क्या बिहार में जाड़े से पहले प्रवासी पक्षियों का आगमन और कड़ाके की ठंड की संभावना है?

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
क्या बिहार में जाड़े से पहले प्रवासी पक्षियों का आगमन और कड़ाके की ठंड की संभावना है?

सारांश

बिहार में प्रवासी पक्षियों का समय से पहले आगमन, कड़ाके की ठंड की संभावना को दर्शाता है। जानें इस मौसम में पक्षियों की गतिविधियों के बारे में और कैसे यह पर्यावरण के लिए सकारात्मक संकेत है।

मुख्य बातें

बिहार में प्रवासी पक्षियों का समय से पहले आगमन गर्मियों की ठंड की संभावना को दर्शाता है।
नदियों और तालाबों के संरक्षण में सुधार पक्षियों के लिए अनुकूल है।
प्रवासी पक्षियों की संख्या में बढ़ोतरी की संभावना है।
बड़ा गरुड़ बिहार में प्रमुख प्रजनन स्थलों में से एक है।
पर्यावरण संरक्षण के लिए यह सकारात्मक संकेत है।

‎पटना, 15 सितंबर (राष्ट्र प्रेस)। इस वर्ष बिहार में कड़ाके की ठंड पड़ने की संभावना जताई जा रही है। जाड़े के आगमन से पहले, बिहार के विभिन्न क्षेत्रों में कई प्रवासी पक्षियों का अवलोकन किया जाना एक शुभ संकेत माना जा रहा है।

बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी के अंतर्गत काम कर रहे इंडियन बर्ड कंजरवेशन नेटवर्क के बिहार राज्य कोऑर्डिनेटर एवं पटना राष्ट्रीय डॉल्फिन शोध केंद्र के अंतरिम निदेशक डॉ. गोपाल शर्मा ने सोमवार को बताया कि इस बार प्रवासी पक्षियों का समय से पहले आना सर्दियों में कड़ी ठंड के होने की संभावना को दर्शाता है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रवासी पक्षियों के आगमन की शुरुआत इस बात का संकेत है कि उनकी संख्या में भी वृद्धि हो सकती है।

डॉ. शर्मा ने जानकारी दी कि ग्रे-हेडेड लैपविंग, कॉमन सैंडपाइपर, ग्लॉसी आइबिस, रेड-नेक्ड फाल्कन, स्टॉर्क-बिल्ड किंगफिशर और वाइट वैगटेल जैसी महत्वपूर्ण प्रवासी पक्षियां अब सितंबर के पहले सप्ताह में ही बिहार के मैदानी इलाकों में देखी जा रही हैं, जबकि पहले ये पक्षी सामान्यतः अक्टूबर के मध्य में दिखाई देते थे। इसके पीछे तापमान में बदलाव, मौसम की अनियमितता और जल-आवास के संरक्षण जैसे कारण माने जा रहे हैं।

विशेषज्ञ मानते हैं कि यह बदलाव नदियों, तालाबों, जंगलों और खेतों जैसे प्राकृतिक आवासों की गुणवत्ता में सुधार का संकेत हो सकता है, जिससे पक्षियों को बेहतर रहने और प्रजनन की अनुकूल परिस्थितियां मिल रही हैं। इस प्रकार के सकारात्मक संकेत भविष्य में पक्षी संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण के प्रति आशावाद को बढ़ावा देते हैं।

एशियन वाटर बर्ड सेंसस के डिस्ट्रिक्ट कोऑर्डिनेटर डॉ. ज्ञानी ने बताया कि इस बार बया और गौरैया की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। इसके पीछे प्रमुख कारणों में सर्दियों की तैयारी, फसलों की कटाई के बाद खेतों में उपलब्ध अनाज और कीट-पतंगें, क्षेत्रीय संरक्षण प्रयास और शीतकालीन प्रवासी पक्षियों का माइग्रेशन शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि बड़ा गरुड़, जो अपने घोंसले को चुनने और बनाने में माहिर है, मुख्य रूप से असम के ब्रह्मपुत्र घाटी एवं बिहार के भागलपुर के कदवा दियारा क्षेत्रों में पाया जाता है। वर्तमान में बिहार इस पक्षी के तीन ज्ञात प्रजनन स्थलों में अग्रणी स्थान पर है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस साल बिहार में प्रवासी पक्षियों का आगमन क्यों हुआ?
इस साल का प्रवासी पक्षियों का समय से पहले आगमन तापमान में बदलाव और जल-आवास के बेहतर संरक्षण का संकेत है।
कौन-कौन सी प्रवासी पक्षियां बिहार में देखी जा रही हैं?
बिहार में ग्रे-हेडेड लैपविंग, कॉमन सैंडपाइपर, ग्लॉसी आइबिस, रेड-नेक्ड फाल्कन जैसी अनेक प्रवासी पक्षियां देखी जा रही हैं।
क्या यह प्रवासी पक्षियों का आगमन पर्यावरण के लिए अच्छा है?
हाँ, यह प्रवासी पक्षियों का आगमन नदियों, तालाबों और जंगलों के बेहतर संरक्षण का संकेत है, जो पर्यावरण के लिए अच्छा है।
क्या प्रवासी पक्षियों की संख्या बढ़ने की संभावना है?
विशेषज्ञों के अनुसार, प्रवासी पक्षियों की संख्या में वृद्धि की संभावना है, जो सकारात्मक संकेत है।
बड़ा गरुड़ कहाँ पाया जाता है?
बड़ा गरुड़ मुख्य रूप से असम के ब्रह्मपुत्र घाटी और बिहार के भागलपुर के कदवा दियारा क्षेत्रों में पाया जाता है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 10 मिनट पहले
  2. 23 मिनट पहले
  3. 24 मिनट पहले
  4. 27 मिनट पहले
  5. 28 मिनट पहले
  6. 49 मिनट पहले
  7. 53 मिनट पहले
  8. 1 घंटा पहले