साकेत इमारत हादसा: सुप्रीम कोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल, एमसीडी पर लापरवाही का गंभीर आरोप
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली के साकेत इलाके में 30 मई को हुए इमारत हादसे — जिसमें 6 लोगों की मौत हो गई थी — के मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त एमिकस क्यूरी ने 8 जून को शीर्ष अदालत में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की है। रिपोर्ट में दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) पर अवैध निर्माण की लगातार अनदेखी और घोर लापरवाही का आरोप लगाया गया है।
मुख्य घटनाक्रम
30 मई की शाम करीब 7 बजकर 44 मिनट पर साकेत मेट्रो स्टेशन के निकट सैदुलाजाब इलाके में एक बहुमंजिला इमारत अचानक ढह गई। इमारत पास की एक कैंटीन पर गिरी, जहाँ उस वक्त कई लोग खाना खा रहे थे। दिल्ली फायर सर्विस को तत्काल सूचना मिली और फायर टेंडर घटनास्थल पर भेजे गए। मलबा हटाने के लिए मशीनों और मानव-बल दोनों का उपयोग किया गया। इस हादसे में 6 लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हुए।
एमिकस क्यूरी की रिपोर्ट में क्या है
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल स्टेटस रिपोर्ट में एमिकस क्यूरी ने एमसीडी पर सीधे आरोप लगाया है कि उसकी लापरवाही के चलते यह अवैध इमारत वर्षों तक खड़ी रही। रिपोर्ट में शीर्ष अदालत से चार प्रमुख माँगें की गई हैं: दिल्ली की समस्त इमारतों का संरचनात्मक ऑडिट कराया जाए; एमसीडी से स्पष्टीकरण माँगा जाए कि अवैध निर्माण इतने वर्षों तक कैसे जारी रहा; जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान कर उनके विरुद्ध कार्रवाई की जाए; और पीड़ित परिवारों को मुआवज़ा दिलाने तथा कार्रवाई की पूरी रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत की जाए।
पुलिस कार्रवाई और गिरफ्तारी
पुलिस ने इस मामले में गैर-इरादतन हत्या सहित कई गंभीर धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की है। इमारत के 71 वर्षीय मकान मालिक करमबीर सेजवाल को गिरफ्तार किया जा चुका है। यह ऐसे समय में आया है जब दिल्ली में अवैध निर्माण और भवन सुरक्षा को लेकर पहले से ही सवाल उठते रहे हैं।
सरकार और एमसीडी की जवाबदेही
गौरतलब है कि दिल्ली में अवैध निर्माण की समस्या दशकों पुरानी है, लेकिन नियामक तंत्र की विफलता बार-बार सामने आती रही है। आलोचकों का कहना है कि एमसीडी के निरीक्षण तंत्र में व्यापक खामियाँ हैं, जिनके चलते खतरनाक इमारतें बिना किसी रोकटोक के खड़ी रहती हैं। रिपोर्ट में बिल्डिंग कानूनों के उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई की माँग की गई है।
क्या होगा आगे
सुप्रीम कोर्ट अब एमसीडी से जवाब-तलब कर सकता है। एमिकस क्यूरी की माँग के अनुसार यदि दिल्ली की सभी इमारतों का संरचनात्मक ऑडिट कराया जाता है, तो यह शहर के भवन-सुरक्षा परिदृश्य में एक बड़ा बदलाव होगा। पीड़ित परिवार न्याय और मुआवज़े की प्रतीक्षा में हैं, जबकि अदालती प्रक्रिया अगली सुनवाई तक और स्पष्ट होगी।