राजनाथ सिंह और रिचर्ड मार्ल्स की 1 जून को दूसरे भारत-ऑस्ट्रेलिया रक्षा संवाद की संयुक्त अध्यक्षता
सारांश
मुख्य बातें
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और ऑस्ट्रेलिया के उप प्रधानमंत्री एवं रक्षा मंत्री रिचर्ड मार्ल्स 1 जून 2026 को नई दिल्ली में 'दूसरे भारत-ऑस्ट्रेलिया रक्षा मंत्रियों के संवाद' की संयुक्त अध्यक्षता करेंगे। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब हिंद-प्रशांत क्षेत्र वैश्विक रणनीतिक विमर्श के केंद्र में है और दोनों देशों की व्यापक रणनीतिक साझेदारी लगातार गहरी होती जा रही है।
बैठक का एजेंडा
रक्षा मंत्रालय के अनुसार इस संवाद में रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग को और सुदृढ़ करने, दोनों देशों की सेनाओं के बीच परिचालन तालमेल बढ़ाने तथा संयुक्त सैन्य अभ्यासों को नई गति देने पर विस्तृत चर्चा होगी। विशेष रूप से रक्षा उपकरणों के सह-विकास और सह-उत्पादन की संभावनाओं पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा, जिससे दोनों देशों की रक्षा औद्योगिक क्षमता को मज़बूती मिल सके।
हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और मुक्त नौवहन सुनिश्चित करने के लिए साझा रणनीति तैयार करना इस संवाद का प्रमुख हिस्सा होगा। रक्षा मंत्रालय का मानना है कि भारत की मुक्त, खुले और समावेशी हिंद-प्रशांत की अवधारणा में ऑस्ट्रेलिया एक अहम साझेदार है।
पिछले संवाद की पृष्ठभूमि
मार्ल्स की यह यात्रा अक्टूबर 2025 में ऑस्ट्रेलिया में आयोजित पहले रक्षा मंत्रियों के संवाद के बाद हो रही है। गौरतलब है कि यह बैठक केवल द्विपक्षीय औपचारिकता नहीं, बल्कि भारत-ऑस्ट्रेलिया व्यापक रणनीतिक साझेदारी के क्रमिक विस्तार की अगली कड़ी मानी जा रही है। विश्लेषकों के अनुसार दोनों देशों के बीच रक्षा संबंध पिछले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय रूप से प्रगाढ़ हुए हैं।
भारत-अमेरिका रक्षा सहयोग पर भी प्रगति
इसी क्रम में रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की सशस्त्र सेवा समिति के सदस्य पैट हैरिगन के नेतृत्व में भारत आए अमेरिकी संसदीय प्रतिनिधिमंडल के साथ विस्तृत चर्चा की। दोनों पक्षों ने भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी की प्रगति की समीक्षा की और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार-विमर्श किया।
वार्ता में समुद्री सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को सुदृढ़ करने जैसे विषय प्रमुखता से शामिल रहे। दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति जताई कि भारत-अमेरिका बढ़ता रक्षा सहयोग क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा के लिए निर्णायक भूमिका निभा सकता है।
हिंद-प्रशांत में भारत की व्यापक रणनीति
यह ऐसे समय में आया है जब भारत हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपनी रणनीतिक उपस्थिति को व्यवस्थित रूप से विस्तार दे रहा है — ऑस्ट्रेलिया, जापान और अमेरिका के साथ क्वाड ढाँचे के अंतर्गत सहयोग इसका एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। नई दिल्ली में होने वाला यह संवाद केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे क्षेत्र की सुरक्षा वास्तुकला के लिए एक स्पष्ट संदेश देगा।