (ओपीसीसी) ने घोषणा की थी कि वह पावर हाउस स्क्वायर से मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय तक एक विशाल रैली का आयोजन करेगी। इस रैली में सीईसी ज्ञानेश कुमार को हटाने और एसआईआर को रद्द करने की माँग की जाएगी।

कांग्रेस भवन में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस नेता अरबिंद दास ने आरोप लगाया कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पिछले तीन वर्षों से जो 'वोट चोरी' के आरोप लगाते आ रहे हैं, वह अब खोजी मीडिया रिपोर्टों से कथित तौर पर प्रमाणित होते दिख रहे हैं। दास ने यह भी आरोप लगाया कि मोदी सरकार चुनाव आयोग को 'चुनावी प्रक्रिया में हेरफेर के लिए हथियार के रूप में' इस्तेमाल कर रही है।

चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों का मामला

विवाद की जड़ में एक मीडिया रिपोर्ट है जिसमें दावा किया गया है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में 14 बार आयोग के विभिन्न निर्णयों पर लिखित आपत्ति दर्ज कराई, जो कथित तौर पर उनकी जानकारी के बिना लिए गए थे। अरबिंद दास के अनुसार, सीईसी ने इन आपत्तियों को नजरअंदाज करते हुए एकतरफा निर्णय लिए।

दास ने इस संदर्भ में कहा, 'चुनाव आयोग के दो सदस्यों द्वारा इसके प्रमुख के खिलाफ इतनी गंभीर आपत्तियाँ उठाना यह दर्शाता है कि पूरी व्यवस्था भ्रष्ट हो चुकी है।'

एसआईआर पर राजनीतिक विवाद की पृष्ठभूमि

मतदाता सूची का विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके तहत मतदाता सूचियों की व्यापक समीक्षा की जाती है। विपक्षी दलों ने इस प्रक्रिया पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि यह कमज़ोर तबकों — विशेषकर प्रवासी मज़दूरों और अस्थायी पतों पर रहने वालों — के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने का कारण बन सकती है। यह ऐसे समय में आया है जब कई राज्यों में चुनावी तैयारियाँ तेज़ हो रही हैं।

आगे क्या होगा

अब तक चुनाव आयोग की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। सुप्रीम कोर्ट में एसआईआर से जुड़े मामले पहले से लंबित बताए जा रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद आने वाले हफ्तों में और गहरा हो सकता है, खासकर यदि विपक्षी दल संसद में या न्यायालय के माध्यम से दबाव बनाते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो यह प्रशासनिक कुप्रबंधन से आगे की बात हो जाती है। विपक्ष की माँगें राजनीति से प्रेरित हो सकती हैं, लेकिन इस मीडिया रिपोर्ट के तथ्यों की स्वतंत्र जाँच और आयोग से स्पष्टीकरण अनिवार्य है। एसआईआर को लेकर पारदर्शिता का अभाव ही वह कमज़ोर कड़ी है जिसे विपक्ष बार-बार भुना रहा है — और सरकार की चुप्पी इस खाई को और चौड़ा कर रही है।
RashtraPress
25 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नवीन पटनायक ने सीईसी ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा क्यों माँगा?
नवीन पटनायक ने 25 सितंबर 2026 को सीईसी ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा इसलिए माँगा क्योंकि मीडिया रिपोर्टों में चुनाव आयोग के भीतर गंभीर आंतरिक मतभेदों का खुलासा हुआ है। उनका आरोप है कि एसआईआर प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव है और दोनों चुनाव आयुक्त भी इससे असहमत हैं।
मतदाता सूची की SIR (विशेष गहन संशोधन) प्रक्रिया क्या है?
विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) वह प्रक्रिया है जिसके तहत चुनाव आयोग मतदाता सूचियों की व्यापक समीक्षा कर अपात्र नाम हटाता और नए पात्र मतदाता जोड़ता है। विपक्षी दलों का आरोप है कि इस प्रक्रिया में गड़बड़ियाँ हो रही हैं और कमज़ोर तबकों के वैध मतदाता भी सूची से बाहर हो रहे हैं।
चुनाव आयोग के भीतर किन मुद्दों पर मतभेद सामने आए हैं?
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में 14 बार आयोग के विभिन्न निर्णयों पर लिखित आपत्ति दर्ज कराई है। ये निर्णय मुख्यतः एसआईआर, नए मतदाता पंजीकरण और मतदाता आँकड़ों से संबंधित बताए जा रहे हैं।
ओडिशा कांग्रेस ने इस विवाद में क्या माँगें रखी हैं?
ओडिशा प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने महाभियोग प्रक्रिया के ज़रिए सीईसी ज्ञानेश कुमार को हटाने और त्रुटिपूर्ण मतदाता सूची की एसआईआर को पूरी तरह रद्द करने की माँग की है। इसके लिए पार्टी ने रैली का भी आयोजन किया।
इस विवाद में चुनाव आयोग की क्या प्रतिक्रिया रही है?
अब तक चुनाव आयोग की ओर से विपक्षी दलों के आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। चुनाव आयोग की चुप्पी विवाद को और गहरा करती जा रही है, जबकि सर्वोच्च न्यायालय में एसआईआर से जुड़े मामले कथित तौर पर लंबित हैं।
राष्ट्र प्रेस
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